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निजी जेब से सुधारी चौमूं के बगवाड़ा स्कूल की छत, प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह ने दिया सुरक्षा का तोहफाराजस्थान
5 सित॰ 2026, 1:13 pm (35 मिनट पहले)· 2

निजी जेब से सुधारी चौमूं के बगवाड़ा स्कूल की छत, प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह ने दिया सुरक्षा का तोहफा

जयपुर ग्रामीण के चौमूं स्थित बगवाड़ा सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल के प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने अपने निजी फंड से 7,000 वर्ग फीट छत की मरम्मत और वॉटरप्रूफिंग कराई है। इससे पहले भी उन्होंने असुरक्षित घोषित कमरों की जगह 200 बच्चों के बैठने के लिए टीन शेड बनवाया था।

जयपुर ग्रामीण के चौमूं इलाके में स्थित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बगवाड़ा की जर्जर इमारत और टपकती छत लंबे समय से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक बड़ा संकट बनी हुई थी। हर बारिश के मौसम में पुराने कमरों में सीलन फैल जाती थी और छत से पानी टपकने लगता था, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं का लंबा इंतजार करने के बजाय खुद आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने अपनी निजी जेब से पूरे स्कूल भवन की छत की मरम्मत और जलरोधक कार्य कराने का निर्णय लिया, ताकि बच्चे किसी भी खतरे के बिना अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।

7 हजार वर्ग फीट छत का वॉटरप्रूफिंग कार्य

मानसून के दौरान स्कूल की पुरानी इमारत में जगह-जगह सीलन और पानी के रिसाव से पठन-पाठन का माहौल बुरी तरह प्रभावित होता था। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने करीब 7 हजार वर्ग फीट के विशाल छत क्षेत्र पर वॉटरप्रूफिंग कराने का जिम्मा उठाया। उन्होंने अपने खुद के खर्च से लगभग 15 दिनों तक लगातार काम करवाकर छत की सीलन और रिसाव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला। इस व्यापक मरम्मत के बाद अब बारिश के मौसम में भी कक्षाएं सुरक्षित रहेंगी और विद्यार्थियों को बिना किसी डर के सूखा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।

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200 विद्यार्थियों की पढ़ाई बचाने के लिए टीन शेड की पहल

प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया द्वारा अपने व्यक्तिगत कोष से सहायता देने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले वर्ष जब इलाके में भारी बारिश हुई थी, तब शिक्षा विभाग ने सुरक्षा कारणों से विद्यालय के कई कमरों को असुरक्षित घोषित कर दिया था और उनमें बच्चों को बैठाने पर रोक लगा दी थी। उस कठिन समय में भी प्रधानाचार्य ने हार नहीं मानी और स्थिति को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने तुरंत अपनी निजी धनराशि खर्च करके विद्यालय के प्रार्थना स्थल पर एक बड़ा टीन शेड तैयार करवा दिया। इस शेड की बदौलत लगभग 200 बच्चों की पढ़ाई बारिश के बावजूद एक भी दिन बाधित नहीं हुई।

भामाशाहों और समाज के सहयोग से नए कमरों का निर्माण

स्कूल के विकास के लिए प्रधानाचार्य ने केवल अपने पैसों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज को भी इस बदलाव की प्रक्रिया से जोड़ा। उन्होंने स्थानीय भामाशाहों और दानदाताओं को प्रेरित किया, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। उनके प्रयासों से प्रभावित होकर दो भामाशाहों ने आगे आकर परिसर में दो नए अत्याधुनिक कक्षा-कक्षों का निर्माण कराया। इसके अलावा, विद्यालय के शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने भी मिलकर आवश्यक सामग्री और अन्य संसाधन जुटाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे छात्रों को आधुनिक और बेहतर सुविधाएं मिलने लगीं।

हरियाली और स्वच्छ वातावरण का निर्माण

भवन सुधार के साथ-साथ परिसर को हरा-भरा और सुंदर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विद्यालय परिसर में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया गया है। प्रधानाचार्य और स्टाफ की देखरेख में लगाए गए पौधे अब बड़े हो चुके हैं, जिससे पूरा परिसर हरा-भरा नजर आता है। यह स्वच्छ और प्राकृतिक माहौल न केवल स्कूल की सुंदरता बढ़ा रहा है, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी पैदा कर रहा है।

सुरक्षित शिक्षा और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश

अपने इस कदम पर बात करते हुए प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने कहा, "विद्यार्थी और यहां काम करने वाले स्टाफ एक सुरक्षित माहौल के हकदार हैं।" उनका मानना है कि यदि भवन की कमियां लंबे समय तक बनी रहते, तो इससे बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों पर बुरा असर पड़ता। स्थानीय लोग और अभिभावक प्रधानाचार्य की इस जनहितैषी पहल की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। प्रधानाचार्य का मानना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि सामूहिक सहयोग और व्यक्तिगत इच्छाशक्ति हो, तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है।

सवाल-जवाब

यह मामला किस स्कूल और क्षेत्र का है?
यह मामला जयपुर ग्रामीण के चौमूं क्षेत्र में स्थित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बगवाड़ा का है।
प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने अपने निजी खर्च से क्या कार्य करवाया है?
उन्होंने विद्यालय भवन की 7,000 वर्ग फीट छत की मरम्मत और वॉटरप्रूफिंग का काम अपने निजी कोष से करवाया है।
पिछले साल बारिश के समय प्रधानाचार्य ने क्या कदम उठाया था?
कमरों को असुरक्षित घोषित किए जाने पर उन्होंने अपने खर्चे से प्रार्थना स्थल पर टीन शेड बनवाया, जिससे 200 बच्चों की पढ़ाई जारी रही।
विद्यालय में भामाशाहों का क्या सहयोग रहा है?
प्रधानाचार्य के प्रयासों से दो भामाशाहों ने आगे आकर स्कूल परिसर में दो नए कक्षा-कक्षों का निर्माण कराया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

यह घटना एक लोक सेवक की कर्तव्यनिष्ठा का अनुकरणीय उदाहरण है, लेकिन साथ ही प्रशासनिक और बजट आवंटन की सुस्त कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब बुनियादी ढांचे की सुरक्षा निजी दान या प्रधानाचार्य की जेब पर निर्भर हो जाए, तो यह शिक्षा व्यवस्था में गहरी खामियों को उजागर करता है। भविष्य में इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शिक्षा विभाग को समयबद्ध रखरखाव और बजट के त्वरित वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी, अन्यथा ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·11 मिनट पहले

यह मामला सिर्फ एक प्रधानाचार्य की दरियादिली नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की उस सुस्ती का प्रमाण है जहाँ बजट मिलने में महीनों लग जाते हैं। जब तक शिक्षा विभाग जमीनी स्तर पर त्वरित रखरखाव अनुदान की विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागू नहीं करेगा, तब तक ग्रामीण विद्यालयों के शिक्षकों को इस प्रकार व्यक्तिगत संकटों से जूझना पड़ेगा।

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