उदयपुर जिले के मशहूर कृष्ण धाम श्री सांवलियाजी में इस बार जन्माष्टमी बेहद भव्य अंदाज में मनाई गई। मंदिर परिसर सुबह से ही श्रद्धालुओं से भर गया और भगवान सांवलिया सेठ के दर्शन के लिए लगी कतारें देर रात तक थमने का नाम नहीं ले रही थीं। सुबह मंगला आरती से शुरू हुआ भक्तों का तांता पूरे दिन जारी रहा।
1000 से ज्यादा ड्रोन ने रचा अनोखा नजारा
रात करीब 8 बजे मंदिर के ऊपर आसमान अचानक जगमगा उठा, जब एक हजार से ज्यादा ड्रोन एक साथ उड़ान भरते नजर आए। इन ड्रोन ने मिलकर आसमान में भगवान श्रीकृष्ण की कई मुद्राएं और उनसे जुड़े प्रसंग उकेरे। कभी राधा-कृष्ण की जोड़ी की झलक उभरी तो कभी बाल कन्हैया माखन चुराते हुए दिखे। यह नजारा देखकर मौजूद भीड़ तालियां बजाने और जयकारे लगाने से खुद को रोक नहीं पाई। श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल बोर्ड के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव ने कहा, "ड्रोन शो के जरिए भगवान की लीलाओं को आधुनिक अंदाज में पेश किया गया।" उन्होंने बताया कि आसमान में उभरी कृष्ण की आकृतियां श्रद्धालुओं के लिए यादगार पल बन गईं।
आधी रात को जन्म के साथ हुई महाआरती
जन्मोत्सव से ठीक पहले सांवलिया सेठ का खास श्रृंगार किया गया। जैसे ही घड़ी ने रात के बारह बजाए, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घोषणा के साथ मंदिर परिसर भक्ति के रंग में डूब गया। बड़ी तादाद में मौजूद भक्तों ने जन्म के इस पल के दर्शन किए और महाआरती में शामिल होकर जयकारे लगाए। मंदिर मंडल के सीईओ दिनेश चंद्र धाकड़ के मुताबिक, जन्मोत्सव के मौके पर मंदिर के ऊपर शानदार आतिशबाजी भी छोड़ी गई। रंग-बिरंगी लाइटिंग से सजे मंदिर के पीछे आसमान में फूटती आतिशबाजी ने पूरे माहौल को और खूबसूरत बना दिया। इसके अलावा मंदिर की दीवारों पर की गई प्रोजेक्शन मैपिंग ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा।
फूलों से सजा मंदिर, झांकियों में दिखी कृष्ण कथा
जन्माष्टमी के मौके पर पूरे मंदिर को फूलों से इस तरह सजाया गया था कि वह किसी दुल्हन जैसा दिख रहा था। परिसर में जगह-जगह धार्मिक झांकियां बनाई गई थीं, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण के बचपन से लेकर उनकी अलग-अलग लीलाओं तक की कहानी दिखाई गई। इसके साथ ही वहां अखाड़े के कलाकारों ने भी अपने करतब दिखाए, जिसे देखने के लिए भी अच्छी खासी भीड़ जुटी।
पार्किंग से मंदिर तक मुफ्त बस, गर्मी से बचाव का पुख्ता इंतजाम
इतनी बड़ी तादाद में पहुंचे श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो, इसके लिए मंदिर मंडल और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर अलग-अलग स्थानों पर वाहन खड़े करने की व्यवस्था की थी। पार्किंग स्थल से मंदिर तक भक्तों को लाने-ले जाने के लिए मुफ्त बसें चलाई गईं। वहीं लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने वाले भक्तों को धूप और गर्मी से राहत देने के लिए कई जगह पंखे, कूलर और पानी के कैंपर भी लगाए गए थे।


















