अमेरिकी कांग्रेस के 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने वाशिंगटन की सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट पार्टी का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो जाने के बाद अब व्हाइट हाउस में रिपब्लिकन प्रशासन के साथ सत्ता के तीखे टकराव का मंच तैयार हो चुका है। इस चुनाव परिणाम का सबसे गहरा और सीधा असर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को ताकत देने वाले विशाल डेटा सेंटर्स के देशव्यापी विस्तार पर पड़ने जा रहा है। देश भर के मतपेटियों से निकले रुझानों से यह स्पष्ट हो गया है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी बिजली खपत, महंगे होते यूटिलिटी बिल और रिहायशी इलाकों में बढ़ता प्रदूषण आम नागरिकों के लिए एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है। अब संसद में डेमोक्रेटिक बहुमत आने के साथ ही ऐसे डेटा सेंटरों के निर्माण पर नए संघीय प्रतिबंध लगने और स्थानीय समुदायों को कानूनी अधिकार मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
चुनाव के दौरान कई राज्यों में डेटा सेंटर्स का मुद्दा सीधे बैलेट बॉक्स तक जा पहुंचा। वोटरों के मिजाज को दर्शाते एक एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार, आधे से अधिक लोगों का मानना है कि एआई से फायदे के बजाय नुकसान ज्यादा होगा। इसके साथ ही करीब 80 प्रतिशत लोगों ने अपने नजदीकी इलाकों या मोहल्लों में डेटा सेंटर्स के निर्माण का खुला विरोध दर्ज कराया। वहीं लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने यह स्वीकार किया कि डेटा सेंटरों से जुड़ी समस्याएं उनके मतदान के फैसले में एक बेहद अहम या बड़ा कारक थीं। रंगभेद न्याय संगठन कलर ऑफ चेंज की अध्यक्ष और सीईओ नादिन स्मिथ ने इस चुनावी जनादेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंगलवार को हुआ मतदान वास्तव में इस बात पर एक जनमत संग्रह था कि 'यह अर्थव्यवस्था आखिर किसके लिए बनाई जा रही है।'
राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम रिहायशी इलाकों का संकट
डेटा सेंटर निर्माण के पक्षधरों और टेक उद्योग का पारंपरिक तर्क यह रहा है कि आधुनिक युद्ध कौशल और चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अमेरिका को बढ़त दिलाए रखने के लिए यह बुनियादी ढांचा बेहद आवश्यक है। इस दलील के जवाब में नादिन स्मिथ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा निश्चित तौर पर मायने रखती है, लेकिन इसके साथ ही साउथ मेम्फिस के उन परिवारों की जिंदगी भी उतनी ही मायने रखती है जो एआई सुपरकंप्यूटर को चलाने वाले गैस टर्बाइनों के जहरीले धुएं में सांस लेने को मजबूर हैं। उनका यह सीधा इशारा टेनेसी के मेम्फिस में स्थित एक्सएआई के उस विशाल डेटा सेंटर की ओर था, जहां भारी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गैस टर्बाइनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मध्यावधि चुनाव प्रचार के दौरान एआई समर्थक सुपर पीएसी ने मतदाताओं को रिझाने और अपने पक्ष में मोड़ने के लिए करोड़ों डॉलर बहा दिए थे। इसके बावजूद कई राज्यों के नागरिकों ने तकनीक के इस अंधाधुंध फैलाव के खिलाफ मजबूती से अपना विरोध दर्ज कराया। डेटा सेंटरों के खिलाफ यह जनआक्रोश ओहियो जैसे राज्य में सबसे मुखर होकर सामने आया, जहां ओपनएआई 500 अरब डॉलर के भारी-भरकम डेटा सेंटर प्रोजेक्ट की योजना बना रही है, जिसमें एनवीडिया की ओर से 100 अरब डॉलर से अधिक का वित्तीय सहयोग शामिल है। जमीनी विरोध का असर ऐसा रहा कि ओहियो की उस काउंटी ने डेटा सेंटरों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जहां मेटा ने 7,00,000 वर्ग फुट की सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। इसके साथ ही पूरे राज्य में स्थानीय समुदायों ने डेटा सेंटर विस्तार के उपायों के खिलाफ भारी संख्या में वोट दिया।
राज्यों में विरोधी नेताओं की जीत और उद्योग को झटका
ओहियो में राजनीतिक बदलाव को देखते हुए मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों का आकलन है कि नवनिर्वाचित डेमोक्रेटिक गवर्नर एमी एक्टन राज्य में डेटा सेंटर विस्तार योजनाओं के लिए एक बड़ा जोखिम साबित हो सकती हैं। सिर्फ ओहियो ही नहीं, बल्कि टेक्सास, मेन, मिशिगन, नेवादा, जॉर्जिया और साउथ कैरोलिना में भी उन उम्मीदवारों ने शानदार चुनावी जीत दर्ज की जिन्होंने डेटा सेंटरों के तेज अनियंत्रित विस्तार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। तकनीक और नीति मामलों की शोधकर्ता अंशी भट्ट ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह साफ हो गया है कि पैसा चुनावी नतीजे नहीं खरीद सकता। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि समकालीन राजनीति में मतदाताओं का समर्थन जुटाने और चुनावी माहौल बनाने के लिए एक 'स्थानीय खलनायक' खड़ा करना एक बेहद कारगर तरीका बन चुका है।
इस बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य के बाद अब अगले संभावित कदमों में नए निर्माण कार्यों पर रोक यानी मोरेटोरियम लगाना शामिल हो सकता है। इसके अलावा कंपनियों को पास के स्थानीय समुदायों पर खर्च लादने के बजाय अपने डेटा सेंटरों के लिए जरूरी पावर ग्रिड अपग्रेड का खर्च खुद उठाने के लिए बाध्य किया जा सकता है। वित्तीय फर्म गोल्डमैन सैक्स ने पहले ही यह अनुमान जताया है कि डेमोक्रेट्स को मिली चुनावी बढ़त के कारण जॉर्जिया और टेक्सास जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में डेटा सेंटर निर्माण कार्यों में देरी होना तय है।
संसद में प्रस्तावित कड़े कानून और संघीय नीतियां
संसद पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण स्थापित होने से उन विधेयकों को पारित कराने की संभावना भी मजबूत हो गई है, जिन्हें सीनेटर बर्नी सैंडर्स और प्रतिनिधि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज ने साल के शुरुआती महीनों में पेश किया था। हालांकि किसी भी ऐसे कानून को रिपब्लिकन राष्ट्रपति के संभावित वीटो का भी सामना करना पड़ सकता है। इस विधेयक में नए डेटा सेंटरों पर देशव्यापी अस्थायी रोक लगाने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि कांग्रेस पहले नए नियम और सुरक्षा मानक तय कर सके। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यह तकनीकी विस्तार आम जनता के बिजली बिलों में बढ़ोतरी न करे, पर्यावरण को गंभीर नुकसान न पहुंचाए और स्थानीय निवासियों की आधिकारिक सहमति के बिना आगे न बढ़े।
इसी तरह न्यू मैक्सिको के सीनेटर मार्टिन हेनरिक द्वारा पेश किया गया ग्रिड सेविंग्स एक्ट जैसा कानून भी चर्चा में है। इस कानून का स्पष्ट उद्देश्य यह व्यवस्था करना है कि विशाल एआई डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के दौरान बिजली ग्रिड के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का आर्थिक बोझ आम नागरिकों और स्थानीय आबादी की जेब पर न डाला जाए।
ऊर्जा खपत और पर्यावरण को लेकर गहराती चिंताएं
डेटा सेंटरों के संचालन से पर्यावरण पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव अब नीतिगत बहसों के केंद्र में आ चुका है। मेम्फिस में एक्सएआई के डेटा सेंटर के अलावा वर्जीनिया में भी हालात चिंताजनक हैं, जिसे दुनिया की डेटा सेंटर राजधानी माना जाता है। इन इलाकों में चौबीसों घंटे बिजली मुहैया कराने के लिए गैस टर्बाइनों का सहारा लिया जा रहा है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। गैर-लाभकारी शोध समूह डेटा एंड सोसाइटी की प्रोग्राम डायरेक्टर माइया वोलुकेम का मानना है कि ऊर्जा नियमों, भूमि अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण नीतियों में होने वाले संशोधन डेटा सेंटरों के विस्तार को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। विशेष रूप से तब, जब संसद में बहुमत हासिल करने वाले डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन द्वारा पूर्व में हटाई गई कुछ ऊर्जा सुरक्षा नीतियों की गहन समीक्षा और जांच शुरू करने की तैयारी में हैं।
माइया वोलुकेम ने आगे कहा कि संघीय स्तर पर चाहे जो भी कार्रवाई हो, जमीनी स्तर पर बन रहे भारी दबाव को देखते हुए राज्य और स्थानीय स्तरों पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने टेक्सास की नवनिर्वाचित गवर्नर जीना हिनोजोसा का उदाहरण दिया, जो पूरे राज्य में डेटा सेंटरों पर अस्थायी रोक लगाने की पुरजोर समर्थक हैं। यद्यपि मौजूदा गवर्नर ग्रेग एबॉट और जीना हिनोजोसा दोनों ने ही कुछ सीमाओं की वकालत की थी, लेकिन हिनोजोसा ने अपने पूरे चुनावी अभियान को डेटा सेंटरों के विरोध पर केंद्रित रखा। टेक्सास जैसे राज्य में यह एक अत्यंत संवेदनशील और प्रभावी मुद्दा साबित हुआ, जहां का बिजली ग्रिड पिछले एक दशक में बार-बार चरमराने और अत्यधिक संवेदनशील होने के कारण बदनाम रहा है।
सियासी पेच और स्थानीय जनता की उपेक्षा का इतिहास
हालाँकि यह रास्ता इतना सीधा नहीं है और इस मोर्चे पर अभी सबसे कठिन जंग बाकी है। नादिन स्मिथ का मानना है कि कांग्रेस द्वारा रोके जाने वाले फैसलों को दरकिनार करने के लिए आने वाले दिनों में कड़े संघर्ष या अतिरिक्त कार्यकारी आदेशों का सहारा लिया जा सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि खुद डेमोक्रेट पार्टी के भीतर भी पूर्ण प्रतिबंध को लेकर एकराय नहीं है और मतभेद बने हुए हैं, क्योंकि कई डेमोक्रेटिक नेताओं को यह डर सता रहा है कि डेटा सेंटरों पर रोक लगाने से एआई तकनीक की प्रगति धीमी पड़ जाएगी और इससे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचेगा। इसके साथ ही स्मिथ को उम्मीद है कि अब एआई लॉबिस्ट सांसदों को साधने के लिए सक्रिय हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स ने बिग टेक से पूरी जवाबदेही और वसूली करने के वादे पर चुनाव लड़ा है, और अब हमारा काम यह देखना है कि कैमरों की नजर हट जाने के बाद भी वे अपना यह वादा याद रखें।
यह जनविरोध महज कंक्रीट की विशाल इमारतों तक सीमित नहीं है, क्योंकि ऐसी इमारतें दशकों से बन रही हैं। एक प्राइवेट इक्विटी एग्जीक्यूटिव का कहना है कि लोगों को सीधे डेटा सेंटरों से कोई नफरत नहीं है, बल्कि उनका मुख्य असंतोष एआई तकनीक को लेकर है, और डेटा सेंटर्स तकनीक से जुड़ी जनता की अनिश्चितताओं और आशंकाओं का प्रतीक बन चुके हैं। वोलुकेम के अनुसार चुनाव परिणाम टेक कंपनियों की बेलगाम ताकत के खिलाफ लोगों की गहरी नाराजगी को दर्शाते हैं, और यह एक ऐसा विषय है जो दोनों दलों के मतदाताओं को समान रूप से प्रभावित कर रहा है।
नागरिकों में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी रही है कि स्थानीय फैसलों में उनकी राय को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, कैलिफोर्निया के गिलरॉय में अमेज़न ने 45 साल पुराने एक पुराने जोनिंग कानून का लाभ उठाकर स्थानीय निवासियों की जानकारी के बिना ही एक बड़ा डेटा सेंटर खड़ा कर दिया था। पुराने और अस्पष्ट जोनिंग नियम तथा स्थानीय अधिकारियों से साइन कराए जाने वाले गैर-प्रकटीकरण समझौते (एनडीए), जो उन्हें प्रोजेक्ट्स पर सार्वजनिक रूप से बोलने से रोकते हैं, जनता के असंतोष को भड़काने की मुख्य वजह बने हैं। इन डेटा सेंटरों को अरबों डॉलर की टैक्स छूट दी गई है। हालांकि टेक कंपनियां स्थानीय रोजगार और सामुदायिक कार्यक्रमों के रूप में इनके फायदे गिनाती रही हैं, लेकिन अधिकांश आम लोगों की नजर में ये लाभ बहुत मामूली हैं।
नागरिक यह बुनियादी अधिकार चाहते हैं कि उनके इलाके में क्या बनेगा, इसका फैसला वे खुद करें। उन्हें यह डर सता रहा है कि एआई का यह विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ बेहद अमीर लोगों को और अधिक धनवान बनाएगा, जबकि आम बस्तियों को प्रदूषण झेलना पड़ेगा और बिजली बिलों में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। नादिन स्मिथ ने साफ शब्दों में कहा कि यदि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर वास्तव में एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है, तो इसका निर्माण करने वाली कंपनियां अपनी बिजली का खर्च खुद उठाने, स्वच्छ हवा के कड़े मानकों का पालन करने, अपनी खपत की जानकारी सार्वजनिक करने और पड़ोस में रहने वाले लोगों की सहमति से निर्माण करने में पूरी तरह सक्षम हैं। इतिहास की सबसे अमीर कॉरपोरेट कंपनियों को अपने बिजली बिलों के जरिए सब्सिडी देना किसी भी परिवार की मजबूरी नहीं होनी चाहिए।


















