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राजस्थान में रेल पटरी पर विस्फोट के बाद कई जांच एजेंसियां सतर्क, सीमा पार साजिश और नेटवर्क की हो रही गहन पड़तालराजस्थान
5 नव॰ 2026, 6:52 am (5 मिनट पहले)· 0

राजस्थान में रेल पटरी पर विस्फोट के बाद कई जांच एजेंसियां सतर्क, सीमा पार साजिश और नेटवर्क की हो रही गहन पड़ताल

श्रीगंगानगर में रेलवे लाइन पर हुए धमाके के बाद राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय जांच एजेंसियां कई सुरक्षा कोणों से पड़ताल कर रही हैं। इस घटना के पीछे किसी बड़ी आतंकी साजिश या ट्रायल ब्लास्ट की आशंकाओं को लेकर सीमावर्ती नेटवर्क पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में रेलवे लाइन को निशाना बनाकर किए गए धमाके ने देश की प्रमुख सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। पहली नजर में यह मामला रेल संपत्ति को क्षति पहुंचाने का प्रतीत हो रहा था, लेकिन घटना की प्रकृति और संवेदनशीलता को देखते हुए इसे अब व्यापक आतंकी साजिश के नजरिए से जांचा जा रहा है। जांचकर्ताओं के सामने सबसे अहम पहेली यह है कि इस धमाके का असल मकसद क्या था। क्या शरारती तत्वों का इरादा किसी यात्री गाड़ी को गिराने का था, केवल रेल व्यवस्था में बाधा उत्पन्न करना था, अथवा यह किसी भारी तबाही से पूर्व क्षमताओं को आंकने के लिए रचा गया कोई परीक्षण विस्फोट था। इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को भांपते हुए राजस्थान ATS, स्टेट इंटेलिजेंस, NIA, IB और मिलिट्री इंटेलिजेंस सहित तमाम एजेंसियां पड़ताल में उतर चुकी हैं। इनके साथ ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और पंजाब पुलिस भी अपने स्तर पर इनपुट जुटाने में जुटी हुई हैं, जबकि फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर बारीक साक्ष्य एकत्रित किए हैं।

घटनास्थल पर पारंपरिक साक्ष्यों की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई तकनीकी उलझन

स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस मामले में विस्फोटक अधिनियम, रेलवे अधिनियम, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं और BNS के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की है। जांच दल का ध्यान केवल बारूद की किस्म जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस कृत्य को अंजाम देने वाले जमीनी प्यादों, उनके सिंडिकेट और सीमा पार बैठे हैंडलर्स का पता लगाना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। इस प्रकरण में सबसे विचित्र तथ्य धमाके की कार्यप्रणाली बनी हुई है। प्राथमिक पड़ताल के दौरान घटनास्थल पर वे आम सुराग नहीं मिले हैं जो साधारणतः किसी बम विस्फोट के बाद पाए जाते हैं। विशेषज्ञों को ट्रैक और आसपास से न तो कोई स्पष्ट रासायनिक पाउडर मिला, न ही किसी तार, डेटोनेटर, कील या छर्रों के अवशेष बरामद हुए। इस असामान्य स्थिति के कारण तकनीकी दल यह समझने में लगे हैं कि आखिरकार विस्फोट किस तकनीक के जरिए कराया गया और इसमें किस गुप्त रासायनिक यौगिक अथवा उपकरण का सहारा लिया गया होगा।

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फॉरेंसिक प्रयोगशाला में अब धातु की पटरी पर पड़े दबाव के निशानों, विस्फोट के धुंधले अवशेषों और आसपास की मिट्टी के रासायनिक तत्वों का परीक्षण चल रहा है। वैज्ञानिक यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि इस्तेमाल किए गए फार्मूले की समानता क्या पहले पकड़े गए किसी पुराने मॉड्यूल से मेल खाती है। जांच अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि मौके पर पारंपरिक सामान न मिलने के आधार पर तुरंत किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, इसलिए हर सूक्ष्म पहलू की वैज्ञानिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।

समय और स्थान का तालमेल: खाली पटरी पर धमाके के पीछे छिपा रहस्य

धमाके का समय और जिस इलाके में इसे अंजाम दिया गया, वह जांच एजेंसियों के लिए कई अनसुलझे सवाल खड़े करता है। जिस स्थान पर विस्फोट हुआ, उसके एक तरफ सामान्य सड़क गुजरती है जबकि दूसरी ओर कुछ दूरी पर एक किसान परिवार का मकान स्थित है। पूरे इलाके में सार्वजनिक या निजी CCTV कैमरों का अभाव होने की वजह से संदिग्ध आवाजाही को चिन्हित करना जांच दलों के लिए एक कठिन चुनौती साबित हो रहा है। परिचालन रिकॉर्ड की जांच से सामने आया कि जिस पटरी पर यह विस्फोट हुआ, वहां से आखिरी ट्रेन धमाके से करीब 40 मिनट से एक घंटे पूर्व सुरक्षित निकल चुकी थी। उस रूट पर अगली ट्रेन की आवाजाही अगले दिन सुबह ही निर्धारित थी, जिसका सीधा अर्थ यह है कि जिस वक्त धमाका हुआ, उस दौरान ट्रैक पर कोई भी रेलगाड़ी मौजूद नहीं थी।

यह समय चक्र सुरक्षा एजेंसियों के बीच गंभीर विमर्श का विषय बन गया है। यदि अपराधियों का एकमात्र ध्येय किसी यात्री ट्रेन को निशाना बनाकर जनहानि पहुंचाना था, तो उन्होंने गाड़ी के ऐन गुजरने के समय धमाका क्यों नहीं किया। क्या साजिशकर्ताओं का उद्देश्य केवल रेलवे के बुनियादी ढांचे को क्षतिग्रस्त कर दहशत पैदा करना था, या फिर वे सुरक्षा गश्त और तकनीकी निगरानी की मुस्तैदी परखने के लिए एक सुनियोजित पूर्वाभ्यास कर रहे थे। इन तमाम संभावनाओं को ध्यान में रखकर टाइमलाइन का मिलान किया जा रहा है।

नए स्लीपर सेल द्वारा ट्रायल ब्लास्ट किए जाने का कोण

जांच का एक अहम सिरा इस आशंका से भी जुड़ता है कि कहीं यह किसी बड़ी आतंकी घटना से पूर्व अपनी क्षमता जांचने के लिए किया गया ट्रायल ब्लास्ट तो नहीं था। गैरकानूनी और उग्रवादी गिरोहों में यह देखा गया है कि नए भर्ती किए गए युवकों अथवा स्थानीय संपर्क सूत्रों को मुख्य साजिश से पहले छोटे-मोटे जोखिम भरे कार्य सौंपे जाते हैं। जांचकर्ता इस बिंदु पर काम कर रहे हैं कि क्या क्षेत्र में सक्रिय किसी नए स्लीपर सेल या नवगठित स्थानीय गिरोह को केवल अपनी वफादारी साबित करने और उपस्थिति दर्ज कराने के लिए यह काम सौंपा गया था। ऐसे कार्यों के जरिए अक्सर सीमा पार बैठे हैंडलर अपने स्थानीय नेटवर्क की तत्परता और पुलिस की प्रतिक्रिया के समय का आकलन करते हैं। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर अभी तक किसी नए स्लीपर सेल या ट्रायल ब्लास्ट की पुष्टि नहीं की गई है, और इस थ्योरी की वास्तविकता डिजिटल साक्ष्यों, फॉरेंसिक नतीजों और पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सीमा पार से जुड़े नेटवर्क और पुराने मामलों की पड़ताल

श्रीगंगानगर की भौगोलिक स्थिति अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब होने के कारण इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से संचालित नेटवर्क की भूमिका की भी सघन पड़ताल की जा रही है। इससे पूर्व पाकिस्तान आधारित शहजाद भट्टी गिरोह से जुड़े लोगों द्वारा भारतीय रेल नेटवर्क को निशाना बनाने की साजिशों के मामले सामने आ चुके हैं। जांचकर्ता यह खंगाल रहे हैं कि क्या इस ताजा घटना का तार शहजाद भट्टी या उससे जुड़े किसी पुराने मॉड्यूल से जुड़ा है। इसके अलावा, आतंकी फरतुल्लाह गौरी द्वारा पूर्व में भारतीय रेल पटरियों को उड़ाने संबंधी दी गई धमकियों के रिकॉर्ड को भी दोबारा खोला जा रहा है। खुफिया विंग पुराने डोजियर, इंटरनेट गतिविधियों, एन्क्रिप्टेड संदेशों और पूर्व में पकड़े गए आरोपियों के संपर्कों का श्रीगंगानगर मामले से मिलान कर रही है। हालांकि, मौजूदा चरण में ISI, शहजाद भट्टी अथवा फरतुल्लाह गौरी की सीधी संलिप्तता का कोई सार्वजनिक या ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।

खुरासान मॉड्यूल के पूर्व रिकॉर्ड पर भी नजर

इस घटना की कड़ियां खंगालते हुए सुरक्षा तंत्र खुरासान मॉड्यूल के पुराने इतिहास की भी समीक्षा कर रहा है। पिछले वर्ष खुरासान मॉड्यूल से संबद्ध तत्वों द्वारा रेलवे ट्रैकों को उड़ाने की साजिश रचने की जानकारियां उजागर हुई थीं, जिसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में धरपकड़ की गई थी। उस वक्त तेलंगाना पुलिस से मिले गुप्त सूचनाओं के आधार पर कई संदिग्धों को दबोचा गया था। श्रीगंगानगर की वारदात के बाद अब यह देखा जा रहा है कि क्या उस पुराने नेटवर्क से छूटे या बचे हुए किसी संपर्क सूत्र ने राजस्थान के इस इलाके में अपनी गतिविधियां तो नहीं बढ़ाई हैं। जांच एजेंसियां पहले गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों के डिजिटल फुटप्रिंट्स, मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया संपर्कों की तुलना श्रीगंगानगर के आसपास सक्रिय संदिग्धों के डेटा से कर रही हैं।

ड्रोन तस्करी और हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ

जांच के क्रम में स्थानीय पुलिस और खुफिया टीमों ने कुछ संदिग्ध स्थानीय युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। इन लोगों में से कुछ के संबंध सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से राजस्थान के भीतर असलहा, नशीले पदार्थ और कारतूस गिराने वाले तस्कर गिरोहों से होने का अंदेशा जताया जा रहा है। एजेंसियां इन संदिग्धों के आपराधिक इतिहास, पुराने संपर्कों और सीमा पार बैठे दलालों के साथ उनके लेन-देन की पड़ताल में जुटी हैं। जांच का मूल बिंदु यह समझना है कि क्या तस्करों के इस स्थापित नेटवर्क को अब हथियार और ड्रग्स की ढुलाई से आगे बढ़ाकर किसी आतंकी साजिश के लिए विस्फोटक पहुंचाने के काम में भी इस्तेमाल किया जाने लगा है।

कुलवंत सिंह से पूछताछ और अक्टूबर में आई खेप की कड़ियां

पंजाब पुलिस द्वारा पकड़े गए कुलवंत सिंह से हो रही पूछताछ भी इस केस में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। पंजाब पुलिस उससे सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियारों और बारूद की सप्लाई चेन के बारे में गहन पूछताछ कर रही है। सूत्रों के अनुसार, अक्टूबर के महीने में ड्रोन के जरिए श्रीगंगानगर इलाके में RDX और तुर्किये में बनी जिगाना पिस्तौलों की एक खेप गिराए जाने की जानकारी जांच के घेरे में आई है। सुरक्षा तंत्र अब यह कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रहा है कि क्या उस कथित खेप से निकला कोई विस्फोटक सामान इस रेल पटरी ब्लास्ट में इस्तेमाल किया गया था। क्या इस नेटवर्क को किसी बड़े हमले के लिए तैयार किया जा रहा था और क्या स्थानीय प्यादों को विदेश से सीधे निर्देश मिल रहे थे। कुलवंत सिंह के बयानों और तकनीकी सुरागों से इस मामले की वास्तविक दिशा तय होने की उम्मीद है।

सीमावर्ती प्रतिष्ठानों पर पहले से जारी था सुरक्षा अलर्ट

दीपावली से ठीक पहले पंजाब और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को लेकर एक अहम अलर्ट जारी हुआ था। उस खुफिया इनपुट में संकेत दिया गया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी सेना और अर्धसैनिक बलों के बड़े ठिकानों, उनके वाहनों और सुरक्षा काफिलों को निशाना बनाने की फिराक में हो सकती है। इस चेतावनी के बाद से ही सीमांत इलाकों में बल पूरी तरह सतर्क थे। अब श्रीगंगानगर में रेलवे पटरी पर हुए विस्फोट के बाद राजस्थान और पंजाब के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय नेटवर्क के बीच किसी संभावित तालमेल की जांच तेज कर दी गई है। एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि क्या रेलवे ट्रैक पर धमाका और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को लेकर मिले इनपुट किसी एक ही वृहद योजना का हिस्सा हैं।

जांच के छह बुनियादी बिंदु जिन पर टिकी है पड़ताल

इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच दल छह मुख्य सवालों पर अपना ध्यान केंद्रित किए हुए हैं

  • उद्देश्य की स्पष्टता: क्या धमाका केवल पटरी को नुकसान पहुंचाकर भय पैदा करने के लिए था अथवा किसी ट्रेन को दुर्घटनाग्रस्त करने की गहरी साजिश रची गई थी?
  • परीक्षण का पहलू: क्या यह किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने से पहले विस्फोटक और नेटवर्क की कार्यक्षमता जांचने के लिए किया गया ट्रायल ब्लास्ट था?
  • नए स्लीपर सेल का दखल: क्या किसी नवगठित स्थानीय गिरोह या स्लीपर सेल को विदेशी हैंडलर के निर्देश पर यह पहला काम सौंपा गया था?
  • शहजाद भट्टी और सीमा पार गिरोह: क्या इस वारदात के पीछे पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क अथवा किसी अन्य पुराने मॉड्यूल का हाथ है?
  • ड्रोन खेप का संबंध: क्या अक्टूबर माह में ड्रोन द्वारा श्रीगंगानगर सीमा पर गिराए गए RDX और विदेशी हथियारों का इस घटना से कोई सीधा संबंध है?
  • बड़े हमले की पूर्व तैयारी: क्या इस साजिश के जरिए भविष्य में रेलवे तंत्र, सेना या अर्धसैनिक बलों के ठिकानों पर किसी बड़े हमले की रूपरेखा तैयार की जा रही थी?

फिलहाल स्थानीय पुलिस द्वारा विभिन्न सुसंगत अधिनियमों में मामला दर्ज किए जाने के बाद देश की शीर्ष जांच एजेंसियां अपनी संयुक्त कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं। फॉरेंसिक साक्ष्य, जब्त डिजिटल उपकरण और हिरासत में लिए गए लोगों से मिलने वाली जानकारियां ही यह साफ करेंगी कि यह घटना केवल उपद्रवियों की करतूत थी अथवा किसी अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क द्वारा बुनी गई गहरी साजिश की शुरुआत।

सवाल-जवाब

श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर किस तरह का धमाका हुआ?
श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक को निशाना बनाकर एक रहस्यमय विस्फोट किया गया, जिसमें पारंपरिक तार, कीलें या डेटोनेटर के अवशेष नहीं मिले हैं।
क्या धमाके के वक्त पटरी पर कोई ट्रेन मौजूद थी?
नहीं, धमाके के समय ट्रैक पूरी तरह खाली था; आखिरी ट्रेन घटना से करीब 40 मिनट से एक घंटे पहले वहां से गुजर चुकी थी।
इस मामले की जांच कौन सी सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं?
इस घटना की जांच राजस्थान ATS, इंटेलिजेंस, NIA, IB, मिलिट्री इंटेलिजेंस के साथ-साथ दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और पंजाब पुलिस कर रही हैं।
क्या इस ब्लास्ट में RDX के इस्तेमाल की बात सामने आई है?
अक्टूबर में ड्रोन के जरिए श्रीगंगानगर में RDX और तुर्किये निर्मित पिस्तौलों की कथित खेप पहुंचने की जानकारी मिली थी, जिसकी इस धमाके से कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
क्या किसी आतंकी संगठन या व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि हो चुकी है?
जांच एजेंसियां ISI, शहजाद भट्टी, फरतुल्लाह गौरी और खुरासान मॉड्यूल के रिकॉर्ड खंगाल रही हैं, लेकिन अभी किसी की सीधी संलिप्तता का सार्वजनिक प्रमाण नहीं मिला है।
पुलिस ने किन धाराओं और कानूनों के तहत मामला दर्ज किया है?
स्थानीय पुलिस ने विस्फोटक अधिनियम, रेलवे अधिनियम, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े कानूनों और BNS की प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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