राजस्थान के पाली जिले के अंतर्गत आने वाले सोजत कस्बे में शुक्रवार को स्वास्थ्य सेवाओं की लाचारी और मानवीय संवेदनाओं का मिलाजुला नजारा देखने को मिला। सोजत के व्यस्त जोधपुरिया गेट इलाके में अचानक एक गर्भवती महिला की तबीयत गंभीर हो गई और तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजनों ने तुरंत आपातकालीन 108 एम्बुलेंस को कॉल किया, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी जब सहायता गाड़ी मौके पर नहीं पहुंची, तो वहां मौजूद स्थानीय महिलाओं और राहगीरों ने मोर्चा संभाला। लोगों की तत्परता और सहयोग की बदौलत सड़क किनारे ही गूंजी नवजात की किलकारी ने पूरे परिवार को बड़ी राहत दी।
जोधपुरिया गेट पर अचानक बिगड़ी हालत और बढ़ता इंतजार
सोजत शहर के जोधपुरिया गेट के समीप जब यह घटना घटी, तब चारों तरफ सामान्य आवाजाही थी। अचानक रास्ते में एक गर्भवती महिला असहनीय प्रसव वेदना से कराहने लगी। परिजनों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए बिना समय गंवाए 108 आपातकालीन सेवा पर संपर्क साधा। परिवार को पूरा भरोसा था कि सूचना मिलने के तुरंत बाद एम्बुलेंस मौके पर पहुंचेगी और वे सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंच सकेंगे।
हालांकि, समय बीतने के साथ परिवार का तनाव और मायूसी दोनों बढ़ती गई। प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला की हालत लगातार नाजुक होती जा रही थी, लेकिन एम्बुलेंस का कहीं कोई अता-पता नहीं था। मिनट दर मिनट इंतजार लंबा होता गया और सड़क पर लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। परिजनों की परेशानी देखकर आसपास के दुकानदार और राहगीर भी मदद के लिए आगे आए।
स्थानीय महिलाओं ने संभाली कमान, सड़क पर गूंजी नवजात की किलकारी
जब स्पष्ट हो गया कि एम्बुलेंस के भरोसे रुकना जच्चा और अजन्मे बच्चे दोनों की जान जोखिम में डाल सकता है, तब मौके पर मौजूद स्थानीय महिलाओं ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। महिलाओं ने तुरंत सुरक्षित घेरा बनाकर स्थिति को संभाला और अपने स्तर पर पारंपरिक तरीके से प्रसव की प्रक्रिया शुरू कराई।
स्थानीय नागरिकों के सहयोग और महिलाओं की सूझबूझ से सड़क किनारे ही सुरक्षित प्रसव संपन्न हुआ और एक स्वस्थ नवजात बच्ची ने जन्म लिया। खुले आसमान के नीचे नवजात की किलकारी गूंजते ही जोधपुरिया गेट पर मौजूद लोगों ने राहत की गहरी सांस ली। पीड़ा और घबराहट से भरे माहौल में खुशी की लहर दौड़ गई और परिजनों की आंखों में संतोष के आंसू छलक आए।
निजी वाहन से पहुंचाया गया सोजत अस्पताल, जच्चा और बच्चा सुरक्षित
सड़क पर सुरक्षित प्रसव कराने के तुरंत बाद नवजात शिशु और प्रसूता को चिकित्सकीय निगरानी में ले जाना बेहद जरूरी था। चूंकि एम्बुलेंस तब तक भी नहीं पहुंची थी, इसलिए स्थानीय लोगों ने तनिक भी देर किए बिना एक निजी वाहन की व्यवस्था की। बेहद सावधानीपूर्वक जच्चा और नवजात बच्ची को वाहन में बिठाकर सीधे सोजत अस्पताल ले जाया गया।
सोजत अस्पताल पहुंचने पर वहां के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने दोनों को तुरंत भर्ती कर जरूरी चिकित्सीय जांच की। जांच के उपरांत डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि मां और नवजात बच्ची दोनों पूरी तरह स्वस्थ और खतरे से बाहर हैं। अस्पताल में सुरक्षित पहुंचने के बाद परिजनों ने सभी मददगार स्थानीय लोगों और महिलाओं का आभार व्यक्त किया।
आपातकालीन चिकित्सा तंत्र पर फिर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे वाकये ने ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में संचालित 108 आपातकालीन एम्बुलेंस प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय बाशिंदों का स्पष्ट कहना है कि यदि एम्बुलेंस समय पर पहुंच जाती, तो प्रसूता को खुले रास्ते पर ऐसे अत्यंत असहज और जोखिम भरे हालात का सामना नहीं करना पड़ता।
आपातकालीन सेवाओं में, विशेषकर प्रसव से जुड़े मामलों में प्रत्येक क्षण अत्यंत संवेदनशील और कीमती होता है। ऐसे मामलों में विलंब किसी की जान पर भी भारी पड़ सकता है। हालांकि, इस बात की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है कि शुक्रवार को सूचना दिए जाने के बावजूद 108 एम्बुलेंस मौके पर क्यों नहीं पहुंची या उसकी देरी के पीछे क्या तकनीकी अथवा परिचालन संबंधी कारण रहे। फिलहाल दोनों के सुरक्षित होने से परिवार बेहद खुश है, लेकिन इस लापरवाही ने व्यवस्था की सजगता पर बहस छेड़ दी है।



















