अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की तेज दौड़ पर शुक्रवार को अस्थायी ब्रेक लगता दिखा, जहां मुनाफावसूली के चलते यह करेंसी अपने 17 महीने के शीर्ष स्तर से पीछे हट गई। कारोबारी समुदाय का पूरा ध्यान अब जारी होने वाले अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल आंकड़ों पर केंद्रित है, जिससे पहले निवेशक जोखिम भरे दांव समेटते नजर आए। इसी बीच विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी बैठक के जारी होने वाले विवरण अब काफी हद तक पुराने साबित हो चुके हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उस बैठक के बाद रोजगार और पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स से जुड़े नए आंकड़े सामने आ चुके हैं, जिन्होंने आर्थिक परिदृश्य की दिशा बदल दी है।
नीतिगत सख्ती पर फेडरल रिजर्व के भीतर मतभेद
फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं के बीच आगामी कदमों को लेकर राय बंटी हुई दिखने की उम्मीद है। विवरण से यह स्पष्ट हो सकता है कि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की सीमा पर सदस्यों के बीच मतभेद बना हुआ है, हालांकि एक व्यापक सहमति इस बात पर भी कायम है कि मौद्रिक नीति को अधिक समय तक सख्त दायरे में बनाए रखना जरूरी है। आर्थिक अनुमानों के सारांश और अधिकारियों के हालिया बयानों के संदर्भ में देखा जाए तो अधिकांश नीति-निर्माता अगले कदम को लेकर किसी जल्दबाजी में नहीं दिखाई दिए हैं। इसके साथ ही अक्टूबर महीने में ब्याज दर बढ़ने की संभावनाओं में आई गिरावट के बाद बाजार प्रतिभागी मिनट्स का बारीकी से अध्ययन करने की तैयारी में हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख मुद्राओं का प्रदर्शन
अमेरिकी मुद्रा में कमजोरी का सीधा लाभ अन्य प्रमुख करेंसियों को मिलता दिखा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर संभलते हुए 0.6950 के स्तर की तरफ लौटा। वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी और लगातार बने हुए महंगाई के जोखिमों को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की अटकलों को फिर से बल मिला है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई करेंसी को मजबूत सहारा हासिल हुआ।
दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 158.00 के करीब पहुंचकर आगे की स्पष्ट दिशा तलाशने के लिए संघर्ष करता नजर आया। टोक्यो सीपीआई के अनुमान से अधिक गर्म रहने और डॉलर पर बने सामान्य दबाव के चलते यह जोड़ी अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे से नीचे फिसल गई। यूरोप की साझी मुद्रा यूरो में भी भारी दबाव दर्ज किया गया है, जहां यूरो-डॉलर जोड़ी गिरकर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 तक लुढ़क गई थी, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरोप के ऊर्जा संकट के प्रति जोखिम और भू-राजनीतिक चिंताओं ने डॉलर की मजबूती के साथ मिलकर यूरो पर दोहरा प्रहार किया है।
कीमती धातुओं और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की स्थिति
कमोडिटी बाजार में सोने की चाल में अनिश्चितता दर्ज की गई। पीली धातु रोजगार आंकड़ों के बाद शुरू हुई तेजी को बरकरार नहीं रख सकी और 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पार टिकने में विफल रही। हफ्ते के अंतिम कारोबारी दौर में सोना फिसलकर 4,180 डॉलर के दायरे में आ गया। अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली के दबाव के बावजूद निवेशक नए श्रम बाजार आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं, जिससे सोने में स्पष्ट उछाल सीमित रहा।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में शुक्रवार को राहत की लहर देखने को मिली। इस सुधार की अगुवाई बिटकॉइन ने की, जिसने 86,000 डॉलर के स्तर को पार कर लिया। इथेरियम ने भी अपने सकारात्मक रुख की पुष्टि करते हुए 2,700 डॉलर के ऊपर कदम बढ़ाया, हालांकि 2,800 डॉलर का दायरा इसके तात्कालिक उछाल को सीमित कर रहा है। इसी दौरान रिपल 1.54 डॉलर के आसपास कारोबार करता दर्ज किया गया।
आगामी आर्थिक घटनाओं पर टिकी निवेशकों की निगाहें
वैश्विक वित्तीय बाजारों में आगामी समय काफी हलचल भरा रहने वाला है, जहां ऊर्जा संकट और चढ़ती हुई बॉन्ड यील्ड्स बाजार की दिशा तय करने में मुख्य भूमिका निभाएंगी। निवेशकों की नजरें आईएसएम सर्विसेज पीएमआई और अमेरिकी ट्रेजरी की नीलामियों पर भी रहेंगी। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर कनाडा के रोजगार आंकड़े, जापान के मजदूरी से जुड़े आंकड़े और यूरोपियन सेंट्रल बैंक के मिनट्स भी जारी होने हैं, जिन पर वित्तीय जगत की पैनी नजर बनी रहेगी।


















