राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली और पेपरलीक के मामलों की पड़ताल कर रहे स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने दो अलग-अलग प्रकरणों में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को अपनी गिरफ्त में लिया है. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की इस धरपकड़ में एक तरफ राजस्थान लोक सेवा आयोग की वरिष्ठ अध्यापक सेकंड ग्रेड भर्ती परीक्षा-2022 में असली परीक्षार्थी के स्थान पर फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाने का सौदा करने वाला मुख्य दलाल पकड़ा गया है, वहीं दूसरी तरफ सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा-2022 के बहुचर्चित पेपरलीक नेटवर्क से जुड़ा एक प्रमुख हैंडलर भी दबोचा गया है. जांच एजेंसियों की यह दोहरी कार्रवाई राज्य में भर्ती परीक्षाओं की शुचिता को तार-तार करने वाले सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.
वरिष्ठ अध्यापक परीक्षा में 8 लाख रुपये में तय हुआ था फर्जी परीक्षार्थियों का सौदा
वरिष्ठ अध्यापक सेकंड ग्रेड भर्ती परीक्षा-2022 में डमी अभ्यर्थी बैठाने के खेल का खुलासा करते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने दलाल राजमोहन मीना को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि राजमोहन मीना ने मूल अभ्यर्थी अरुण कुमार मीणा की जगह परीक्षा कक्ष में दो डमी अभ्यर्थियों को बैठाने का पूरा बंदोबस्त किया था. इस पूरे फर्जीवाड़े के लिए 8 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था. इस मिलीभगत और धांधली के दम पर अरुण कुमार मीणा विज्ञान विषय का सरकारी शिक्षक बनने में कामयाब भी हो गया था. अब स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप इस बात की तहकीकात कर रहा है कि वे दोनों फर्जी अभ्यर्थी कौन थे और परीक्षा केंद्रों में पहचान छुपाकर उन्हें बैठाने की व्यवस्था किस तरह मुमकिन बनाई गई थी.
वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 24 दिसंबर 2022 को इस परीक्षा का आयोजन किया था. उस दौरान सामान्य ज्ञान, शैक्षिक मनोविज्ञान और विज्ञान विषय का पर्चा लीक होने की पुष्टि के बाद इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया था. पर्चा रद्द होने के पश्चात आयोग ने 29 जनवरी 2023 को पुनर्परीक्षा आयोजित की थी. जांच के अनुसार, इसी 29 जनवरी 2023 की पुनर्परीक्षा के दौरान मूल परीक्षार्थी अरुण कुमार मीणा को लाभ पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से दो डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में भेजा गया था. जांच एजेंसी अब उन सभी कड़ियों को खंगाल रही है जिनके जरिए यह फर्जीवाड़ा अंजाम दिया गया.
दलाल राजमोहन मीना 21 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने आरोपी राजमोहन मीना को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया, जहां से अदालत ने उसे 21 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया है. रिमांड अवधि के दौरान जांच अधिकारी उससे गहन पूछताछ कर रहे हैं ताकि डमी परीक्षार्थियों के नेटवर्क, पैसों के लेनदेन के तौर-तरीकों और गिरोह में शामिल अन्य चेहरों के बारे में पुख्ता सुराग जुटाए जा सकें. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल ने इस पूरी कार्रवाई और गिरफ्तारी की औपचारिक जानकारी दी है.
राजमोहन मीना का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है. उसका नाम पहले सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2021 में भी उजागर हो चुका है. उस भर्ती में राजमोहन खुद डमी अभ्यर्थी की मदद से परीक्षा पास करने का आरोपी रहा था, जिसके चलते स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने उसे पूर्व में भी गिरफ्तार किया था. जांच अधिकारियों के मुताबिक, खुद फर्जी तरीके से परीक्षा पास करने का तजुर्बा रखने वाला राजमोहन बाद में दूसरे अभ्यर्थियों के लिए डमी परीक्षार्थी उपलब्ध कराने वाले दलाल की भूमिका में आ गया. अब पुलिस रिमांड के दौरान उससे यह उगलवाने की कोशिश की जा रही है कि उसने किन-किन लोगों से संपर्क साधकर यह डमी सिंडिकेट खड़ा किया और क्या राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उसने इसी तरह फर्जी परीक्षार्थी बैठाए थे.
सब-इंस्पेक्टर भर्ती मामले में सुलझे पर्चे की साइट का हैंडलर सुनील भादू पकड़ा गया
दूसरी बड़ी कार्रवाई सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2022 पेपरलीक प्रकरण में हुई है, जहां स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने आरोपी सुनील भादू को दबोचा है. प्रारंभिक जांच के मुताबिक, सुनील भादू उस साइट का हैंडलर था जहां हल किया हुआ पर्चा पढ़ाया जाता था. जांच में यह भी सामने आया है कि उसका सीधा संबंध पेपरलीक मामले के कुख्यात आरोपियों भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका के गिरोह से था. पेपरलीक के पूरे तंत्र में हल किए गए पर्चों और परीक्षा सामग्री को अभ्यर्थियों तक गोपनीय तरीके से पहुंचाने का काम बेहद संवेदनशील माना जाता है, जिसमें सुनील की भूमिका सामने आई है.
सुनील भादू की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी अब पेपरलीक नेटवर्क के तकनीकी और जमीनी संपर्कों को जोड़ने में जुटी है. हालांकि, इस चरण में उसकी गतिविधियों, विशिष्ट भूमिका और पूछताछ से मिले तमाम ब्योरों की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन जांच अधिकारी भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका गिरोह के साथ उसके सीधे संपर्कों को लेकर कड़ियां जोड़ रहे हैं.
सब-इंस्पेक्टर भर्ती पेपरलीक में कुल गिरफ्तारियों का आंकड़ा 156 तक पहुंचा
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2022 पेपरलीक मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या 156 हो चुकी है. 156 गिरफ्तारियों का यह विशाल आंकड़ा साफ दर्शाता है कि भर्ती परीक्षाओं में सेंधमारी करने वाला यह नेटवर्क कितना गहरा और संगठित था. राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक होने और डमी परीक्षार्थियों को बैठाने की कार्यप्रणाली ने लंबे समय से पारदर्शी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
वर्तमान में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की प्राथमिकता राजमोहन मीना से 21 अक्टूबर तक की रिमांड अवधि में उन डमी अभ्यर्थियों के नाम-पते और पैसों के लेन-देन की पूरी श्रृंखला हासिल करना है. वहीं दूसरी तरफ, सुनील भादू से पूछताछ के जरिए सब-इंस्पेक्टर भर्ती पेपरलीक में शामिल फरार सहयोगियों, वित्तीय लेन-देन और हल किए गए पर्चों के वितरण से जुड़ी नई जानकारियां सामने आने की उम्मीद की जा रही है.























