राजस्थान के भरतपुर जिले में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की पीट-पीटकर की गई जघन्य हत्या के मामले में पुलिस प्रशासन ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस संवेदनशील वारदात से ठीक पहले खुफिया जानकारी जुटाने में बड़ी नाकामी सामने आने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। वैर पुलिस थाने में तैनात कांस्टेबल पवन कुमार को विभागीय स्तर पर निलंबित कर दिया गया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि जब गांव में भीड़ जुट रही थी और हथियारों का इंतजाम किया जा रहा था, उस वक्त स्थानीय खुफिया तंत्र पूरी तरह पंगु बना रहा, जिसकी वजह से समय रहते इस भीषण वारदात को नहीं रोका जा सका।
खुफिया विफलता और कांस्टेबल पर गिरी गाज
भरतपुर पुलिस विभाग द्वारा की गई इस ताजा कार्रवाई ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सस्पेंड किए गए कांस्टेबल पवन कुमार के जिम्मे क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण खुफिया और गुप्त सूचनाएं एकत्र करने का जिम्मा था। पुलिस अफसरों के मुताबिक, वारदात वाले दिन गांव में असामाजिक तत्वों के एकत्र होने, घातक हथियारों की व्यवस्था करने और फिर संगठित होकर खदान की ओर बढ़ने जैसे बड़े घटनाक्रम की भनक तक न लगना ड्यूटी में घोर लापरवाही को दर्शाता है। यदि कांस्टेबल द्वारा समय रहते वरिष्ठ अधिकारियों को अलर्ट जारी कर दिया जाता, तो शायद पुलिस बल मौके पर पहुंचकर पूर्व विधायक की जान बचा सकता था।
गौरतलब है कि भड़ाना हत्याकांड में पुलिस महकमे के भीतर यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले प्रशासनिक स्तर पर गाज गिरते हुए वैर थाने के थानाधिकारी (एसएचओ) को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, दो आरपीएस (राजस्थान पुलिस सेवा) अधिकारियों को भी विभागीय ढिलाई के आरोप में लाइन हाजिर किया जा चुका है। कांस्टेबल के खिलाफ हुई इस हालिया निलंबन की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि महकमा केवल बाहरी हत्यारों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि वारदात से पहले पुलिस विभाग के भीतर रही सूचना प्रणाली की खामियों और अधिकारियों की भूमिका की भी गहराई से परत-दर-परत जांच कर रहा है।
भौंडा गांव से खदान तक का घटनाक्रम
पुलिस जांच में सामने आई कड़ियों के अनुसार, वैर पुलिस थाने से कुछ ही दूरी पर स्थित भौंडा गांव इस पूरी साजिश का मुख्य केंद्र बिंदु बना। आरोप है कि इस हत्याकांड के मुख्य सूत्रधार मुकेश फौजी ने 11 अक्टूबर को योजनाबद्ध तरीके से भौंडा गांव के लोगों को उकसाया और एकत्रित किया। देखते ही देखते गांव में हथियार जुटाए गए और एक भीड़ तैयार की गई। इसके बाद हमलावरों का यह पूरा दस्ता गांव से निकलकर करीब दो किलोमीटर दूर स्थित अतर सिंह भड़ाना की खदान तक जा पहुंचा।
खदान पर पहुंचते ही हमलावरों ने पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना को घेर लिया और उन पर लाठी-डंडों व हथियारों से अंधाधुंध हमला कर दिया। हमलावरों ने उन्हें पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही बना हुआ है कि वैर थाने के बिल्कुल नजदीक स्थित गांव में जब इतने बड़े पैमाने पर लोगों को भड़काकर हथियार एकत्र किए जा रहे थे, तब स्थानीय पुलिस प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। पुलिस महकमे का खुफिया नेटवर्क इस पूरे घटनाक्रम के दौरान खामोश क्यों बना रहा, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
दो साल पुराना रास्ता विवाद और अदालती फैसला
इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड की जड़ें दो साल पुराने खदान और रास्ते के विवाद से जुड़ी हुई हैं। मामले की छानबीन से सामने आया है कि मुख्य आरोपी मुकेश फौजी भारतीय सेना में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुआ था। फौज से वापस लौटने के बाद वह पिछले लगभग दो वर्षों से अतर सिंह भड़ाना के खिलाफ ग्रामीणों को लगातार लामबंद करने और भड़काने का काम कर रहा था। विवाद मुख्य रूप से खदान तक जाने वाले आम रास्ते को लेकर था, जिस पर आवाजाही रोकने के लिए पूर्व में कई तरह के विरोध प्रदर्शन और आंदोलन भी चलाए गए थे।
विवाद इस हद तक बढ़ चुका था कि खदान की ओर जाने वाले रास्ते पर आवाजाही को पूरी तरह बाधित करने के लिए खाइयां तक खोद दी गई थीं। हालांकि, रास्ते के इस कानूनी विवाद में मुकेश फौजी को अदालत से झटका लगा था और वह कोर्ट में केस हार गया था। इसके बावजूद, गांव में खदान के दोबारा शुरू होने की आशंका को लेकर लगातार भारी तनाव व्याप्त था। 11 अक्टूबर को जब पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना अपनी खदान का कामकाज फिर से शुरू कराने के सिलसिले में भौंडा गांव पहुंचे, तो इस बात से बौखलाए मुकेश फौजी और उसके समर्थकों ने ग्रामीणों को फिर से उकसा दिया। इसके बाद खदान पर पहुंचकर भड़ाना की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
राजनीतिक महत्वाकांक्षा और जांच का दायरा
हत्याकांड के इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य आरोपी मुकेश फौजी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी खुलकर सामने आ रही हैं। प्राप्त जानकारियों के मुताबिक, सेवानिवृत्त सूबेदार मुकेश फौजी स्थानीय राजनीति में पैर जमाने की फिराक में था और आगामी जिला परिषद चुनाव लड़ने की पुरजोर तैयारी कर रहा था। उसने अपने प्रचार के लिए बाकायदा पोस्टर और बैनर भी छपवा लिए थे। इतना ही नहीं, वह कांग्रेस पार्टी से जिला परिषद सदस्य का टिकट हासिल करने के लिए भी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा था।
हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुकेश फौजी की राजनीतिक तैयारियों और इस हत्याकांड के सीधे संबंधों को लेकर अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच टीम का मानना है कि हत्या के पीछे का मुख्य तात्कालिक कारण खदान का पुराना विवाद और खदान के पुनः चालू होने की बौखलाहट ही नजर आ रही है। इस बीच पुलिस को बड़ी सफलता भी हासिल हुई है और मुख्य आरोपी मुकेश फौजी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस हिरासत में उससे लगातार पूछताछ की जा रही है, जिससे हत्या के अन्य छिपे हुए पहलुओं का पर्दाफाश होने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर, पुलिस विभाग अपनी आंतरिक जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटा है कि सूचना तंत्र में चूक किस स्तर पर हुई थी और क्या समय पर कदम उठाकर इस वारदात को टाला जा सकता था।




















