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राजस्थान में कमजोर मानसून से बढ़ी चिंता, 693 बांधों में से सिर्फ 72 पूरी तरह भरेराजस्थान
8 सित॰ 2026, 5:03 pm (51 मिनट पहले)· 2

राजस्थान में कमजोर मानसून से बढ़ी चिंता, 693 बांधों में से सिर्फ 72 पूरी तरह भरे

राजस्थान में इस बार मानसून की बेरुखी से बांधों में पानी का स्तर काफी कम रह गया है। प्रदेश के कुल 693 बांधों में से केवल 72 बांध ही पूरी तरह भर पाए हैं, जबकि 192 बांध बिल्कुल सूखे पड़े हैं।

राजस्थान में इस बार मानसून का मौसम निराशाजनक रहा है। बारिश के असमान और कमजोर वितरण के कारण राज्य के अधिकांश जिलों में औसत से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। इस मौसमी बेरुखी का सीधा असर कृषि उत्पादन और भविष्य में पेयजल की उपलब्धता पर पड़ना तय है। हालांकि मानसून के सत्र में अभी लगभग 15 दिन बाकी हैं और इस दौरान होने वाली संभावित बारिश से कुछ हद तक स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन जल संकट की पूरी भरपाई होना असंभव सा लगता है।

बांधों में पिछले साल की तुलना में 28 फीसदी कम पानी

मानसून अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है, लेकिन राज्य के जल स्रोतों की मौजूदा स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मानसून सत्र का अधिकांश समय बीत जाने के बाद भी प्रदेश के 693 बांध अपनी कुल भराव क्षमता के केवल 59.43 फीसदी तक ही पहुंच पाए हैं। अगर पिछले साल की इसी अवधि से तुलना की जाए तो तस्वीर काफी अलग थी, जब राज्य के बांध 87.21 फीसदी तक भर चुके थे। इस प्रकार इस साल जल भंडारों में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 28 फीसदी कम पानी उपलब्ध है।

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पिछले साल के बचे पानी से मिली थी मजबूत शुरुआत

राजस्थान जैसे शुष्क राज्य में यह आंकड़ा महज एक संख्या नहीं है, बल्कि आने वाले महीनों की जीवन रेखा है। मानसून समाप्त होने के बाद इसी पानी का उपयोग पेयजल, सिंचाई और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए किया जाना है। इस साल राहत की बात यह रही कि मानसून की शुरुआत से पहले बांधों में पिछले साल की अच्छी बारिश का पर्याप्त पानी बचा हुआ था, जिसके चलते 15 जून से पहले ही जल भंडार 44.46 फीसदी भरे हुए थे। हालांकि 15 जून के बाद बारिश के मौसम में नई आवक केवल 15 फीसदी के आसपास ही सिमट कर रह गई, जिससे उम्मीद के मुताबिक पानी बांधों तक नहीं पहुंच सका।

192 बांध पड़े हैं पूरी तरह खाली

राज्य के जल प्रबंधन के सामने इस बार गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। कुल 693 बांधों में से 192 बांध पूरी तरह से खाली अवस्था में हैं। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल 72 बांध ही अपनी पूरी क्षमता तक भर सके हैं, जबकि शेष 429 बांधों में पानी तो आया है लेकिन वे अपनी पूरी क्षमता से बहुत नीचे हैं। इसका मतलब है कि अधिकांश जलाशयों में आंशिक पानी तो उपलब्ध है, लेकिन आगामी दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह नाकाफी साबित हो सकता है।

सभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी असंतुलन दिखाती है। कोटा संभाग में बांधों का जलभराव सबसे बेहतर यानी 74.33 फीसदी दर्ज किया गया है। इसके अलावा बांसवाड़ा में 60.79 फीसदी, जयपुर में 59.81 फीसदी और भरतपुर संभाग में 52.88 फीसदी पानी उपलब्ध है। उदयपुर संभाग के बांधों में जलस्तर 44.96 फीसदी तक पहुंचा है। सबसे चिंताजनक स्थिति जोधपुर संभाग की है, जहां बांधों में मात्र 17.52 फीसदी पानी ही पहुंच पाया है, जो पश्चिमी राजस्थान में सूखे के गहरे संकट को दर्शाता है।

बीसलपुर और रामगढ़ बांध की स्थिति

राजधानी जयपुर और आसपास के बड़े हिस्से को पानी पिलाने वाले प्रमुख बीसलपुर बांध में भी इस बार जलस्तर पूर्ण क्षमता तक नहीं पहुंच पाया है और यह 74.87 फीसदी भरा हुआ है। वहीं ईसरदा बांध में जलभराव 54.14 फीसदी दर्ज किया गया है। इसके अलावा ऐतिहासिक रामगढ़ बांध इस मानसून में भी पूरी तरह सूखा ही रह गया है। यदि मानसून के बचे हुए दिनों में झमाझम बारिश नहीं होती है, तो आगामी वर्ष में राजस्थान को अत्यंत सीमित जल संसाधनों के साथ काम चलाना होगा।

भविष्य की चुनौतियां और जल संरक्षण की जरूरत

कम पानी का यह संकट केवल बांधों के आसपास के क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका दूरगामी प्रभाव कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पेयजल व्यवस्था और भूजल स्तर पर भी पड़ेगा। मानसून की पूर्ण विदाई से पहले अब केवल आसमान की तरफ ही निगाहें टिकी हुई हैं। यदि अंतिम समय में बादल मेहरबान होते हैं तो कुछ राहत मिल सकती है, अन्यथा पानी की एक-एक बूंद का प्रबंधन करना और उसका संयमित उपयोग करना ही एकमात्र विकल्प बचेगा। पारंपरिक रूप से जल संरक्षण के लिए पहचाने जाने वाले इस राज्य के लिए यह वक्त एक बार फिर पुरानी परंपराओं और सहेजने की संस्कृति को अपनाने का है।

सवाल-जवाब

राजस्थान के बांधों में इस साल जलभराव की स्थिति क्या है?
प्रदेश के 693 बांधों में पानी का कुल स्तर केवल 59.43 फीसदी तक ही पहुंच पाया है।
पिछले साल की तुलना में इस साल बांधों में कितना कम पानी है?
इस साल बांधों में पिछले साल के मुकाबले करीब 28 फीसदी कम पानी उपलब्ध है।
कितने बांध पूरी तरह से खाली पड़े हैं?
राज्य के 693 बांधों में से 192 बांध पूरी तरह से खाली हैं।
कितने बांध पूरी क्षमता तक भर पाए हैं?
पूरे प्रदेश में केवल 72 बांध ही अपनी पूरी क्षमता तक भर सके हैं।
किस संभाग में बांधों की स्थिति सबसे कमजोर है?
जोधपुर संभाग में बांधों की स्थिति सबसे कमजोर है जहां सिर्फ 17.52 फीसदी पानी ही पहुंच पाया है।
बीसलपुर बांध में वर्तमान में जलस्तर कितना है?
बीसलपुर बांध में उसकी क्षमता का 74.87 फीसदी पानी उपलब्ध है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·19 मिनट पहले

राजस्थान के बांधों में जलस्तर का 59.43 प्रतिशत तक ही सिमट जाना और जोधपुर संभाग में महज 17.52 प्रतिशत पानी होना आने वाले महीनों में गंभीर जल संकट की ओर स्पष्ट इशारा करता है। पिछले साल के मुकाबले 28 प्रतिशत कम पानी होने से न केवल रबी की फसल प्रभावित होगी, बल्कि पेयजल आपूर्ति के लिए भी कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। यदि शेष दिनों में अपेक्षित बारिश नहीं हुई, तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हालात बिगड़ सकते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 मिनट पहले

यह जल संकट केवल कृषि और पेयजल तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े अपराधों और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। पानी की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों पर कब्जे, आपसी संघर्ष और तनाव बढ़ने की पूरी आशंका है। जोधपुर संभाग जैसे अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक मशीनरी को अभी से सतर्क होना होगा, क्योंकि संसाधनों की यह किल्लत जल माफिया के सक्रिय होने और चोरी जैसी घटनाओं को जन्म दे सकती है। पुलिस और प्रशासन को आगामी महीनों में पानी के वितरण को लेकर होने वाले संभावित विरोध प्रदर्शनों और संघर्षों से निपटने के लिए पुख्ता सुरक्षा योजना तैयार करनी चाहिए।

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