राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी फैल गई जब मुख्य द्वार के ठीक सामने अचानक एक जहरीला कोबरा सांप रेंगता हुआ दिखाई दिया। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों में इस खतरनाक जीव को देखते ही डर का माहौल बन गया। वहां मौजूद लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन वन्यजीव रक्षक गोविंद शर्मा को इसकी सूचना दी गई, जिन्होंने काफी मशक्कत के बाद इस विषैले सांप को सुरक्षित पकड़कर लाडपुरा के जंगलों में छोड़ दिया।
अस्पताल परिसर में अचानक मची अफरा-तफरी
चिकित्सा संस्थान के प्रवेश द्वार पर रोज़ाना की तरह भारी संख्या में लोगों की आवाजाही जारी थी। दूर-दराज के इलाकों से आए मरीज और उनके रिश्तेदार रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्ची कटाने, मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेने और भर्ती मरीजों की देखभाल में व्यस्त थे। इसी दौरान अचानक एक लंबा विषैला कोबरा रेंगता हुआ मुख्य प्रवेश द्वार के बेहद करीब आ पहुंचा। इतने खूंखार और जहरीले जीव को इतने पास देखकर लोगों के बीच चीख-पुकार मच गई। सुरक्षा और अपनी जान बचाने की होड़ में हर कोई दूर भागने की कोशिश करने लगा, जिससे मुख्य द्वार के पास बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लग गया।
पेड़ पर चढ़ा फुफकारता कोबरा और लोगों के असफल प्रयास
आस-पास के लोगों का शोर-शराबा और भारी भीड़ देखकर यह कोबरा काफी आक्रामक हो उठा। खुद पर खतरा महसूस करते हुए वह फुफकारने लगा और अपनी जान बचाने के इरादे से परिसर में मौजूद एक पेड़ पर तेज़ी से चढ़ गया। पेड़ की ऊंची डालियों में जाकर छिपे इस सांप को देखकर नीचे खड़े लोगों के होश उड़ गए। वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने लकड़ी के डंडों तथा पत्थरों के सहारे सांप को खदेड़ने का प्रयास भी किया, लेकिन सांप पेड़ की काफी ऊंचाई पर फन फैलाए बैठा था। इस वजह से कोई भी व्यक्ति उसके करीब जाने का जोखिम नहीं उठा सका और सभी प्रयास पूरी तरह विफल साबित हुए।
सर्प विशेषज्ञ की त्वरित कार्रवाई और सुरक्षित रेस्क्यू
मामले को अनियंत्रित होता देख स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रसिद्ध वन्यजीव एवं सर्प विशेषज्ञ गोविंद शर्मा से संपर्क साधा। सूचना मिलते ही गोविंद शर्मा अपनी प्रशिक्षित टीम और सांप पकड़ने वाले आवश्यक उपकरणों को लेकर बिना किसी देरी के अस्पताल पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन को निर्बाध रूप से चलाने के लिए अस्पताल गेट पर मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी पर पीछे किया। इसके बाद उन्होंने अत्यधिक सतर्कता और तकनीकी सूझबूझ का परिचय देते हुए पेड़ की शाखाओं से कोबरा को नीचे उतारने की जटिल प्रक्रिया शुरू की। काफी समय की मशक्कत और सावधानीपूर्वक प्रयासों के बाद गोविंद शर्मा ने इस खतरनाक कोबरा को पूरी तरह नियंत्रित कर स्नेक बॉक्स में सुरक्षित बंद कर दिया।
लाडपुरा के जंगलों में वापसी और विशेषज्ञों की सलाह
अस्पताल परिसर से विषैले कोबरा के सुरक्षित पकड़े जाने के बाद वहां मौजूद लोगों और चिकित्सा प्रशासन ने राहत महसूस की। वहां मौजूद नागरिकों ने स्नेक कैचर गोविंद शर्मा की त्वरित प्रतिक्रिया और साहस की दिल खोलकर प्रशंसा की। इसके तुरंत बाद रेस्क्यू टीम इस पकड़े गए कोबरा को शहरी रिहाइशी इलाके से काफी दूर लाडपुरा क्षेत्र के घने प्राकृतिक जंगलों में ले गई, जहाँ उसे सुरक्षित वातावरण में स्वतंत्र छोड़ दिया गया।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में अचानक आने वाले बदलावों और तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण रेंगने वाले जीव अपने स्वाभाविक बिलों से बाहर आ जाते हैं। अत्यधिक गर्मी या उमस के कारण भोजन और पानी की तलाश में ये सांप मानव बस्तियों, सार्वजनिक पार्कों और अस्पतालों के परिसरों की तरफ रुख कर लेते हैं। कोटा और इसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं लगातार देखने को मिल रही हैं। वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सांप को देखने पर घबराएं नहीं, उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तुरंत सर्पमित्रों या विभागीय टीम को सूचित करें।





















