2,800 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का नेटवर्क पूरा, नरेंद्र मोदी ने बताया 21वीं सदी की जीवनरेखाशनि गोचर का असर: 31 दिनों में मिथुन, तुला, कन्या, वृषभ और मकर राशि पर बरसेगी किस्मतइटानगर में विधानसभा ने एक साथ पास किए MSME, फायर सेफ्टी और एयरपोर्ट इलाके से जुड़े तीन विधेयकशिमला में नाई की दुकान की आड़ में चलता था अफीम का धंधा, ₹1.64 करोड़ मूल्य की संपत्ति जब्तहरियाणा में हड़ताल बेपटरी, 357 सफाईकर्मी काम पर लौटे; सरकार ने घोषित किया दो हजार रुपये जोखिम भत्ताअंग्रेजों से बगावत की सजा में मिट गया सुल्तानपुर के अमहट स्टेट का वजूद, राजा दियरा के हाथ गई पूरी संपत्तिमुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर बोले, कायर कहलाने से बेहतर है मौत, चार महीने में दे चुके हैं 23वीं फांसी21 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, चक्रवाती सिस्टम के कारण बिहार और झारखंड समेत कई इलाकों में बिगड़ेगा मौसमकोटा में फेंकी जाने वाली राख से बदली ईंट उद्योग की तस्वीर, तीन हजार लोगों को मिला कामसत्य निकेतन में भरभराकर गिरी इमारत और मध्य प्रदेश-गुजरात में जहरीली शराब का तांडव, व्यवस्था की नाकामी उजागर
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में विशाल कोबरा घुसने से हड़कंप, सर्प विशेषज्ञ गोविंद शर्मा ने रेस्क्यू कर लाडपुरा के जंगल में छोड़ाराजस्थान
8 सित॰ 2026, 3:50 pm (1 घंटे पहले)· 2

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में विशाल कोबरा घुसने से हड़कंप, सर्प विशेषज्ञ गोविंद शर्मा ने रेस्क्यू कर लाडपुरा के जंगल में छोड़ा

कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुख्य गेट के पास विशाल कोबरा देखने से परिसर में भगदड़ मच गई। वन्यजीव विशेषज्ञ गोविंद शर्मा ने सूझबूझ से सांप को पकड़कर लाडपुरा के घने जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया।

राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी फैल गई जब मुख्य द्वार के ठीक सामने अचानक एक जहरीला कोबरा सांप रेंगता हुआ दिखाई दिया। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों में इस खतरनाक जीव को देखते ही डर का माहौल बन गया। वहां मौजूद लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन वन्यजीव रक्षक गोविंद शर्मा को इसकी सूचना दी गई, जिन्होंने काफी मशक्कत के बाद इस विषैले सांप को सुरक्षित पकड़कर लाडपुरा के जंगलों में छोड़ दिया।

अस्पताल परिसर में अचानक मची अफरा-तफरी

चिकित्सा संस्थान के प्रवेश द्वार पर रोज़ाना की तरह भारी संख्या में लोगों की आवाजाही जारी थी। दूर-दराज के इलाकों से आए मरीज और उनके रिश्तेदार रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्ची कटाने, मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेने और भर्ती मरीजों की देखभाल में व्यस्त थे। इसी दौरान अचानक एक लंबा विषैला कोबरा रेंगता हुआ मुख्य प्रवेश द्वार के बेहद करीब आ पहुंचा। इतने खूंखार और जहरीले जीव को इतने पास देखकर लोगों के बीच चीख-पुकार मच गई। सुरक्षा और अपनी जान बचाने की होड़ में हर कोई दूर भागने की कोशिश करने लगा, जिससे मुख्य द्वार के पास बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लग गया।

ये भी पढ़ें

पेड़ पर चढ़ा फुफकारता कोबरा और लोगों के असफल प्रयास

आस-पास के लोगों का शोर-शराबा और भारी भीड़ देखकर यह कोबरा काफी आक्रामक हो उठा। खुद पर खतरा महसूस करते हुए वह फुफकारने लगा और अपनी जान बचाने के इरादे से परिसर में मौजूद एक पेड़ पर तेज़ी से चढ़ गया। पेड़ की ऊंची डालियों में जाकर छिपे इस सांप को देखकर नीचे खड़े लोगों के होश उड़ गए। वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने लकड़ी के डंडों तथा पत्थरों के सहारे सांप को खदेड़ने का प्रयास भी किया, लेकिन सांप पेड़ की काफी ऊंचाई पर फन फैलाए बैठा था। इस वजह से कोई भी व्यक्ति उसके करीब जाने का जोखिम नहीं उठा सका और सभी प्रयास पूरी तरह विफल साबित हुए।

सर्प विशेषज्ञ की त्वरित कार्रवाई और सुरक्षित रेस्क्यू

मामले को अनियंत्रित होता देख स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रसिद्ध वन्यजीव एवं सर्प विशेषज्ञ गोविंद शर्मा से संपर्क साधा। सूचना मिलते ही गोविंद शर्मा अपनी प्रशिक्षित टीम और सांप पकड़ने वाले आवश्यक उपकरणों को लेकर बिना किसी देरी के अस्पताल पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन को निर्बाध रूप से चलाने के लिए अस्पताल गेट पर मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी पर पीछे किया। इसके बाद उन्होंने अत्यधिक सतर्कता और तकनीकी सूझबूझ का परिचय देते हुए पेड़ की शाखाओं से कोबरा को नीचे उतारने की जटिल प्रक्रिया शुरू की। काफी समय की मशक्कत और सावधानीपूर्वक प्रयासों के बाद गोविंद शर्मा ने इस खतरनाक कोबरा को पूरी तरह नियंत्रित कर स्नेक बॉक्स में सुरक्षित बंद कर दिया।

लाडपुरा के जंगलों में वापसी और विशेषज्ञों की सलाह

अस्पताल परिसर से विषैले कोबरा के सुरक्षित पकड़े जाने के बाद वहां मौजूद लोगों और चिकित्सा प्रशासन ने राहत महसूस की। वहां मौजूद नागरिकों ने स्नेक कैचर गोविंद शर्मा की त्वरित प्रतिक्रिया और साहस की दिल खोलकर प्रशंसा की। इसके तुरंत बाद रेस्क्यू टीम इस पकड़े गए कोबरा को शहरी रिहाइशी इलाके से काफी दूर लाडपुरा क्षेत्र के घने प्राकृतिक जंगलों में ले गई, जहाँ उसे सुरक्षित वातावरण में स्वतंत्र छोड़ दिया गया।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में अचानक आने वाले बदलावों और तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण रेंगने वाले जीव अपने स्वाभाविक बिलों से बाहर आ जाते हैं। अत्यधिक गर्मी या उमस के कारण भोजन और पानी की तलाश में ये सांप मानव बस्तियों, सार्वजनिक पार्कों और अस्पतालों के परिसरों की तरफ रुख कर लेते हैं। कोटा और इसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं लगातार देखने को मिल रही हैं। वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सांप को देखने पर घबराएं नहीं, उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तुरंत सर्पमित्रों या विभागीय टीम को सूचित करें।

सवाल-जवाब

यह घटना कहाँ और किस अस्पताल में हुई?
यह घटना राजस्थान के कोटा में स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुख्य गेट के पास हुई।
अस्पताल परिसर से किस सांप को रेस्क्यू किया गया?
अस्पताल परिसर से एक विशाल और अत्यधिक विषैले कोबरा सांप को रेस्क्यू किया गया।
कोबरा को पकड़ने का काम किस वन्यजीव विशेषज्ञ ने किया?
प्रसिद्ध वन्यजीव विशेषज्ञ और सर्पमित्र गोविंद शर्मा ने अपनी टीम के साथ इस कोबरा को सुरक्षित पकड़ा।
पकड़े गए कोबरा को कहाँ छोड़ा गया?
रेस्क्यू किए गए कोबरा सांप को शहर से दूर लाडपुरा के घने जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार सांप अस्पतालों या रिहाइशी इलाकों में क्यों आ रहे हैं?
मौसम में बदलाव, बढ़ते तापमान और उमस के कारण भोजन तथा पानी की तलाश में सांप बाहर निकल रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·21 मिनट पहले

अस्पताल जैसे सार्वजनिक परिसरों में जहरीले जीवों का पहुंचना गंभीर सुरक्षा चूक और बुनियादी ढांचे की कमी को दर्शाता है। झाड़ियों और खुले परिसरों की नियमित सफाई न होने से ऐसे जीव शरण लेते हैं। यदि समय पर विशेषज्ञ की मदद न मिलती, तो भारी भीड़ के बीच बड़ा हादसा हो सकता था। प्रशासन को भविष्य में ऐसे जोखिमों से निपटने के लिए कड़े प्रबंध करने होंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 मिनट पहले

अस्पताल के मुख्य द्वार पर इस तरह का गंभीर वन्यजीव संकट केवल एक आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल और पर्यावरण प्रबंधन की बड़ी खामी है। यदि ऐसे मामलों में समय रहते त्वरित कार्रवाई न हो, तो यह भगदड़ किसी बड़े मानवीय नुकसान का कारण बन सकती थी। स्थानीय प्रशासन को इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पताल परिसरों में सख्त ऑडिट और त्वरित प्रतिक्रिया दल की तैनाती करनी चाहिए।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR