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कोटा में फेंकी जाने वाली राख से बदली ईंट उद्योग की तस्वीर, तीन हजार लोगों को मिला कामराजस्थान
8 सित॰ 2026, 3:58 pm (1 घंटे पहले)· 3

कोटा में फेंकी जाने वाली राख से बदली ईंट उद्योग की तस्वीर, तीन हजार लोगों को मिला काम

कोटा थर्मल पावर प्लांट की राख अब कचरा नहीं, कमाई का जरिया बन गई है, इससे बनी सस्ती और मजबूत ईंटों से करीब 3 हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है।

कोटा थर्मल पावर प्लांट से हर दिन निकलने वाली राख को कभी सिर्फ कचरा समझा जाता था, लेकिन अब यही राख शहर के ईंट कारोबार की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। ट्रक भर-भरकर यह राख भट्ठों तक पहुंच रही है और वहां सस्ती, मजबूत और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर ईंटें तैयार हो रही हैं, जिनकी बदौलत हजारों लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

पहले पॉल्यूशन की मार, अब राहत

इस कारोबार से जुड़े स्थानीय निवासी जयकिशन सरकार के मुताबिक, पहले लाल ईंटें बनाने के लिए भट्ठियों में लगातार आग जलानी पड़ती थी, जिससे आसपास के इलाकों में भारी एयर पॉल्यूशन और गर्मी की समस्या रहती थी। इसके अलावा लाल ईंटें जुटाने के लिए लाखेरी और केथून जैसे दूर-दराज के इलाकों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे माल ढुलाई यानी ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी काफी बढ़ जाता था। अब थर्मल प्लांट की राख को सीमेंट में मिलाकर बनाई जा रही ईंटों ने इन दोनों ही समस्याओं को काफी हद तक खत्म कर दिया है, क्योंकि यह कच्चा माल आसपास ही आसानी से मिल जाता है और भट्ठी में पकाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।

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दाम भी कम, मजबूती भी ज्यादा

आम उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में पारंपरिक लाल ईंट करीब 5 से 5.50 रुपये प्रति पीस में मिलती है, जबकि थर्मल राख से बनी ईंट महज 3.50 रुपये से 4 रुपये प्रति पीस के बीच उपलब्ध हो जाती है। मकान मालिक भीमराज गुर्जर ने बताया कि उन्होंने अपने घर और दुकान दोनों के निर्माण में यही ईंटें लगवाई हैं। उनका अनुभव है कि इन ईंटों की मजबूती और कटिंग दोनों काफी अच्छी होती है, इनमें सीलन यानी सीपेज की शिकायत भी नहीं आती और प्लास्टर पर होने वाला खर्च भी बच जाता है। चूंकि एक सामान्य मकान बनाने में औसतन 15 से 20 हजार ईंटों की जरूरत पड़ती है, इसलिए हर ईंट पर बचने वाला डेढ़ रुपये तक का फासला पूरे निर्माण की लागत में बड़ा फर्क डाल देता है।

तीन हजार लोगों को रोजगार, इलाके की बदली तस्वीर

कोटा थर्मल प्लांट के आसपास ही अब कई छोटे-बड़े उद्योग खड़े हो चुके हैं। प्लांट से महज 1 से 2 किलोमीटर के दायरे में स्थित गांवों में कई ईंट भट्ठे और आधुनिक मशीनें लग चुकी हैं, जो लगातार राख से ईंटें बना रही हैं। इस पूरे कारोबार से क्षेत्र के करीब 2 से 3 हजार मजदूरों और कामगारों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। जो राख कभी थर्मल पावर प्लांट के लिए महज एक बोझ और सिरदर्द हुआ करती थी, उसी ने अब कचरे से कंचन बनाने वाली पुरानी कहावत को हकीकत में बदल दिया है।

सवाल-जवाब

कोटा में ईंटें अब किससे बनाई जा रही हैं?
कोटा थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख को सीमेंट में मिलाकर ईंटें बनाई जा रही हैं।
थर्मल राख से बनी ईंट की कीमत कितनी है?
यह ईंट करीब 3.50 रुपये से 4 रुपये प्रति पीस में मिल जाती है, जबकि पारंपरिक लाल ईंट 5 से 5.50 रुपये प्रति पीस पड़ती है।
इस कारोबार से कितने लोगों को रोजगार मिल रहा है?
कोटा थर्मल प्लांट के आसपास इस कारोबार से करीब 2 से 3 हजार मजदूरों और कामगारों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है।
पहले लाल ईंटें कहां से मंगाई जाती थीं?
पहले लाल ईंटों के लिए लाखेरी और केथून जैसे दूर-दराज के इलाकों पर निर्भर रहना पड़ता था।
थर्मल राख से बनी ईंटों के क्या फायदे हैं?
इन ईंटों की मजबूती और कटिंग अच्छी होती है, इनमें सीलन नहीं आती, प्लास्टर का खर्च बचता है और भट्ठी में पकाने से होने वाला प्रदूषण भी नहीं होता।
एक मकान बनाने में कितनी ईंटों की जरूरत होती है?
एक सामान्य मकान के निर्माण में औसतन 15 से 20 हजार ईंटों की जरूरत होती है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 मिनट पहले

अपराध और न्याय व्यवस्था के दायरे से बाहर देखें, तो औद्योगिक कचरे का ऐसा वैध और सुनियोजित व्यावसायिक उपयोग पर्यावरण कानूनों के सख्त अनुपालन का बेहतरीन उदाहरण है। थर्मल प्लांट की राख के इस तरह के उपयोग से अवैध खनन और भूमि प्रदूषण जैसे मामलों में कानूनी तौर पर कमी आएगी, साथ ही स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन से सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को भी मजबूती मिलती है।

Rohan Verma@rohan-verma·22 मिनट पहले

यह मॉडल उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन सीख है, जहाँ थर्मल पावर प्लांटों के पास अक्सर राख के वैज्ञानिक प्रबंधन और पर्यावरणीय संकट की बड़ी चुनौतियाँ रहती हैं। यदि इस तरह के स्थानीय और टिकाऊ आर्थिक मॉडल को नीतिगत प्रोत्साहन मिले, तो यह क्षेत्रीय औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का एक स्थायी माध्यम बन सकता है।

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