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राजस्थान के शिक्षक इमरान खान ने बनाए 112 ऐप्स, 3 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाई डिजिटल पढ़ाईराजस्थान
8 सित॰ 2026, 4:02 pm (57 मिनट पहले)· 2

राजस्थान के शिक्षक इमरान खान ने बनाए 112 ऐप्स, 3 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाई डिजिटल पढ़ाई

अलवर के खारेड़ा गांव के संस्कृत शिक्षक इमरान खान ने अब तक 112 शैक्षणिक ऐप्स बनाए हैं, जिनकी पहुंच करीब 3 करोड़ यूजर्स तक जा चुकी है और उन्हें देशभर में 'ऐप गुरु' के नाम से जाना जाता है.

राजस्थान के अलवर जिले के खारेड़ा गांव में पढ़ाने वाले एक साधारण संस्कृत शिक्षक की पहचान आज पूरे देश में 'ऐप गुरु' के तौर पर बन चुकी है. इमरान खान नाम के इस शिक्षक ने अब तक 100 से ज्यादा शैक्षणिक ऐप्स तैयार किए हैं और इनकी पहुंच करीब 3 करोड़ यूजर्स तक जा चुकी है. एक सरकारी स्कूल के शिक्षक के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह सब बिना किसी बड़ी तकनीकी ट्रेनिंग के, अपने बलबूते पर हासिल किया है.

180 बच्चों को अकेले पढ़ाने की चुनौती से शुरू हुआ सफर

इमरान खान ने अपने करियर की शुरुआत साल 1999 में संस्कृत विभाग में गणित शिक्षक के तौर पर की थी. उस दौर में एक ही कक्षा में करीब 180 बच्चों को अकेले पढ़ाने की जिम्मेदारी उन पर थी, जो अपने आप में बड़ी चुनौती थी. साल 2009 में जब वे गांव के स्कूल में अकेले संस्कृत टीचर थे, तब उनके सामने रोज यही सवाल खड़ा होता था कि इतने सारे बच्चों को एक साथ किस तरह बेहतर ढंग से पढ़ाया जाए. इसी उलझन से उन्हें विचार आया कि पढ़ाई में मोबाइल और कंप्यूटर का सहारा लिया जाए. उन्होंने सबसे पहले एक वेबसाइट तैयार की, ताकि बच्चे कंप्यूटर पर भी पढ़ाई कर सकें. वेबसाइट के अनुभव के बाद ही उन्होंने ऐप बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया, और यहीं से उनकी असली यात्रा शुरू हुई.

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कलेक्टर की प्रेरणा से मिली नई दिशा

उस वक्त अलवर के कलेक्टर रहे आशुतोष पेडणेकर ने ऐप्स के बढ़ते महत्व को भांपते हुए इमरान खान को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. उस समय एंड्रॉयड फोन का चलन नया ही शुरू हुआ था और गांवों में स्मार्टफोन रखने वालों की संख्या भी बहुत कम थी. इसके बावजूद इमरान खान ने गूगल और उपलब्ध ऑनलाइन संसाधनों की मदद से खुद ऐप डेवलपमेंट सीखना शुरू किया. साल 2012 में उन्होंने विज्ञान विषय से जुड़ा अपना पहला ऐप तैयार किया. यहीं से ऐप बनाने का यह सिलसिला लगातार आगे बढ़ता चला गया और यही उनके जीवन का मकसद बन गया.

जब प्रधानमंत्री मोदी ने लंदन में किया जिक्र

साल 2015 में इमरान खान ने 50 ऐप्स तैयार करके मानव संसाधन विकास मंत्रालय को समर्पित किए थे. इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान अलवर के इमरान खान का जिक्र करते हुए कहा था, "मेरा भारत अलवर के इमरान में बसता है." एक सरकारी स्कूल के साधारण शिक्षक के लिए प्रधानमंत्री के मुंह से अपने काम की तारीफ सुनना बड़ी उपलब्धि थी और इसने उनके हौसले को और मजबूत कर दिया.

112 ऐप्स, 3 करोड़ यूजर्स और विदेशों तक पहुंच

लगातार काम करते हुए इमरान खान अब तक करीब 112 ऐप्स तैयार कर चुके हैं, जिनमें से करीब 100 ऐप्स गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद हैं. सभी ऐप्स पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी इनका फायदा उठा सकें. इन ऐप्स की पहुंच अब तक करीब 3 करोड़ यूजर्स तक हो चुकी है. खास बात यह है कि इमरान खान भारत सरकार के लिए ऐप्स बनाने के साथ ही मॉरीशस और फिलीपींस के लिए भी ऐप्स तैयार कर रहे हैं, यानी उनके काम की पहुंच भारत की सीमाओं से बाहर तक जा चुकी है.

राष्ट्रीय स्तर तक मिल चुके हैं कई सम्मान

इमरान खान को उनके काम के लिए केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर कई सम्मान और प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं. उन्हें राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार के अलावा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, राष्ट्रीय आईसीटी पुरस्कार, जमनालाल बजाज पुरस्कार और भामाशाह सम्मान पुरस्कार जैसे कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं. इतने सम्मान मिलने के बावजूद इमरान खान की सीखने की भूख कम नहीं हुई है, बल्कि वे लगातार खुद को नई तकनीक के हिसाब से अपडेट करते रहते हैं.

अब रोजाना 13 से 14 घंटे एआई और नई तकनीक पर काम

इमरान खान बताते हैं कि तकनीक लगातार बदल रही है और वे खुद को भी उसी रफ्तार से बदलते रहते हैं. वे रोजाना करीब 13 से 14 घंटे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऐप डेवलपमेंट से जुड़ी नई चीजें सीखने और उन्हें असल जिंदगी में लागू करने में बिताते हैं. उनका मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में गेम चेंजर साबित हो सकती है. उनका कहना है कि अगर विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही और समझदारी से इस्तेमाल करें, तो इससे उनके सीखने के अवसर और बढ़ सकते हैं. एक गांव के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ यह सफर आज देश-विदेश के करोड़ों यूजर्स तक पहुंच चुका है, और इमरान खान का कहना है कि यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है.

सवाल-जवाब

इमरान खान कौन हैं और वे कहां से हैं?
इमरान खान राजस्थान के अलवर जिले के खारेड़ा गांव के संस्कृत शिक्षक हैं, जिन्हें देशभर में 'ऐप गुरु' के नाम से जाना जाता है.
उन्होंने अब तक कितने ऐप्स बनाए हैं?
उन्होंने अब तक करीब 112 ऐप्स तैयार किए हैं, जिनमें से करीब 100 ऐप्स गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं.
उनके ऐप्स की पहुंच कितने यूजर्स तक है?
उनके ऐप्स की पहुंच अब तक करीब 3 करोड़ यूजर्स तक जा चुकी है.
उन्हें ऐप बनाने की प्रेरणा किससे मिली?
अलवर के तत्कालीन कलेक्टर आशुतोष पेडणेकर ने ऐप्स के बढ़ते महत्व को देखते हुए उन्हें इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया.
प्रधानमंत्री मोदी ने उनका जिक्र कब और कहां किया था?
साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि मेरा भारत अलवर के इमरान में बसता है.
उन्होंने पहला ऐप कब बनाया था?
उन्होंने साल 2012 में विज्ञान विषय से जुड़ा अपना पहला ऐप तैयार किया था.
क्या इमरान खान भारत के अलावा दूसरे देशों के लिए भी ऐप बना रहे हैं?
हां, वे भारत सरकार के लिए ऐप्स बनाने के साथ ही मॉरीशस और फिलीपींस के लिए भी ऐप्स तैयार कर रहे हैं.
उन्हें अब तक कौन-कौन से सम्मान मिल चुके हैं?
उन्हें राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, राष्ट्रीय आईसीटी पुरस्कार, जमनालाल बजाज पुरस्कार और भामाशाह सम्मान पुरस्कार जैसे सम्मान मिल चुके हैं.
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 मिनट पहले

इमरान खान का यह तकनीकी सफर यह साबित करता है कि संसाधनों की कमी से अधिक इच्छाशक्ति महत्वपूर्ण होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा का प्रसार करने का यह मॉडल साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी जैसे नए नीतिगत पहलुओं पर भी ध्यान आकर्षित करता है। यदि सरकारी स्तर पर ऐसे नवोन्मेषी शिक्षकों के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए, तो यह ग्रामीण भारत में ई-लर्निंग क्रांति को और अधिक सुरक्षित और व्यापक बना सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·22 मिनट पहले

इमरान खान का यह मॉडल यह रेखांकित करता है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्यों के ग्रामीण और सुदूर इलाकों में भी यदि शिक्षकों को तकनीकी प्रोत्साहन दिया जाए, तो शिक्षा की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार आ सकता है। जमीनी स्तर के ऐसे नवाचारों को नीतिगत समर्थन और प्रशासनिक सहयोग मिलने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि डिजिटल शिक्षा का लाभ समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े छात्र तक पहुंचे।

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