पाली में इन दिनों मौसम का मिजाज बेहद विचित्र बना हुआ है। दिन के समय तीखी धूप और गर्मी का अहसास होता है, जबकि रात होते ही हल्की ठंड महसूस होने लगती है और बीच-बीच में बारिश भी हो जाती है। मौसम के इस ट्रिपल अटैक ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तापमान में होने वाले इस उतार-चढ़ाव की वजह से पूरे प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
अस्पतालों में इस समय वायरल बुखार, फ्लू, डेंगू और सांस की नली से जुड़े संक्रमण के मामलों में भारी उछाल आया है। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि कौन सा संक्रमण लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं और इससे बचाव के लिए क्या उपाय करने चाहिए। इन तमाम विषयों पर राजस्थान के जाने-माने वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आलोक गुप्ता ने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सलाह साझा की है।
सितंबर और मार्च का महीना क्यों है खतरनाक
साल के कुछ खास महीनों में मौसमी बीमारियों का खतरा काफी अधिक हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सितंबर और मार्च का समय ऐसा होता है जब तापमान बेहद अनुकूल रहता है। इस अवधि में न तो अत्यधिक सर्दी होती है और न ही भीषण गर्मी। यह स्थिति बैक्टीरिया और वायरस के तेजी से पनपने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
वर्तमान दौर में कई तरह के वायरस अत्यधिक सक्रिय हैं। इनमें स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण वाले फ्लू वायरस, कोविड और श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले संक्रमण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निमोकोकल बैक्टीरिया भी इस दौरान काफी प्रभावी हो जाता है। कुछ ऐसे वायरस भी फैल रहे हैं जो पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे उल्टी और दस्त का कारण बनते हैं। ऐसे वायरस आमतौर पर दूषित पानी में पनपते हैं और इस मौसम में इनकी संख्या में काफी वृद्धि हो जाती है.
बचाव के लिए क्या कहते हैं डॉक्टर
संक्रमण से बचने के लिए वरिष्ठ चिकित्सक ने लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी है। जिन लोगों को सर्दी या खांसी की शिकायत है, उन्हें अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करना चाहिए ताकि संक्रमण आगे न फैले। घर से बाहर रहने के बाद जब भी घर लौटें, तो अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें।
खान-पान को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। किसी भी प्रकार का बासी भोजन या ऐसी खाद्य सामग्री का सेवन न करें जिसके खराब होने की आशंका हो। बाहर भोजन करते समय विशेष सतर्कता बरतें क्योंकि कई बार खाना परोसने वाले कर्मियों के हाथ स्वच्छ नहीं होते या जिस पानी से बर्तन धोए जाते हैं, वह दूषित हो सकता है। गंदे बर्तनों और पानी के उपयोग से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
किन लोगों को बरतनी चाहिए अत्यधिक सावधानी
कुछ वर्ग ऐसे हैं जिन्हें इस मौसम में अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखना चाहिए। साठ वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसके अलावा जो लोग पहले से ही मधुमेह, कमजोर किडनी, पथरी, निमोनिया जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं या हृदय रोग एवं कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाइयां ले रहे हैं, उन्हें बहुत सतर्क रहना चाहिए।
ऐसे संवेदनशील लोगों को बाजार का खुला खाना खाने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। चिकित्सक का यह भी सुझाव है कि यदि परिवार के किसी सदस्य को सर्दी-जुकाम या कोई अन्य संक्रमण है, तो उसे बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं से उचित दूरी बनाकर रखनी चाहिए और घर के भीतर भी मास्क पहनना चाहिए.

















