राजस्थान का सीकर जिला देश की रक्षा में अपने असीम योगदान और अनूठी परंपरा के लिए पूरे देश में एक अलग पहचान रखता है। यहां के गांवों और ढाणियों में भारतीय सेना में जाने का जज्बा पीढ़ियों से चला आ रहा है और यह वहां के जनजीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, सीकर जिले के 16 हजार से अधिक जवान इस समय भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं।
पूर्व सैनिकों की भूमिका और मार्गदर्शन
सीकर जिले में केवल सेवारत जवान ही नहीं हैं, बल्कि यहां 32 हजार से अधिक पूर्व सैनिक भी निवास करते हैं। ये रिटायर्ड सैनिक और अधिकारी नई पीढ़ी के युवाओं के लिए मार्गदर्शक और ट्रेनर की भूमिका पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं। जिले के कई गांवों में ये पूर्व सैनिक युवाओं को शारीरिक परीक्षा और सेना भर्ती की लिखित व शारीरिक तैयारी बिल्कुल निशुल्क करवाते हैं। इस मिले-जुले प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में फौज में जाने की तैयारी का माहौल दिन-प्रतिदिन और अधिक मजबूत होता जा रहा है।
युवाओं का पसीना और तैयार हुए खेल मैदान
जिले में सेना में भर्ती होने की दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के गांव-कस्बों में अब तक 500 से ज्यादा प्रैक्टिस ग्राउंड तैयार हो चुके हैं। सुबह सूरज निकलने से पहले ही इन मैदानों पर हजारों युवाओं की दौड़ शुरू हो जाती है। कोई युवा अपनी रनिंग का अभ्यास करता नजर आता है, तो कोई लंबी कूद, पुशअप्स और अन्य शारीरिक दक्षता के मानकों को साधने में पूरी मेहनत से जुटा रहता है।
शहरों से लेकर गांवों तक एक जैसी दीवानगी
इस तैयारी की सबसे खास बात यह है कि इन मैदानों पर पसीना बहाने वाले युवाओं में सिर्फ शहरी इलाकों के लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के गांवों और ढाणियों से आने वाले युवा भी भारी संख्या में शामिल हैं। कई जगहों पर तो स्थानीय स्तर पर युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर अपनी मेहनत से अभ्यास के लिए ट्रैक और खेल मैदान विकसित कर लिए हैं। पूर्व सैनिकों के अमूल्य अनुभव और आज की युवा पीढ़ी की कठिन मेहनत का यह अनूठा मेल सीकर में सेना भर्ती की एक बेहद मजबूत संस्कृति को आकार दे रहा है।
अग्निवीर योजना के बाद भी नहीं डिगा हौसला
केंद्र सरकार द्वारा अग्निवीर योजना लागू किए जाने के बाद भी सीकर के युवाओं के उत्साह और जोश में कोई कमी नहीं आई है। इस नई व्यवस्था के आने के बाद भी जिले के करीब 4 हजार अग्निवीर थलसेना, वायुसेना और नौसेना में चयनित होकर अपनी ट्रेनिंग और देश सेवा पूरी मुस्तैदी से कर रहे हैं। स्थानीय पूर्व सैनिकों का कहना है कि अग्निवीर भर्ती रैलियों के दौरान सीकर के युवाओं की भागीदारी लंबे समय से पूरे प्रदेशभर में सबसे बेहतरीन और आगे रही है।
सामाजिक जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सीकर में सेना से जुड़े लोगों की संख्या महज एक कागजी आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसका गहरा असर जिले के सामाजिक ताने-बाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देता है। सेवारत जवानों, पूर्व सैनिकों और अग्निवीर युवाओं को मिला दिया जाए, तो सीकर जिले से जुड़ा कुल सैन्य समुदाय 52 हजार से अधिक लोगों का बनता है। इन सभी परिवारों का बच्चों की शिक्षा, आधुनिक आवास, स्थानीय बाजार और तमाम व्यावसायिक सेवाओं में आर्थिक योगदान बेहद महत्वपूर्ण और रीढ़ की हड्डी जैसा है।



















