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खैरथल-तिजारा में कांग्रेस को बड़ा झटका, 11 पार्षद भाजपा में शामिलराजस्थान
16 सित॰ 2026, 1:00 am (58 मिनट पहले)· 1

खैरथल-तिजारा में कांग्रेस को बड़ा झटका, 11 पार्षद भाजपा में शामिल

राजस्थान निकाय चुनाव के परिणाम आने के तुरंत बाद खैरथल नगर परिषद में राजनीतिक तस्वीर पलट गई है। कांग्रेस के 11 पार्षद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए हैं, जिससे बोर्ड गठन का पूरा समीकरण बदल गया है।

राजस्थान निकाय चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद खैरथल नगर परिषद के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और सियासी समीकरण अचानक पूरी तरह बदल गए हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता विक्रम चौधरी अपने साथ 11 समर्थक पार्षदों को लेकर सीधे भाजपा में शामिल हो गए हैं। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत विक्रम चौधरी और उनके सभी समर्थक पार्षद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आधिकारिक आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बेहद तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे पूरे प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

खैरथल नगर परिषद का शुरुआती दलीय गणित

खैरथल नगर परिषद में कुल पार्षदों के लिए 45 वार्ड निर्धारित हैं। हाल ही में आए चुनाव परिणामों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस पार्टी ने कुल 20 वार्डों में जीत दर्ज करते हुए सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया था। इसके मुकाबले भारतीय जनता पार्टी के खाते में केवल 8 वार्ड ही आए थे, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 17 वार्डों पर कब्जा जमाया था। इन शुरुआती आंकड़ों के कारण साफ था कि किसी भी एक दल के पास अपने दम पर बोर्ड बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं था, जिसके चलते मुकाबला बेहद दिलचस्प और पेचीदा बना हुआ था।

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भाजपा खेमे में आई जबरदस्त मजबूती

कांग्रेस पार्टी से 11 पार्षदों के टूटकर भाजपा के पाले में आने से खैरथल नगर परिषद का पूरा सियासी गणित रातों-रात बदल गया है। भाजपा के पास पहले से 8 पार्षद थे और अब इन 11 नए पार्षदों का समर्थन मिलने के बाद भाजपा खेमे की कुल संख्या बढ़कर 19 हो गई है। इस अचानक हुए बड़े फेरबदल के बाद खैरथल में नगर परिषद के बोर्ड गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी की स्थिति पहले के मुकाबले बेहद मजबूत हो गई है, जबकि विपक्षी खेमे की मुश्किलें काफी हद तक बढ़ गई हैं।

कांग्रेस के लिए बड़ा आघात और भाजपा के लिए राहत

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस पार्टी ने खैरथल में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी और 20 वार्ड जीतकर वह सबसे आगे निकल आई थी। हालांकि चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद एक साथ 11 पार्षदों का पाला बदलकर दूसरे दल में चले जाना कांग्रेस पार्टी के लिए किसी बड़े राजनीतिक झटके से कम नहीं है। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी के लिए यह घटनाक्रम चुनावी नतीजों के तुरंत बाद एक बहुत बड़ी राहत के रूप में सामने आया है। चुनाव में कम सीटें मिलने के बावजूद अब पार्टी बोर्ड गठन की दौड़ में सबसे आगे और मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी है।

अध्यक्ष पद की कुर्सी के लिए तेज हुई जोड़-तोड़

निकाय चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद अब खैरथल में नगर परिषद के अध्यक्ष पद की कुर्सी हासिल करने के लिए राजनीतिक बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। पार्षदों की आपसी निष्ठा, उनकी कुल संख्या और आगामी बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर बहुत तेज हो गया है। एक साथ 11 पार्षदों के भाजपा के साथ खड़े हो जाने के बाद अब अध्यक्ष पद की पूरी तस्वीर भी स्पष्ट रूप से भाजपा के पक्ष में झुकती हुई दिखाई दे रही है। हालांकि बोर्ड गठन की औपचारिक प्रक्रिया अभी पूरी होना बाकी है, जिसके चलते आने वाले दिनों में खैरथल की स्थानीय राजनीति में और भी अधिक राजनीतिक हलचल और सरगर्मी देखने को मिल सकती है। जिस कांग्रेस पार्टी ने चुनाव के दौरान बोर्ड बनाने के लिए सबसे मजबूत बढ़त हासिल की थी, उसी खेमे में हुई इस बड़ी सेंध ने तमाम समीकरणों को पलट कर रख दिया है।

बोर्ड की कुर्सी तक पहुंचती निकाय चुनाव की जंग

खैरथल में घटी इन तमाम घटनाओं ने एक बार फिर इस सच्चाई को उजागर कर दिया है कि निकाय चुनावों की जंग सिर्फ मतदान केंद्रों पर वोटों की गिनती तक सीमित नहीं रहती है। चुनाव के परिणाम आने के बाद बोर्ड गठन के लिए पार्षदों को अपने पाले में लाने और उन्हें साधने की असली राजनीति इसके बाद शुरू होती है। अब खैरथल की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें पूरी तरह से इस बात पर टिकी हुई हैं कि भाजपा इस बदले हुए और अनुकूल संख्या बल के आधार पर अंततः नगर परिषद के बोर्ड का गठन कैसे करती है और अध्यक्ष की महत्वपूर्ण कुर्सी किसके हिस्से में आती है।

सवाल-जवाब

खैरथल नगर परिषद चुनाव में कुल कितने वार्ड थे?
खैरथल नगर परिषद में कुल 45 वार्ड थे।
चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के पास कितने वार्ड थे?
चुनाव परिणामों में कांग्रेस 20 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।
कितने कांग्रेसी पार्षद भाजपा में शामिल हुए हैं?
कांग्रेस के 11 समर्थक पार्षद विक्रम चौधरी के साथ भाजपा में शामिल हुए हैं।
पार्षदों ने किस नेता के आवास पर भाजपा की सदस्यता ली?
पार्षदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निवास पर पहुंचकर भाजपा का दामन थामा।
भाजपा के पास अब कुल कितने पार्षदों का समर्थन हो गया है?
भाजपा के 8 पार्षदों के साथ 11 नए पार्षदों का समर्थन जुड़ने से उनकी कुल संख्या 19 हो गई है।
चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने कितने वार्ड जीते थे?
चुनाव परिणाम में निर्दलीयों के खाते में 17 वार्ड आए थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 मिनट पहले

खैरथल नगर परिषद में कांग्रेस के ११ पार्षदों का पाला बदलना और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता लेना महज़ दलबदल नहीं, बल्कि बोर्ड गठन की प्रक्रिया में सुरक्षा और प्रशासनिक प्रभाव का सीधा खेल है। जहाँ भाजपा की संख्या ८ से बढ़कर १९ हो गई है, वहीं १७ निर्दलीय उम्मीदवार अब किंगमेकर की भूमिका में आ चुके हैं। जादुई आंकड़े तक पहुँचने के लिए निर्दलियों की यह भूमिका ही आगामी अध्यक्ष पद के चुनाव की असली दिशा तय करेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·6 मिनट पहले

यह घटना दिखाती है कि चुनाव परिणामों के बाद स्थानीय राजनीति में किस तरह तेजी से पाले बदलते हैं। कांग्रेस के पास शुरुआती बढ़त थी, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता ने समीकरण पलट दिए। अब जबकि भाजपा के पास १९ पार्षद हो गए हैं, १७ निर्दलीय उम्मीदवारों का रुख ही अध्यक्ष पद की कुर्सी का असली फैसला करेगा।

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