राजस्थान में 20 सितंबर को आयोजित हुई पुलिस सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती की पुनः परीक्षा को लेकर परीक्षार्थियों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। परीक्षा में शामिल हुए युवाओं का तर्क है कि इस बार का प्रश्न पत्र स्थापित पाठ्यक्रम, पूर्व निर्धारित परीक्षा पैटर्न और पिछले सालों के ट्रेंड से पूरी तरह अलग था। अभ्यर्थियों ने प्रश्न पत्र को बेहद कठिन, उलझाऊ और अतार्किक करार दिया है। उनका कहना है कि परीक्षा के लिए तय किए गए दो घंटे के सीमित समय में ऐसे सवालों को हल करना व्यावहारिक धरातल पर लगभग नामुमकिन था। इसी असंतोष के चलते अभ्यर्थियों ने अब संगठित होकर 29 सितंबर को जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर व्यापक धरना प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
समय सीमा और असामान्य प्रश्न पत्र पर उठे गंभीर सवाल
परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रश्न पत्र का प्रारूप ऐसा था जिसने योग्य और समर्पित छात्रों की तैयारी को भी असमंजस में डाल दिया। प्रश्न पत्र में प्रश्नों का कठिनाई स्तर इतना ज्यादा था कि 120 मिनट की समय सीमा सवालों को समझने और सही उत्तर तक पहुंचने के लिए बहुत कम साबित हुई। अभ्यर्थियों के अनुसार, परीक्षा के समय प्रबंधन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मामले में अपनी बात रखते हुए अभ्यर्थी सत्येंद्र राव ने कहा कि इस परीक्षा का पेपर तय किए गए ट्रेंड से पूरी तरह अलग था। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्न पत्र की बनावट इस तरह की थी, जिसे दो घंटे के निर्धारित समय के भीतर पूरा हल कर पाना अधिकांश अभ्यर्थियों के लिए एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हुआ। युवाओं का तर्क है कि जब भर्ती परीक्षा का एक तय ढांचा निर्धारित होता है, तो अचानक बिना किसी पूर्व संकेत के उसे पूरी तरह बदल देना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
पुनः परीक्षा कराने और निष्पक्ष जांच की उठाई गई मांग
प्रश्न पत्र के स्तर से नाराज युवाओं ने सरकार और परीक्षा आयोजकों के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि 20 सितंबर को आयोजित एसआई री-एग्जाम को रद्द कर नए सिरे से दोबारा परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। इसके अलावा, छात्रों ने मांग की है कि हाल ही में आयोजित हुई इस परीक्षा के प्रश्न पत्र के पैटर्न, उसकी भाषा और कठिनाई स्तर की विषय विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति से गहन समीक्षा कराई जाए।
अभ्यर्थियों का मत है कि किसी भी राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षा में हर प्रतियोगी छात्र को अपनी वास्तविक योग्यता और ज्ञान साबित करने का निष्पक्ष एवं समान अवसर मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रश्न पत्र के मानकों में अप्रत्याशित और अव्यावहारिक बदलाव करके परीक्षार्थियों को मानसिक तनाव में धकेल दिया गया है, जिससे वर्षों से तैयारी कर रहे कई योग्य अभ्यर्थियों का मनोबल टूटा है।
आरपीएससी और कर्मचारी चयन बोर्ड के बुनियादी पुनर्गठन की उठी आवाज
इस पूरे विवाद के बीच अभ्यर्थियों ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। युवाओं ने दोनों प्रमुख भर्ती संस्थानों के पुनर्गठन की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की साख, पारदर्शिता और गुणवत्ता को बहाल करने के लिए इन संस्थाओं में अनुभवी शिक्षाविदों और विभिन्न विषयों के उच्च स्तरीय विशेषज्ञों को शामिल किया जाना बेहद जरूरी है।
छात्र नेता राम सिंह समोता ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि आरपीएससी और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के कामकाज के तरीकों को लेकर प्रदेश के युवाओं और अभ्यर्थियों में लंबे समय से असंतोष पनप रहा है। उन्होंने कहा कि एसआई भर्ती री-एग्जाम का असंतुलित प्रश्न पत्र इसी निरंतर चले आ रहे असंतोष का एक नया और स्पष्ट उदाहरण है। राम सिंह समोता ने पुरजोर मांग की है कि आयोग और बोर्ड में ऐसे काबिल विशेषज्ञों को नियुक्त किया जाए, जिन्हें न केवल गहरा शैक्षणिक अनुभव हो, बल्कि वे प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं की व्यवहार्यता और जटिलताओं को भी भली-भांति समझते हों।
29 सितंबर को जयपुर के शहीद स्मारक पर जुटेगा युवाओं का हुजूम
अपनी इन तमाम चिंताओं और मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। 29 सितंबर को जयपुर के ऐतिहासिक शहीद स्मारक पर प्रस्तावित धरने में राज्य के हर जिले और कोने से युवाओं के जुटने की उम्मीद जताई गई है। अभ्यर्थी इसे केवल एक दिन के सांकेतिक धरने तक सीमित नहीं रखना चाहते।
प्रदर्शन की तैयारी कर रहे युवाओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करते हुए कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो वे इस आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ एक प्रश्न पत्र के कठिन होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, प्रश्न पत्रों के निर्माण में विषय विशेषज्ञों की जवाबदेही और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर दिलाने की एक बड़ी मुहिम है। अब सभी की नजरें 29 सितंबर के आंदोलन और उस पर प्रशासनिक रुख पर टिकी हैं।





















