राजस्थान के नगर निकायों में पार्षदों के चुनावी नतीजे घोषित होने के तुरंत बाद अब बोर्ड गठन और शीर्ष पदों पर काबिज होने को लेकर सियासी दांवपेच चरम पर पहुंच गए हैं। विभिन्न जिलों में सभापति और महापौर की कुर्सी हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों के भीतर और बाहर जबरदस्त खींचतान देखने को मिल रही है। हनुमानगढ़ से लेकर राजसमंद और राजधानी जयपुर तक राजनीतिक घटनाक्रम बेहद तेजी से बदला है, जिसमें सड़क जाम, पुलिसिया कार्रवाई, बाड़ेबंदी के आरोप और उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणाएं शामिल हैं।
हनुमानगढ़ में कलेक्ट्रेट घेराव और सड़क जाम के बाद पुलिसिया कार्रवाई
हनुमानगढ़ में नगर निकाय के सभापति पद को लेकर जारी खींचतान के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। स्थानीय विधायक के समर्थकों ने सरकार के कदमों के विरोध में जिला कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया और मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि पार्षदों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम के बाद कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन हरकत में आया। जंक्शन थाना पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए लगभग दो दर्जन लोगों के खिलाफ कानूनी मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मौके से कुछ प्रदर्शनकारियों को अपनी हिरासत में भी लिया है, जिनसे थाने में निरंतर पूछताछ की जा रही है ताकि जाम लगाने और व्यवस्था बिगाड़ने के कारणों की विस्तृत जांच की जा सके।
राजसमंद में बाड़ेबंदी के आरोपों पर कुमावत समाज का विरोध
राजसमंद नगर परिषद में बोर्ड गठन की कवायद के दौरान पार्षदों की कथित बाड़ेबंदी का विवाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक जा पहुंचा। यहां कुमावत समाज के प्रतिनिधियों और नव-निर्वाचित पार्षदों के परिजनों ने एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक लिखित शिकायत सौंपी। प्रदर्शनकारियों ने यह गंभीर आरोप लगाया कि उनके समाज से ताल्लुक रखने वाले कुछ पार्षद पिछले दो दिनों से पूरी तरह लापता हैं और परिजनों का उनसे किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं हो पा रहा है। समाज के लोगों ने मांग की कि परिजनों की उन पार्षदों से तुरंत प्रत्यक्ष मुलाकात कराई जाए। विरोध के दौरान मौजूद भीड़ के कुछ लोगों ने राजसमंद की विधायक दीप्ति माहेश्वरी के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र पारीक ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की और उन्हें पूरे मामले में निष्पक्ष व नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया। इसी गहमागहमी के बीच भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों का एक साथ गीत गाते हुए वीडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
जातीय समीकरणों के बीच सभापति पद की दावेदारी और शक्ति प्रदर्शन
राजसमंद नगर परिषद के कुल 45 वार्डों में सामने आए चुनावी नतीजों ने राजनीतिक समीकरणों को बेहद दिलचस्प बना दिया है। इन नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने 27 वार्डों पर विजय हासिल की है, जबकि कांग्रेस के खाते में 14 वार्ड आए हैं और 4 वार्डों पर निर्दलीय पार्षदों ने बाजी मारी है। भारतीय जनता पार्टी के विजयी रहे 27 पार्षदों में से 9 पार्षद अकेले कुमावत समाज से चुनकर आए हैं। पार्षदों की इस बड़ी संख्या के आधार पर कुमावत समाज यह मांग कर रहा है कि सभापति की कुर्सी इसी समाज के किसी जनप्रतिनिधि को दी जानी चाहिए। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के संगठन ने सभापति पद के लिए अनीता पालीवाल का नाम आगे कर दिया है, जिसके चलते समाज में नाराजगी और गहरा गई। कथित बाड़ेबंदी और उपेक्षा के विरोध में समाज की बैठक आयोजित की गई और अंतिम फैसले के तहत शहर की सड़कों पर बाकायदा पैदल मार्च निकालकर शक्ति प्रदर्शन किया गया।
जयपुर नगर निगम में कांग्रेस ने महापौर प्रत्याशी का किया ऐलान
राजसमंद और हनुमानगढ़ की हलचलों के बीच राजधानी जयपुर में भी नगर निकाय चुनाव के बाद महापौर पद के लिए गतिविधियां पूरी तरह तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी ने अपने आंतरिक विचार-विमर्श के बाद महापौर पद के लिए स्थिति साफ करते हुए प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है। कांग्रेस की तरफ से सुनीता महावर ने सिंबल फॉर्म भरकर अपनी उम्मीदवारी पेश की। इस मौके पर उनके समर्थन में अनेक निर्वाचित पार्षद भी मौजूद रहे, जिन्होंने मौके पर ही सुनीता महावर को अपना पूर्ण समर्थन देने की बात कही। इसके उपरांत जयपुर जिला कांग्रेस की संगठनात्मक टीम ने सुनीता महावर को पार्टी की ओर से महापौर पद का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया। निकाय में बोर्ड गठन की औपचारिक प्रक्रियाओं के बीच कांग्रेस की इस घोषणा और पार्षदों के जमावड़े को सियासी तौर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



















