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जालौर में सिंदूरी अनार की बागवानी बनी किसानों की पसंद, आकर्षक रंग और स्वाद से मंडियों में मिल रहे बेहतरीन दामराजस्थान
20 सित॰ 2026, 7:18 am (35 मिनट पहले)· 0

जालौर में सिंदूरी अनार की बागवानी बनी किसानों की पसंद, आकर्षक रंग और स्वाद से मंडियों में मिल रहे बेहतरीन दाम

राजस्थान के जालौर में सिंदूरी अनार की खेती से किसान अपनी कमाई बढ़ा रहे हैं। स्थानीय मौसम के अनुकूल इस किस्म के चमकदार रंग और स्वाद के चलते बाजारों में इसकी मांग और कीमत काफी अच्छी मिल रही है।

राजस्थान का जालौर जिला अपनी खास अनार की पैदावार के लिए अलग पहचान कायम कर चुका है। इस इलाके के काश्तकार पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकलकर अनार की विभिन्न उन्नत किस्मों की बागवानी कर रहे हैं और बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। किसानों के बीच सिंदूरी अनार की किस्म सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रही है। जालौर की स्थानीय जलवायु, मिट्टी और भौगोलिक परिस्थितियां इस विशेष किस्म के बगीचों के लिए बेहद मुफीद साबित हुई हैं, जिसके कारण जिले में इसका रकबा और रुझान लगातार बढ़ रहा है।

आकर्षक बनावट और स्वाद के दम पर मजबूत बाजार मांग

सिंदूरी अनार की सबसे प्रमुख खासियत इसका गहरा लाल आकर्षक रंग और बाजार में लगातार बनी रहने वाली मांग है। इसके दाने और बाहरी छिलका देखने में जितने खूबसूरत लगते हैं, खाने में यह फल उतना ही रसीला और स्वादिष्ट होता है। फल मंडियों में बेहतर ग्रेड और उम्दा गुणवत्ता वाले सिंदूरी अनार को ग्राहक हाथों-हाथ खरीदते हैं। फल की इस चमक और स्वाद की वजह से किसानों को उपज के ऊंचे दाम मिलते हैं, जिससे प्रति बीघा बागवानी से होने वाला शुद्ध मुनाफा काफी बढ़ जाता है।

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कम समय में पैदावार और जरूरी फसल प्रबंधन

इस किस्म का एक बड़ा फायदा यह है कि सटीक प्रबंधन और वैज्ञानिक देखरेख अपनाकर किसान अपेक्षाकृत कम समय में अच्छी पैदावार ले सकते हैं। बाग लगाने के बाद पौधों की नियमित सिंचाई, संतुलित जैविक व रासायनिक खाद, सही पोषण और कीट-रोगों से सुरक्षा पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। जब पेड़ों पर फल लगना शुरू हो जाए, उस दौरान विशेष सावधानी बरतने से फलों का आकार और छिलके की गुणवत्ता दोनों उत्कृष्ट स्तर की बनी रहती है, जिससे बाजार में छंटाई के वक्त बेहतर ग्रेडिंग हासिल होती है।

पारंपरिक खेती के मुकाबले बागवानी से आय बढ़ाने का रास्ता

जालौर के शुष्क परिवेश में सिंदूरी अनार की बागवानी किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का बड़ा जरिया बन रही है। जो काश्तकार पारंपरिक अनाज या दलहन फसलों के साथ-साथ अपनी कमाई में विविधता लाना चाहते हैं, उनके लिए यह बागवानी मुफीद साबित हो रही है। हालांकि, बगीचे से मिलने वाला अंतिम उत्पादन और मुनाफा कई अहम पहलुओं पर टिका होता है। इनमें खेत की मिट्टी की उर्वरता, मौसम के उतार-चढ़ाव, पौधों की कटाई-छंटाई, समग्र फसल प्रबंधन और तुड़ाई के वक्त मंडियों में चलने वाले ताजा भाव शामिल हैं।

कृषि जानकारों की सलाह से शुरू करें वैज्ञानिक बागवानी

सिंदूरी अनार के नए बगीचे लगाने वाले किसानों के लिए जरूरी है कि वे काम शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञों अथवा उद्यान विभाग के अधिकारियों से तकनीकी मार्गदर्शन लें। अच्छी नर्सरी से प्रमाणित पौधों का चयन, पौधों के बीच तय दूरी पर रोपण, संतुलित सूक्ष्म पोषक तत्वों की खुराक और समय पर रोगों की रोकथाम अपनाकर ही बंपर उपज निकाली जा सकती है। बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण फल तैयार करने से किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिलता है।

सवाल-जवाब

जालौर में किसान अनार की किस किस्म की खेती सबसे अधिक पसंद कर रहे हैं?
जालौर में किसान सिंदूरी अनार की खेती को खास तौर पर पसंद कर रहे हैं क्योंकि यह स्थानीय जलवायु के अनुकूल है।
सिंदूरी अनार की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
इसका आकर्षक लाल रंग, सुंदर रूप और खाने में रसीला व स्वादिष्ट होना इसकी सबसे बड़ी खूबियां हैं।
बाजार में सिंदूरी अनार के बेहतर दाम मिलने का क्या कारण है?
इसके बेहतरीन रंग और स्वाद के कारण फल मंडियों में खरीदार इसे पसंद करते हैं, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिलती है।
सिंदूरी अनार की बेहतर गुणवत्ता के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
समय पर सिंचाई, संतुलित खाद और पोषण देने के साथ-साथ कीटों व रोगों से बचाव और फल आने के बाद उचित देखरेख आवश्यक है।
इस किस्म की बागवानी से होने वाला मुनाफा किन कारकों पर निर्भर करता है?
कुल उत्पादन और मुनाफा खेत की मिट्टी, मौसम, पौधों की देखरेख, फसल प्रबंधन और बाजार के भावों पर निर्भर करता है।
अनार की खेती शुरू करने से पहले किसानों को क्या सलाह दी जाती है?
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय कृषि विशेषज्ञों या उद्यान विभाग से उन्नत खेती, सही दूरी और रोग नियंत्रण की जानकारी अवश्य लें।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·9 मिनट पहले

जालौर के किसानों का पारंपरिक फसलों से हटकर बागवानी की ओर रुख करना एक सकारात्मक बदलाव है। सिंदूरी अनार की खेती से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि यह जलवायु के अनुकूल कृषि विविधीकरण का भी बेहतरीन उदाहरण है। भविष्य में यदि इसे कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग इकाइयों का समर्थन मिले, तो यहां के किसानों की आय में और अधिक उछाल आ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 मिनट पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था के एक रिपोर्टर के तौर पर मैं देखता हूँ कि ग्रामीण इलाकों में आर्थिक संपन्नता और वित्तीय सुरक्षा बढ़ने से भूमि विवाद और फसल चोरी जैसी स्थानीय आपराधिक घटनाओं में कमी आती है। जब जालौर के किसान पारंपरिक खेती छोड़कर सिंदूरी अनार जैसी उच्च मूल्य वाली बागवानी अपनाते हैं, तो उनकी आय में स्थिरता आती है, जो अंततः ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक तनाव और भूमि से जुड़े छोटे-मोटे विवादों को रोकने में मददगार साबित होती है।

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