राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की संगरिया नगरपालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए कांग्रेस पार्टी द्वारा पंजाब में की गई बाड़ेबंदी के दौरान आधी रात को उस वक्त बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया, जब राजस्थान पुलिस अचानक वहां जा धमकी। दो स्थानीय पार्षदों के कथित अपहरण का मामला दर्ज होने के बाद संगरिया थाने की पुलिस टीम उनकी तलाश में अंतरराज्यीय सीमा लांघकर पंजाब के ठिकाने पर पहुंची थी। इस औचक कार्रवाई की जानकारी मिलते ही मौके पर मौजूद नेताओं में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते राजनीतिक टकराव शुरू हो गया।
बाड़ेबंदी में पुलिस के पहुंचते ही गरमाया माहौल
दरअसल, संगरिया पुलिस को यह सूचना मिली थी कि अपहरण के दर्ज मुकदमे से जुड़े दो पार्षद, ओमप्रकाश स्वामी और साहिल स्वामी, पंजाब में कांग्रेस की बाड़ेबंदी में मौजूद हैं। जैसे ही पुलिस की टीम पंजाब स्थित उस परिसर में दाखिल हुई, वहां कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया के साथ उनकी तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। विधायक ने पुलिस के इस तरह अचानक घुसने का कड़ा विरोध किया और दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक गरमा-गरम बहस चलती रही। घटना के दौरान किसी ने इस पूरे विवाद का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो के सामने आते ही राजस्थान और पंजाब के सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
विधायक ने लगाया सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का गंभीर आरोप
पंजाब में पुलिस अधिकारियों के साथ हुई तीखी बहस के दौरान संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया ने भारतीय जनता पार्टी पर सरकारी मशीनरी का खुला दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। विधायक का स्पष्ट कहना था कि चुनाव जीतने के लिए पार्षदों के खिलाफ मनगढ़ंत और झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की इस कार्रवाई का असली मकसद पार्षदों को जबरन उठाना और उन पर अनुचित दबाव बनाना है। विधायक ने पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई राजनीतिक दबाव के तहत की जा रही है। काफी देर तक चली इस तनातनी ने चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।
दोनों पार्षदों ने अपहरण के दावों को सिरे से नकारा
हंगामे के बीच पुलिस की जांच में उस वक्त बड़ा नाटकीय मोड़ आया जब कथित तौर पर अगवा बताए जा रहे दोनों पार्षदों ने अपहरण की बात को पूरी तरह खारिज कर दिया। संगरिया पुलिस ने मौके पर ही पार्षद ओमप्रकाश स्वामी और साहिल स्वामी के औपचारिक बयान दर्ज किए। दोनों पार्षदों ने पुलिस अधिकारियों को साफ-साफ बताया कि उनका किसी ने कोई अपहरण नहीं किया है, बल्कि वे अपनी स्वतंत्र इच्छा और मर्जी से बाड़ेबंदी में शामिल होने के लिए पंजाब आए हैं। इस बयान के बाद पुलिस टीम को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने शिकायत दर्ज कराने वालों और पुलिस कार्रवाई की मंशा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले तेज हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर
संगरिया नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव सिर पर होने की वजह से दोनों प्रमुख दल पार्षदों की संख्याबल को सुरक्षित रखने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। कांग्रेस द्वारा अपने खेमे के पार्षदों को पंजाब में सुरक्षित रखने की रणनीति के बीच अपहरण की शिकायत और फिर पुलिस का पंजाब पहुंचना इस चुनावी मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना चुका है। पुलिस टीम द्वारा दोनों पार्षदों के स्वेच्छा वाले बयान दर्ज करके संगरिया लौटने के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पुलिस की भूमिका को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी पारा और चढ़ने के आसार हैं।



















