कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लाचार मरीजों के लिए आई सरकारी राहत पर काले बाजारी का साया मंडरा रहा है। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मुफ़्त वितरण के लिए भेजी गई कैंसर की एक बेहद कीमती दवा दिल्ली के ब्लैक मार्केट में बेची जा रही थी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफ़ाश करते हुए चार आरोपियों को हिरासत में लिया है। जिस एक इंजेक्शन की बाज़ार में कीमत 1 लाख रुपये से अधिक है, उसके कुल 26 वायल पुलिस की कार्रवाई में बरामद किए गए हैं। यह पूरा घटनाक्रम बीकानेर के सरकारी अस्पताल से शुरू होकर देश की राजधानी के अवैध बाज़ारों तक फैला हुआ है, जिसने पूरी राज्य स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए इस गिरोह का भंडाफोड़ किया। पुलिस टीम ने कार्रवाई के दौरान चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से कैंसर की महंगी दवा के 22 वायल जब्त किए गए, जबकि 4 वायल दिल्ली के ब्लैक मार्केट से बरामद किए गए। मरीजों की जान बचाने वाली इस लाइफ सेविंग ड्रग को जिस तरह खुले बाज़ार में ऊंचे दामों पर बेचने की साजिश रची जा रही थी, उससे इस रैकेट के बड़े नेटवर्क होने का अंदेशा है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सहयोगियों का पता लगा रही है। जांच अधिकारियों का अनुमान है कि यह गिरोह लंबे समय से सरकारी अस्पतालों की दवा आपूर्ति में सेंध लगा रहा था।
राजस्थान से दिल्ली कैसे पहुंची सरकारी सप्लाई?
इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ब्लैक मार्केट में मिली दवा सरकार की मुफ़्त सप्लाई का हिस्सा थी। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) की तरफ से गंभीर कैंसर मरीजों के इलाज के लिए Bavencio यानी Avelumab इंजेक्शन की खेप बीकानेर भेजी गई थी। यह दवा बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के लिए आवंटित की गई थी। हालांकि, अस्पताल परिसर में जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचने के बजाय यह महंगी दवा तस्करों के हाथों में पहुंच गई। इसके बाद इस जीवन रक्षक दवा को राज्य की सीमा पार कराकर दिल्ली के काले बाज़ार में अवैध कमाई के लिए पहुंचा दिया गया। बाजार में प्रति वायल 1 लाख रुपये से अधिक कीमत होने के कारण तस्कर इसे भारी मुनाफे पर बेच रहे थे।
RMSCL और बीकानेर अस्पताल जांच के दायरे में
सरकारी सप्लाई की इतनी बड़ी खेप बाहर निकलने के बाद दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच तेज कर दी है। पुलिस ने RMSCL के प्रबंध निदेशक पुखराज सेन को औपचारिक नोटिस जारी कर मामले से जुड़े तमाम दस्तावेज और सप्लाई चेन का रिकॉर्ड मांगा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बीकानेर के वेयरहाउस या अस्पताल स्टॉक से यह दवा किस रास्ते से लीक हुई। वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही को लेकर स्थिति असहज बनी हुई है। काफी समय बाद RMSCL के MD पुखराज सेन ने माना कि इंजेक्शनों की कालाबाजारी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में सप्लाई पहुंचने के बाद ही यह गड़बड़ी हुई है।
सरकारी निगरानी तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
कैंसर की दवा की इस कालाबाजारी ने राजस्थान के पूरे मेडिकल इन्वेंट्री और निगरानी सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। 1 लाख रुपये कीमत वाले Bavencio (Avelumab) इंजेक्शन का गायब होना कोई मामूली तकनीकी लापरवाही नहीं बल्कि एक संगठित अपराध की ओर इशारा करता है। राजस्थान में सरकारी दवाओं के ब्लैक मार्केट में जाने का यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी जीवन रक्षक दवाओं के लीक होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। दिल्ली पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ ही बीकानेर अस्पताल प्रशासन और संबंधित वेयरहाउस कर्मचारियों की भूमिका पर भी शिकंजा कसने की पूरी संभावना है।



















