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धौलपुर के ऐतिहासिक निहाल टावर की घड़ी तीन दशकों बाद फिर चालू, प्रशासन ने बदला परिसर का स्वरूपराजस्थान
20 अग॰ 2026, 11:00 am (1 घंटे पहले)· 3

धौलपुर के ऐतिहासिक निहाल टावर की घड़ी तीन दशकों बाद फिर चालू, प्रशासन ने बदला परिसर का स्वरूप

राजस्थान के धौलपुर में स्थित 8 मंजिला ऐतिहासिक निहाल टावर की दुर्लभ घड़ी 30 साल बाद दोबारा चलने लगी है। जिला प्रशासन की पहल पर घड़ी की मरम्मत के साथ परिसर की बैरिकेडिंग और लाइटिंग भी कराई गई है।

राजस्थान के धौलपुर जिले के प्रमुख ऐतिहासिक प्रतीक निहाल टावर पर लगी प्राचीन घड़ी तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर चालू हो गई है। लगभग 30 वर्षों तक बंद रहने के बाद अब इस विशाल घंटाघर से घड़ी की सुइयों की टिक-टिक और पारंपरिक गूंज दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। इस ऐतिहासिक धरोहर के पुनर्जीवित होने से स्थानीय निवासियों और बुजुर्गों में अत्यधिक प्रसन्नता और उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि इसकी आवाज से पूरे शहर को अपनी प्राचीन विरासत और सही समय का पुनः अहसास होने लगा है।

स्थापत्य कला और गौरवशाली इतिहास

धौलपुर शहर के मुख्य केंद्र में स्थित यह विशाल घंटाघर लाल और सफेद बलुआ पत्थरों के मनमोहक संयोजन से निर्मित है, जो इसे अत्यंत दर्शनीय बनाता है। यह ऐतिहासिक ढांचा लगभग 150 फीट ऊंचा है और आठ मंजिलों में फैला हुआ है। स्थापत्य कला के इस बेजोड़ नमूने का निर्माण कार्य तत्कालीन राजा महाराज निहाल सिंह के शासनकाल में प्रारंभ किया गया था। उनके निधन के उपरांत उनके सुपुत्र महाराज राणा राम सिंह ने इस भव्य इमारत का निर्माण कार्य पूरा करवाया था। अपने पूज्य पिता की स्मृति और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से इस घंटाघर का नाम निहाल टावर रखा गया। इतिहासकार अरविंद शर्मा के अनुसार, यह अनूठी इमारत धौलपुर के समृद्ध इतिहास, प्राचीन गौरव और वास्तुकला की भव्यता का सजीव प्रतीक है।

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प्रशासनिक पहल और जीर्णोद्धार का प्रयास

निहाल टावर में स्थापित यह अत्यंत दुर्लभ एंटीक क्लॉक पिछले 30 सालों से पूरी तरह से निष्क्रिय पड़ी हुई थी। इस प्राचीन घड़ी की सुइयों को पुनः गतिमान करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर विशेष प्रयास किए गए। धौलपुर की जिला कलेक्टर निधि बीटी की व्यक्तिगत रुचि और विशेष पहल पर इस परियोजना को गति मिली। इसके साथ ही नगर परिषद के आयुक्त विष्णु परमार के निरंतर प्रयासों और देखरेख में इस ऐतिहासिक घड़ी की बारीक मरम्मत का काम संपन्न कराया गया। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने काम करना शुरू किया और उसकी चिरपरिचित आवाज हवा में गूंजी, शहर के बुजुर्गों की पुरानी यादें ताजा हो गईं और पूरे धौलपुर में खुशी की लहर दौड़ गई।

परिसर का सौंदर्यीकरण और नया सेल्फी प्वाइंट

घड़ी को दोबारा चालू करने के अलावा प्रशासन ने इस ऐतिहासिक धरोहर परिसर के बेहतर रखरखाव और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए भी व्यापक कदम उठाए हैं। पूर्व में इस परिसर में लावारिस आवारा पशुओं के जमघट, गंदगी और दीवारों पर अनधिकृत पोस्टर चिपकाए जाने की गंभीर समस्या बनी हुई थी। इन समस्याओं के स्थाई समाधान हेतु प्रशासन द्वारा निहाल टावर के चारों तरफ मजबूत बैरिकेडिंग कराई गई है, जिससे आवारा पशुओं का प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया है। इसके अलावा, परिसर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए वहां आधुनिक और आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। आने वाले दिनों में पर्यटकों, स्थानीय लोगों और युवाओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से घंटाघर के पास एक सुंदर सेल्फी प्वाइंट भी विकसित करने की योजना है।

सवाल-जवाब

धौलपुर का निहाल टावर कितना पुराना और ऊंचा है?
निहाल टावर लगभग 150 फीट ऊंचा और 8 मंजिला विशाल घंटाघर है, जिसका निर्माण महाराज निहाल सिंह के समय शुरू हुआ था।
निहाल टावर की घड़ी कितने सालों से बंद पड़ी थी?
यह दुर्लभ एंटीक घड़ी पिछले 30 वर्षों से बंद पड़ी थी, जिसे हाल ही में मरम्मत कराकर पुनः चालू किया गया है।
निहाल टावर की घड़ी को पुनः चालू कराने में किन अधिकारियों का योगदान रहा?
जिला कलेक्टर निधि बीटी की विशेष पहल और नगर परिषद आयुक्त विष्णु परमार के व्यक्तिगत प्रयासों से घड़ी की मरम्मत संभव हुई।
घंटाघर परिसर के रखरखाव के लिए प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
प्रशासन ने परिसर के चारों ओर मजबूत बैरिकेडिंग करवाई है, लाइटिंग की व्यवस्था की है और वहां एक सेल्फी प्वाइंट बनाने की योजना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·37 मिनट पहले

धौलपुर के निहाल टावर की इस घड़ी का पुनरुद्धार इस बात का प्रमाण है कि यदि जिला प्रशासन और स्थानीय निकाय इच्छाशक्ति दिखाएं, तो उपेक्षित पड़ी ऐतिहासिक धरोहरों को नया जीवन मिल सकता है। तीस साल बाद इस प्राचीन घड़ी के चलने और परिसर में बैरिकेडिंग व लाइटिंग होने से न केवल शहर की सांस्कृतिक पहचान पुनर्जीवित हुई है, बल्कि आने वाले समय में इससे पर्यटन गतिविधियों को भी उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 मिनट पहले

धौलपुर जिला प्रशासन और नगर परिषद की यह पहल केवल एक घड़ी को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही का उत्कृष्ट उदाहरण है। तीन दशकों तक उपेक्षित रहे इस 150 फीट ऊंचे ऐतिहासिक टावर पर मजबूत बैरिकेडिंग और लाइटिंग व्यवस्था होने से न केवल आवारा पशुओं और अतिक्रमण जैसी गंभीर समस्याएं थमी हैं, बल्कि क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की भी नई चुनौती व अवसर पैदा होंगे।

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