राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र की कृषि पहचान बन चुके सीकर के मशहूर मीठे प्याज की खेती पर इस बार मानसूनी बारिश ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। अगस्त के महीने में लगातार हो रही रुक-रुककर वर्षा के चलते खेतों की मिट्टी में जरूरत से अधिक नमी जमा हो गई है। इसका सीधा असर प्याज की पौध यानी नर्सरी की बुवाई पर पड़ा है। सीजन का दो सप्ताह से अधिक का कीमती समय बीत जाने के बाद भी किसान न तो अपने खेतों की जुताई कर पा रहे हैं और न ही पौध तैयार करने के लिए बीज डाल सके हैं। इस अप्रत्याशित देरी से क्षेत्र के हजारों किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें छा गई हैं।
नमी के कारण अगेती फसल चक्र में देरी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगेती प्याज की सफल खेती के लिए अगस्त का पहला पखवाड़ा बेहद निर्णायक माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में किसान अगस्त के शुरुआती हफ्तों में ही क्यारियां तैयार करके प्याज के बीज रोप देते हैं। इन बीजों से रोपाई योग्य पौध तैयार होने में लगभग 50 से 55 दिनों की अवधि लगती है। इसके पश्चात तैयार पौध को 15 सितंबर से लेकर 15 अक्टूबर के बीच मुख्य खेतों में रोपा जाता है। हालांकि, इस वर्ष खेतों में बने अत्यधिक गीलेपन के कारण यह पूरा फसल चक्र पटरी से उतरता नजर आ रहा है। स्थानीय किसानों को यह भी भय सता रहा है कि यदि वे भारी मशक्कत करके क्यारियां बना भी लें, तो दोबारा बारिश होने पर महंगे बीज और उनकी मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।
खेतों की जुताई के इंतजार में बीते दिन
बुवाई अटके होने के कारण जमीनी स्तर पर किसान बेहद लाचार महसूस कर रहे हैं। नियमित रूप से बड़े पैमाने पर खेती करने वाले किसान जवान सिंह का कहना है कि वे हर वर्ष कई क्विंटल बीज का उपयोग करके प्याज की नर्सरी तैयार करते हैं, परंतु इस बार उनका सारा समय केवल खेतों की जुताई के अनुकूल स्थिति बनने के इंतजार में निकल रहा है। इसी प्रकार एक अन्य किसान ओमप्रकाश ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि वे प्रतिवर्ष 30 से 40 किलो बीज से पौध उगाते हैं, लेकिन खेतों में अत्यधिक नमी होने के कारण अभी तक ट्रैक्टर से जुताई तक संभव नहीं हो पाई है। किसानों के लिए यह विलंब केवल फसल बोने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रति एकड़ लागत बढ़ने, कुल उत्पादन घटने और मंडी में सही भाव न मिलने का त्रिकोणीय जोखिम उत्पन्न हो गया है।
फरवरी के अंत में मंडी पहुंचने से गिरेंगे दाम
सीकर मंडी के थोक कारोबारियों का आकलन है कि बुवाई में हो रही इस देरी का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव बाजार के समीकरणों तथा किसानों की शुद्ध आय पर पड़ेगा। जब प्याज की फसल अपने निर्धारित समय पर तैयार होकर मंडी में आती है, तो शुरुआत में सीमित आवक के कारण किसानों को अपनी उपज का बहुत अच्छा और आकर्षक मूल्य प्राप्त होता है। इसके विपरीत, इस बार बुवाई पिछड़ने की वजह से तैयार फसल फरवरी के अंतिम सप्ताह तक ही मंडी में आ पाएगी। उस समय तक राजस्थान के अन्य उत्पादक जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी नए प्याज की भारी आवक आरंभ हो जाती है। बाजार में एक साथ बंपर आवक होने से शेखावाटी के मीठे प्याज की मांग प्रभावित होगी और इसके थोक दामों में बड़ी गिरावट आने की पूरी संभावना है।
70 से अधिक गांवों में फैला 500 करोड़ का व्यापार
उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे शेखावाटी अंचल में हर साल लगभग 45 से 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज उगाया जाता है। इस कुल उत्पादन में अकेले सीकर जिले का योगदान 22 से 25 हजार हेक्टेयर का है। सीकर में प्याज की खेती केवल एक फसल नहीं, बल्कि सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये के विशाल व्यापारिक कारोबार का मुख्य आधार है। जिले के धोद, दांतारामगढ़ और लक्ष्मणगढ़ ब्लॉकों के अंतर्गत आने वाले रसीदपुरा, केतली नगर, भैरूंपुरा, आकवा, बठोठ, दादिया और मैलासी समेत 70 से भी अधिक गांवों में इसका व्यापक स्तर पर उत्पादन किया जाता है। उद्यान विभाग के उपनिदेशक मदन लाल जाट का कहना है कि वर्तमान परिस्थिति में सभी किसानों और विभागीय अधिकारियों की निगाहें पूरी तरह से आसमान साफ होने और मौसम में सुधार पर टिकी हुई हैं।



















