राजस्थान में निकाय चुनाव 2026 के सुगबुगाहट के साथ ही राजनीतिक दलों और जनता के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। आम जनता के बीच जाकर उनकी जमीनी हकीकत टटोलने वाले चुनावी कार्यक्रमों के तहत इस बार राजसमंद नगर परिषद क्षेत्र का रुख किया गया। इस इलाके के वार्ड नंबर आठ में पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने खुलकर अपनी परेशानियां साझा कीं और विकास कार्यों की पोल खोली।
परिसीमन से बदली वार्ड की सूरत
चुनावी चर्चा के दौरान स्थानीय निवासियों ने बताया कि हालिया परिसीमन की प्रक्रिया के बाद उनके पूरे इलाके का नक्शा और राजनीतिक दायरा बदल चुका है। पहले जो हिस्सा वार्ड नंबर 23 के अंतर्गत आता था, उसे अब नए प्रशासनिक बदलावों के तहत वार्ड नंबर आठ का हिस्सा बना दिया गया है। इस नए स्वरूप वाले वार्ड में इस समय साढ़े सात सौ से ज्यादा मतदाता पंजीकृत हैं, जो आगामी चुनावों में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष
वार्ड के लोगों ने खुलकर आरोप लगाया कि उन्हें अपने छोटे-छोटे विकास कार्यों को पूरा करवाने के लिए भी भारी प्रशासनिक उपेक्षा का सामना करना पड़ा है। अधिकारियों और जिम्मेदार प्रतिनिधियों के दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी जब काम नहीं हुए, तो स्थानीय लोगों में रोष बढ़ना स्वाभाविक था। लोगों का कहना है कि नगर परिषद में पिछली बार कांग्रेस का बोर्ड होने के बावजूद उनके इलाके में अपेक्षित विकास नहीं पहुंच पाया।
सड़क, पानी और सफाई की बदहाली
इलाके के निवासियों का दर्द इस बात को लेकर भी छलका कि उन्हें आज तक सड़क, नाली निर्माण, नियमित सफाई और पीने के पानी जैसी सबसे बुनियादी सहूलियतें भी मय्यत नहीं हो पाई हैं। इन सभी सुविधाओं के अभाव के चलते स्थानीय परिवार खुद को व्यवस्था द्वारा ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वार्डवासियों ने साफ तौर पर मांग उठाई है कि चुनाव जीतने के बाद जो भी नया बोर्ड सत्ता में आए, वह बिना किसी राजनैतिक या क्षेत्रीय भेदभाव के काम करे।
आगे की चुनावी राह
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वार्ड नंबर आठ के ये मतदाता बुनियादी सुविधाओं के इस टोटे और भेदभाव के मुद्दों को आगामी चुनाव में किस तरह भुनाते हैं। हर गली और मोहल्ले में समान विकास और समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग को लेकर जनता अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल करने का मन बना चुकी है, जिससे चुनावी सरगर्मी और ज्यादा बढ़ गई है।





















