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रेगिस्तान में पनपा महोगनी का पौधा, 200 रुपये की शुरुआती लागत से तैयार हो रहा लाखों का पेड़राजस्थान
22 सित॰ 2026, 3:24 pm (33 मिनट पहले)· 0

रेगिस्तान में पनपा महोगनी का पौधा, 200 रुपये की शुरुआती लागत से तैयार हो रहा लाखों का पेड़

बाड़मेर के 50 डिग्री तापमान में महोगनी का पेड़ सफलतापूर्वक बढ़ रहा है, जिसकी बहुमूल्य लकड़ी और औषधीय गुण किसानों के लिए भारी मुनाफे का जरिया बन रहे हैं।

थार रेगिस्तान की तपती रेतीली जमीन पर अब हरियाली के साथ आमदनी के नए रास्ते खुल रहे हैं। बाड़मेर शहर के रातानाडा इलाके में लगा महोगनी का एक पौधा इन दिनों स्थानीय लोगों और किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। तपती गर्मी और 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने वाले तापमान के बावजूद यह पौधा यहां पूरी मजबूती से पनप चुका है और तीन साल की देखरेख के बाद अब 12 से 15 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया है। महज 200 रुपये की शुरुआती लागत में खरीदा गया यह पौधा आने वाले वर्षों में लाखों रुपये की लकड़ी देने की क्षमता रखता है, जिसके चलते लोग इसे चलता-फिरता पैसों का पेड़ भी कहने लगे हैं।

रातानाडा में मां सती दक्षिणी मंदिर परिसर का प्रयोग

बाड़मेर जैसे शुष्क मरुस्थलीय वातावरण में जहां सामान्य तौर पर पेड़-पौधों को जीवित रखना एक बड़ी चुनौती माना जाता है, वहां इस दुर्लभ वृक्ष का जीवित रहना आश्चर्य का केंद्र बना हुआ है। मां सती दक्षिणी मंदिर के अध्यक्ष वासुदेव जोशी ने इस पौधे को रोपा था। उन्होंने फेसबुक के माध्यम से ऑनलाइन ऑर्डर देकर 200 रुपये में यह पौधा मंगाया था। पिछले तीन वर्षों की कड़ी मेहनत और नियमित सार-संभाल के बाद यह पौधा रेगिस्तान की कठोर जलवायु में भी हरा-भरा खड़ा है। वासुदेव जोशी का मानना है कि यह पेड़ भविष्य में किसी सुरक्षित फिक्स डिपॉजिट की तरह काम करेगा, जो 12 साल बाद परिपक्व होने पर बड़ी वित्तीय आय प्रदान करेगा।

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क्यों बेशकीमती मानी जाती है महोगनी की लकड़ी

महोगनी की लकड़ी को अपनी मजबूती, आकर्षक लाल-भूरी रंगत और पानी सहने की असाधारण क्षमता के कारण लकड़ी का राजा कहा जाता है। नमी और पानी के सीधे संपर्क में रहने के बावजूद यह जल्दी सड़ती या खराब नहीं होती। इसी विशिष्ट गुण की वजह से इसका मुख्य उपयोग पानी के जहाजों, नावों, आलीशान फर्नीचर, संगीत वाद्ययंत्रों और विशेष सजावटी वस्तुओं के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है। जब यह पेड़ लगभग 12 साल में पूरी तरह तैयार हो जाता है, तो इसकी लकड़ी की कीमत उसकी प्रजाति, उम्र, तने के आकार, बनावट और उस समय बाजार में मांग के आधार पर तय की जाती है। मौजूदा समय में बाजार में महोगनी की लकड़ी 1500 रुपये से लेकर 2500 रुपये प्रति घन फुट तक के भाव पर बिकती है।

लकड़ी के साथ पत्तियों, छाल और बीजों के औषधीय लाभ

महोगनी केवल अपनी कीमती लकड़ी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके अलग-अलग हिस्सों में कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। आयुर्वेद और दवा निर्माण में इसके बीज, पत्तियों और तने की छाल का उपयोग कैंसर, मलेरिया, डायबिटीज और दस्त जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में किया जाता है। इसके अलावा, महोगनी के बीजों और पत्तों का इस्तेमाल शरीर को ऊर्जा देने वाली शक्तिवर्धक दवाइयों को बनाने में भी होता है। व्यावसायिक स्तर पर इसकी पत्तियों से प्राकृतिक कीटनाशक, साबुन, पेंट और मच्छरों को दूर भगाने वाले उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं, जिससे यह पेड़ बहुउपयोगी साबित होता है।

सवाल-जवाब

बाड़मेर में महोगनी का पौधा किसने और कहां लगाया है?
यह पौधा बाड़मेर शहर के रातानाडा इलाके में मां सती दक्षिणी मंदिर के अध्यक्ष वासुदेव जोशी द्वारा लगाया गया है।
इस पौधे को कितने रुपये में और कहां से खरीदा गया था?
वासुदेव जोशी ने इस महोगनी के पौधे को फेसबुक के जरिए ऑनलाइन केवल 200 रुपये में खरीदा था।
तीन साल बाद इस पेड़ की ऊंचाई कितनी हो चुकी है?
कड़ी धूप और 50 डिग्री तक के तापमान में तीन साल की देखभाल के बाद यह पेड़ 12 से 15 फीट की ऊंचाई तक पहुंच चुका है।
महोगनी का पेड़ कितने वर्षों में पूरी तरह परिपक्व होता है?
महोगनी का पेड़ लगभग 12 साल में परिपक्व होकर कटाई और व्यावसायिक कमाई के योग्य बनता है।
बाजार में महोगनी की लकड़ी की क्या कीमत मिलती है?
परिपक्व महोगनी की लकड़ी बाजार में लगभग 1500 रुपये से लेकर 2500 रुपये प्रति घन फुट तक के भाव पर बिकती है।
महोगनी की लकड़ी का प्रमुख उपयोग किन चीजों में होता है?
पानी के प्रति टिकाऊ होने के कारण इसका इस्तेमाल जहाजों, नावों, उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर, संगीत वाद्ययंत्रों और सजावटी वस्तुओं में होता है।
महोगनी के पेड़ के कौन से हिस्से औषधीय काम में आते हैं?
इसके बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कैंसर, मलेरिया, डायबिटीज, दस्त और शक्तिवर्धक दवाओं के निर्माण में किया जाता है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·11 मिनट पहले

बाड़मेर जैसी जगहों पर पचास डिग्री गर्मी में भी ऐसा पौधा हरा-भरा रहना सच में गज़ब है। वासुदेव जी की तीन साल की मेहनत रंग लाई, अब बारह साल बाद वाकई बढ़िया फिक्स डिपॉजिट बन जाएगा यह पेड़।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 मिनट पहले

रोहन जी, बात तो सही है पर बारह साल तक रेगिस्तान में बिना किसी कानूनी सुरक्षा के इस पेड़ का बच जाना इतना आसान भी नहीं लगता।

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