राजस्थान के बीकानेर जिले अंतर्गत खाजूवाला और निकटवर्ती ग्रामीण अंचलों में खेतों की प्यास बुझाने को लेकर किसानों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। रबी सत्र की बुवाई और फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई जल की पुख्ता व्यवस्था की मांग को लेकर काश्तकारों ने अपना विरोध प्रदर्शन व्यापक कर दिया है। इस आंदोलन के प्रभाव से क्षेत्र की चार प्रमुख कृषि उपज मंडियां पूरी तरह बंद रहीं, जहां स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने भी अपनी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखकर किसानों की मांगों का खुला समर्थन किया है।
व्यापारियों का समर्थन और कृषि मंडियों में पसरा सन्नाटा
आंदोलन की लामबंदी का असर खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्रों में साफ देखा गया, जहां की सभी मंडियों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। धान मंडियों से लेकर कस्बों के मुख्य बाजारों तक दुकानों के शटर गिरे रहे और रोजमर्रा की व्यावसायिक गतिविधियां थम जाने से चारों तरफ सन्नाटा पसरा रहा। व्यापारिक बिरादरी द्वारा दिए गए इस बंद के समर्थन ने आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान की है।
चीफ इंजीनियर के साथ वार्ता विफल, रबी सिंचाई पर टकराव बरकरार
इस पूरे गतिरोध की मुख्य जड़ आगामी रबी फसल के लिए सिंचाई पानी का एक तय और स्थाई रेगुलेशन लागू कराने की मांग है। काश्तकारों का कहना है कि जल वितरण की अनिश्चितता के चलते उनकी मेहनत और लागत दोनों पर संकट मंडराता रहता है। इसी मसले को सुलझाने के लिए देर रात तक किसान प्रतिनिधियों और जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर के मध्य मैराथन बैठक चली। घंटों तक चली यह वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई, जिसके बाद किसानों में असंतोष और गहरा गया है।
घड़साना और अनूपगढ़ बने केंद्र, 24 सितंबर को चक्का जाम की तैयारी
प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आंदोलनकारी किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी समस्याओं का कोई ठोस और स्थाई हल नहीं निकाला जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। घड़साना और अनूपगढ़ को इस आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाते हुए किसान संगठन लगातार बैठकें कर रहे हैं। प्रशासन तथा सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से अब 24 सितंबर को व्यापक स्तर पर चक्का जाम करने की घोषणा की गई है, जिससे आने वाले दिनों में यातायात और सामान्य आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।





















