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राजस्थान में सिंचाई पानी पर भड़का किसानों का गुस्सा, 4 मंडियां ठप और 24 सितंबर को चक्का जामराजस्थान
22 सित॰ 2026, 11:20 am (30 मिनट पहले)· 1

राजस्थान में सिंचाई पानी पर भड़का किसानों का गुस्सा, 4 मंडियां ठप और 24 सितंबर को चक्का जाम

बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में रबी फसलों के लिए सिंचाई पानी की मांग पर किसानों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है, वार्ता विफल होने पर 24 सितंबर को चक्का जाम की चेतावनी दी गई है।

राजस्थान के बीकानेर जिले अंतर्गत खाजूवाला और निकटवर्ती ग्रामीण अंचलों में खेतों की प्यास बुझाने को लेकर किसानों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। रबी सत्र की बुवाई और फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई जल की पुख्ता व्यवस्था की मांग को लेकर काश्तकारों ने अपना विरोध प्रदर्शन व्यापक कर दिया है। इस आंदोलन के प्रभाव से क्षेत्र की चार प्रमुख कृषि उपज मंडियां पूरी तरह बंद रहीं, जहां स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने भी अपनी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखकर किसानों की मांगों का खुला समर्थन किया है।

व्यापारियों का समर्थन और कृषि मंडियों में पसरा सन्नाटा

आंदोलन की लामबंदी का असर खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्रों में साफ देखा गया, जहां की सभी मंडियों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। धान मंडियों से लेकर कस्बों के मुख्य बाजारों तक दुकानों के शटर गिरे रहे और रोजमर्रा की व्यावसायिक गतिविधियां थम जाने से चारों तरफ सन्नाटा पसरा रहा। व्यापारिक बिरादरी द्वारा दिए गए इस बंद के समर्थन ने आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान की है।

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चीफ इंजीनियर के साथ वार्ता विफल, रबी सिंचाई पर टकराव बरकरार

इस पूरे गतिरोध की मुख्य जड़ आगामी रबी फसल के लिए सिंचाई पानी का एक तय और स्थाई रेगुलेशन लागू कराने की मांग है। काश्तकारों का कहना है कि जल वितरण की अनिश्चितता के चलते उनकी मेहनत और लागत दोनों पर संकट मंडराता रहता है। इसी मसले को सुलझाने के लिए देर रात तक किसान प्रतिनिधियों और जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर के मध्य मैराथन बैठक चली। घंटों तक चली यह वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई, जिसके बाद किसानों में असंतोष और गहरा गया है।

घड़साना और अनूपगढ़ बने केंद्र, 24 सितंबर को चक्का जाम की तैयारी

प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आंदोलनकारी किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी समस्याओं का कोई ठोस और स्थाई हल नहीं निकाला जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। घड़साना और अनूपगढ़ को इस आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाते हुए किसान संगठन लगातार बैठकें कर रहे हैं। प्रशासन तथा सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से अब 24 सितंबर को व्यापक स्तर पर चक्का जाम करने की घोषणा की गई है, जिससे आने वाले दिनों में यातायात और सामान्य आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

सवाल-जवाब

किसानों के आंदोलन का मुख्य कारण क्या है?
किसान रबी फसल की बुवाई के लिए सिंचाई पानी का एक स्थाई और सुनिश्चित रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहे हैं।
किन-किन क्षेत्रों की कृषि मंडियां बंद रखी गई हैं?
खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ की चार प्रमुख कृषि मंडियों में कामकाज पूरी तरह बंद रखा गया है।
चीफ इंजीनियर के साथ हुई बातचीत का क्या परिणाम निकला?
देर रात तक चली यह बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही, क्योंकि किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।
किसानों ने आगे किस बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है?
मांगें न माने जाने के विरोध में किसानों ने 24 सितंबर को चक्का जाम करने का ऐलान किया है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

सिंचाई पानी के लिए बातचीत का विफल होना चिंता की बात है। जब मंडियां बंद हो जाती हैं और चक्का जाम की नौबत आती है, तो आम जनजीवन और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं। प्रशासन को तुरंत कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·3 मिनट पहले

बिल्कुल सही कहा करण भाई, प्रशासन को जिद छोड़कर किसानों से फिर बात करनी चाहिए, वरना 24 तारीख को हालात और बिगड़ेंगे।

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