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राजस्थान के जालोर में छह माह के मासूम को पेड़ तले छोड़ मां ने ट्रेन के सामने कूदकर दी जानराजस्थान
21 सित॰ 2026, 9:26 am (58 मिनट पहले)· 1

राजस्थान के जालोर में छह माह के मासूम को पेड़ तले छोड़ मां ने ट्रेन के सामने कूदकर दी जान

जालोर के बागरा थाना क्षेत्र में एक मां छह महीने के दुधमुंहे बेटे को पेड़ के नीचे सुरक्षित छोड़कर पैसेंजर ट्रेन के आगे कूद गई, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

राजस्थान के जालोर जिले में बागरा थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मां ने अपने छह माह के दुधमुंहे बच्चे को नीम के पेड़ की छांव में बैठाकर खुद चलती पैसेंजर ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। ट्रेन की चपेट में आने से महिला के शरीर के कई अंगों पर गंभीर चोटें आईं और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, पटरी से सुरक्षित दूरी पर बैठा मासूम बच्चा बिल्कुल महफूज पाया गया। यह दर्दनाक हादसा दोपहर के वक्त बागरा और जागनाथ रेलवे स्टेशनों के बीच घटित हुआ।

इलाज का बहाना बनाकर घर से निकली थी महिला

प्राप्त विवरण के अनुसार, भागली सिंघलान गांव की रहने वाली भावना, जिनकी शादी डूंगाराम मेघवाल से हुई थी, की तबीयत कुछ दिनों से खराब चल रही थी। सुबह के समय उन्होंने घर के सदस्यों से कहा कि वह अपने छह महीने के बेटे आर्यन को साथ ले जाकर अस्पताल में अपना इलाज कराने जा रही हैं। परिवार के लोगों को इस बात की जरा भी भनक नहीं थी कि वह अस्पताल जाने के बजाय इतना खौफनाक कदम उठाने जा रही हैं। घर से रवाना होने के बाद वह सीधे रेलवे लाइन की दिशा में चली गईं।

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पटरी से दूर नीम के नीचे छोड़ा मासूम, फिर आई ट्रेन की जद में

बागरा और जागनाथ रेलवे स्टेशन के मध्य पहुंचने के बाद भावना ने अपने लाडले आर्यन को पटरी से कुछ फासले पर स्थित एक नीम के पेड़ के नीचे सुरक्षित छांव में बैठा दिया। इसके तुरंत बाद वह खुद रेल पटरियों पर पहुंच गईं। उसी दौरान साबरमती से जोधपुर की ओर जा रही पैसेंजर ट्रेन वहां से गुजर रही थी। भावना ट्रेन के सामने आ गईं। ट्रेन की जबरदस्त टक्कर से उनके सिर, हाथ और पैरों समेत पूरे जिस्म पर घातक चोटें आईं और क्षण भर में ही उनकी जान चली गई।

शव को पहुंचाया गया अस्पताल, पुलिस ने शुरू की पड़ताल

दुर्घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद स्थानीय बाशिंदों और रेलवे कर्मियों को इस घटना का पता चला। घटनास्थल पर पेड़ के नीचे छह माह का आर्यन सुरक्षित खेलता मिला। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) मांगीलाल के अनुसार, शव को ट्रेन के जरिए जागनाथ रेलवे स्टेशन तक लाया गया, जहां रेलवे कर्मियों ने कागजी प्रक्रिया के बाद शव को कोतवाली पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया। इसके बाद पुलिस ने मृतका के शव को जालोर के सामान्य चिकित्सालय की मॉर्च्यूरी में रखवा दिया और परिजनों को घटना की सूचना दी।

पारिवारिक तनाव, आटा-साटा प्रथा और घरेलू विवाद की चर्चा

पुलिस की शुरुआती जांच में मृतका के पारिवारिक जीवन में गंभीर तनाव की बातें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि भावना और उनके पति व ससुराल वालों के बीच लंबे समय से मनमुटाव चल रहा था। उनकी शादी आटा-साटा प्रथा के तहत संपन्न हुई थी। चर्चा यह भी है कि पति द्वारा उनके साथ मारपीट की जाती थी और भावना ने इस पूरे विवाद और मारपीट के संबंध में अपने भाई को फोन करके जानकारी भी दी थी। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने अभी इन तमाम आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। आत्महत्या की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए पुलिस कॉल डिटेल्स, परिजनों के बयानों और पारिवारिक विवादों के सभी पहलुओं की गहन तफ्तीश कर रही है। पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत शव परिजनों को सौंपा जाएगा।

सवाल-जवाब

यह दर्दनाक घटना कहां और किस समय घटित हुई?
यह घटना राजस्थान के जालोर जिले में बागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत बागरा और जागनाथ रेलवे स्टेशन के बीच दोपहर के समय हुई।
ट्रेन के सामने कूदने वाली महिला की पहचान क्या है?
मृतका की पहचान भागली सिंघलान गांव निवासी भावना, पत्नी डूंगाराम मेघवाल के रूप में हुई है।
महिला के छह महीने के बेटे के साथ क्या हुआ?
महिला ने ट्रेन के आगे कूदने से पहले अपने छह महीने के बेटे आर्यन को पटरी से दूर नीम के पेड़ के नीचे बैठा दिया था, जिससे वह पूरी तरह सुरक्षित बच गया।
महिला किस बहाने से घर से बाहर निकली थी?
भावना अपनी तबीयत खराब होने की बात कहकर छह माह के बच्चे को साथ लेकर अस्पताल में उपचार कराने के लिए निकली थीं।
आत्महत्या के पीछे किन वजहों का अंदेशा जताया जा रहा है?
प्रारंभिक सूचना के अनुसार पति व ससुराल पक्ष से मनमुटाव, मारपीट और आटा-साटा प्रथा से जुड़े विवाद की बातें सामने आ रही हैं, हालांकि पुलिस जांच जारी है।
शव मिलने के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
शव को जागनाथ स्टेशन से जालोर सामान्य चिकित्सालय की मॉर्च्यूरी पहुंचाया गया और परिजनों को सूचित कर मामले की जांच शुरू की गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 मिनट पहले

यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू हिंसा, मानसिक स्वास्थ्य और पारंपरिक विवाह कुप्रथाओं जैसे गंभीर सामाजिक संकटों को भी उजागर करती है। प्रारंभिक जांच में आटा-साटा प्रथा और पति द्वारा प्रताड़ित किए जाने के जो आरोप सामने आए हैं, वे प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के लिए यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि घरेलू विवादों से जूझ रही महिलाओं की समय पर काउंसलिंग और सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·7 मिनट पहले

यह ह्रदयविदारक घटना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने में गहरी जड़ों तक फैली कुप्रथाओं व घरेलू कलह के घातक परिणामों को बेनकाब करती है। आटा-साटा जैसी विवाह पद्धतियाँ और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी महिलाओं को ऐसे चरम और खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर कर रही हैं। यह मामला प्रशासनिक स्तर पर केवल एक आपराधिक जांच का नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में पारिवारिक विवादों के निवारण के लिए सुलभ मनोवैज्ञानिक सहायता और त्वरित सुरक्षा तंत्र की गंभीर और तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।

Rohan Verma@rohan-verma·30 मिनट पहले

यह घटना घरेलू तनाव और 'आटा-साटा' जैसी कुप्रथाओं के मानसिक दुष्प्रभावों को उजागर करती है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि मृतका पति और ससुराल पक्ष के विवाद व मारपीट से परेशान थी। यह मामला समाज में महिलाओं के घरेलू उत्पीड़न, मानसिक स्वास्थ्य और पारंपरिक विवाह प्रणालियों के गहरे संकट पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 मिनट पहले

यह मामला केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने और न्याय प्रणाली के सामने एक गंभीर चुनौती है। 'आटा-साटा' प्रथा और घरेलू हिंसा के जो एंगल शुरुआती जांच में उभरे हैं, वे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मानसिक उत्पीड़न किस हद तक खतरनाक रूप ले सकता है। पुलिस को अब इस बात की गहनता से जाँच करनी होगी कि क्या मृतका को आत्महत्या के लिए उकसाया गया था। यदि ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ना या मारपीट के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो भारतीय न्याय संहिता के तहत कड़े कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि इस तरह के मामलों में जवाबदेही तय हो सके।

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