राजस्थान के दौसा जिले में खेती-किसानी के लिए मिलने वाले नीम कोटेड यूरिया के गैर-कानूनी इस्तेमाल का एक बड़ा मामला सामने आया है। कृषि विभाग की एक विशेष टीम ने देर रात बालाहेड़ा गांव में चल रही एक गुप्त निर्माण इकाई पर औचक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई के दौरान वहां भारी मात्रा में कृषि यूरिया की थैलियां मिलीं, जिनका उपयोग वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण घोल यानी डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड (डीईएफ) को बनाने में किया जा रहा था। प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई करते हुए मौके से करीब 3000 लीटर तैयार रासायनिक घोल को अपने नियंत्रण में ले लिया।
देर रात बालाहेड़ा गांव में प्रशासनिक कार्रवाई
कृषि विभाग के सहायक निदेशक अशोक मीणा की अगुवाई में अधिकारियों की टीम ने बालाहेड़ा गांव स्थित इस परिसर की घेराबंदी की। जांच के दौरान परिसर के भीतर नीम कोटेड यूरिया की कई बोरियां रखी हुई पाई गईं। इसके अलावा वहां रखी बड़ी टंकियों में करीब 3000 लीटर तैयार डीईएफ तरल भरा हुआ मिला। स्थिति की गंभीरता और अवैध व्यावसायिक गतिविधि को देखते हुए तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद बैजूपाड़ा थाना अधिकारी मनीषा मीणा अपने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं और संयुक्त रूप से कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
खेती के रियायती उर्वरक का गैर-कानूनी कारोबार
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि खेतों में फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए रियायती दरों पर मिलने वाले यूरिया को अवैध तरीके से गाड़ियों के व्यावसायिक फ्लूइड में बदला जा रहा था। कृषि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कृषि यूरिया का इस तरह किसी भी व्यावसायिक अथवा औद्योगिक उत्पाद में इस्तेमाल करना कानूनन जुर्म है। टीम ने परिसर में मौजूद पूरे नीम कोटेड यूरिया के स्टॉक और तैयार 3000 लीटर तरल को जब्त कर लिया ताकि इसे बाजार में खपाया न जा सके।
मुकेश कुमार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज
अवैध निर्माण और उर्वरक के दुरुपयोग को लेकर मुकेश कुमार नामक व्यक्ति के खिलाफ बैजूपाड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने यह कानूनी कार्रवाई उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धारा 25 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत दर्ज की है। पुलिस प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि आरोपी के पास इतनी बड़ी तादाद में सरकारी यूरिया की आपूर्ति कहां से हो रही थी और यह अवैध यूनिट कितने समय से चलाई जा रही थी।
डीजल वाहनों में क्या भूमिका निभाता है डीईएफ
डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड दरअसल आधुनिक डीजल इंजनों से निकलने वाली हानिकारक गैसों और धुएं को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक जलीय घोल है। यह तकनीक वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को घटाने का काम करती है। हालांकि इसके अधिकृत निर्माण के लिए औद्योगिक ग्रेड का उपयोग तय मानकों के अनुसार किया जाता है, लेकिन यहां मुनाफा कमाने के चक्कर में किसानों के हक के नीम कोटेड यूरिया का अवैध घोल तैयार किया जा रहा था।



















