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राजस्थान के सीमावर्ती जिले में विदेशी पैसों की अवैध आवक पर प्रवर्तन निदेशालय का छापा, करोड़ों के लेनदेन का खुलासाराजस्थान
22 सित॰ 2026, 1:22 pm (33 मिनट पहले)· 0

राजस्थान के सीमावर्ती जिले में विदेशी पैसों की अवैध आवक पर प्रवर्तन निदेशालय का छापा, करोड़ों के लेनदेन का खुलासा

प्रवर्तन निदेशालय ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के उल्लंघन के तहत जैसलमेर में दो ठिकानों पर तलाशी ली, जहां बिना जरूरी अनुमति के बेल्जियम से 5.10 करोड़ रुपये मंगाने का मामला सामने आया है।

राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र जैसलमेर में विदेशी धन के संदिग्ध प्रवाह और उससे जुड़ी गतिविधियों को लेकर वित्तीय जांच एजेंसी ने सख्त रुख अपनाया है। प्रवर्तन निदेशालय के जयपुर आंचलिक कार्यालय ने 19 सितंबर को जैसलमेर शहर के दो अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह पूरी कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी FEMA के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है। तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों के हाथ कई अहम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड लगे हैं, जिनसे सीमावर्ती जिले में लंबे समय से चल रहे संदिग्ध वित्तीय तंत्र की परतें खुल रही हैं।

बैंक खातों में पहुंचे 5.10 करोड़ रुपये, बेल्जियम से जुड़ा सीधा तार

वित्तीय जांच में सामने आया है कि जैसलमेर निवासी देऊ राम और उसके सहयोगी ज्ञान चंद के निजी बैंक खातों में पिछले कुछ वर्षों के भीतर लगभग 5.10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम विदेशी धनराशि जमा करवाई गई। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरी रकम का सबसे बड़ा हिस्सा बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में स्थित 'अमर एएसबीएल' नामक संस्था के जरिए भेजा गया था। भारत में विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए निर्धारित वैधानिक नियमों और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA की पूर्व मंजूरी लिए बिना ही यह रकम निजी खातों में मंगवाई गई, जो कानूनी नियमों का सीधा उल्लंघन है।

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बैंक खातों के शुरुआती विश्लेषण से पता चला है कि विदेश से आने वाले धन को कानूनी और सामाजिक रूप से वैध दिखाने के लिए कई तरह के बहानों का सहारा लिया गया था। खातों में दर्ज विवरणों में इस पैसे को बच्चों की स्कूली शिक्षा, शिक्षण सहायता, सांस्कृतिक आयोजन, पारिवारिक भरण-पोषण तथा निजी बचत के रूप में दर्शाया गया था। हालांकि, जब जांच अधिकारियों ने इन दावों का जमीनी सत्यापन किया, तो इन उद्देश्यों के अनुरूप वास्तविक खर्च या जमीनी गतिविधियों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। इसके विपरीत, यह तथ्य सामने आया कि विदेशी पैसे का इस्तेमाल संस्था के अनौपचारिक कामकाज के साथ-साथ निजी जरूरतों को पूरा करने में किया गया।

2.60 करोड़ रुपये की भारी नकदी निकासी पर गहराया संदेह

वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के दौरान जांचकर्ताओं को देऊ राम के खातों से बड़े पैमाने पर नकदी निकाले जाने के सबूत मिले हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, कुल आई राशि में से लगभग 2.60 करोड़ रुपये नकद रूप में आहरित कर लिए गए। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी निकाले जाने के बावजूद उसका कोई पुख्ता लेखा-जोखा, रसीद या वित्तीय रिकॉर्ड पेश नहीं किया जा सका। अब जांच दल इस बात की कड़ियां जोड़ रहा है कि बैंकों से निकाली गई यह नकदी किन-किन व्यक्तियों तक पहुंचाई गई, इसके पीछे किस प्रकार के बिचौलिए सक्रिय थे और इस पैसे को असल में किन कामों में लगाया गया।

भारत में बिना पंजीकरण के 15 साल से सक्रिय थी विदेशी संस्था

'अमर एएसबीएल' की पृष्ठभूमि खंगालने पर पता चला है कि इसकी स्थापना वर्ष 2011 में बेल्जियम के ब्रसेल्स में की गई थी। इस संगठन का संचालन बेल्जियम के नागरिक जोसेफ गोफिनेट और उनके पुत्र सैलियन गोफिनेट करते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस संस्था की गतिविधियां जैसलमेर में बीते 14 से 15 वर्षों से लगातार संचालित की जा रही थीं, जबकि भारत में 'अमर एएसबीएल' नाम से किसी भी प्रकार का कोई चैरिटेबल ट्रस्ट या गैर-सरकारी संगठन पंजीकृत ही नहीं है। बिना किसी कानूनी पंजीकरण और अनुमति के देऊ राम और ज्ञान चंद के जरिए इस अनौपचारिक नेटवर्क को चलाया जा रहा था।

सालाना दौरे, धार्मिक सभाएं और कमजोर तबकों को प्रभावित करने के आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, जोसेफ गोफिनेट और सैलियन गोफिनेट हर साल नियमित रूप से बेल्जियम से जैसलमेर आते थे। वे यहां कम से कम दो से तीन सप्ताह का समय बिताते थे। अपने प्रवास के दौरान वे स्थानीय बच्चों के परिजनों, रिश्तेदारों से संपर्क साधते थे और विशेष बैठकें व धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते थे। जांच दल का आरोप है कि इन आयोजनों के माध्यम से इलाके के सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मान्यताओं को प्रभावित करने के साथ-साथ धर्मांतरण कराने के प्रयास किए जा रहे थे।

खातों पर रोक लगने के बाद दूसरों के नाम का किया गया इस्तेमाल

जब भारतीय बैंकिंग तंत्र में सतर्कता बरतते हुए देऊ राम और ज्ञान चंद के खातों में आ रही विदेशी रकम पर रोक लगाई गई, तो इस नेटवर्क ने दूसरा रास्ता निकाल लिया। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि मुख्य खातों के बाधित होने के बाद अन्य स्थानीय लोगों के निजी बैंक खातों का उपयोग कर विदेश से रकम मंगवाने का सिलसिला जारी रखा गया। प्रवर्तन निदेशालय अब उन सभी तीसरे पक्ष के खातों, उनमें हुए लेन-देन और इस पूरे विदेशी नेटवर्क से जुड़े अन्य स्थानीय संपर्कों की गहन छानबीन कर रहा है। मामले में आगे की कानूनी जांच जारी है।

सवाल-जवाब

प्रवर्तन निदेशालय ने जैसलमेर में किस कानून के तहत कार्रवाई की है?
प्रवर्तन निदेशालय ने जैसलमेर के दो ठिकानों पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत 19 सितंबर को तलाशी अभियान चलाया।
किन व्यक्तियों के बैंक खातों में विदेशी धन आने की बात सामने आई है?
जांच के अनुसार जैसलमेर के देऊ राम और उसके सहयोगी ज्ञान चंद के खातों में करीब 5.10 करोड़ रुपये की विदेशी रकम पहुंची थी।
यह विदेशी धनराशि किस देश और संस्था से भेजी गई थी?
इस रकम का अधिकांश हिस्सा बेल्जियम के ब्रसेल्स स्थित 'अमर एएसबीएल' नामक संस्था द्वारा भेजा गया था।
संस्था को कौन संचालित करता है और उनका जैसलमेर से क्या संबंध है?
संस्था का संचालन बेल्जियम निवासी जोसेफ गोफिनेट और उनके बेटे सैलियन गोफिनेट करते हैं, जो हर साल जैसलमेर आकर बैठकें करते थे।
बैंक खातों से कितनी नकदी निकाले जाने का खुलासा हुआ है?
जांच में देऊ राम के बैंक खातों से लगभग 2.60 करोड़ रुपये नकद निकाले जाने की बात सामने आई है, जिसका कोई ठोस हिसाब नहीं मिला।
बैंकों द्वारा खाते रोके जाने के बाद क्या किया गया?
जब मुख्य खातों में विदेशी धन आने पर बैंकों ने रोक लगाई, तब इस नेटवर्क ने अन्य स्थानीय लोगों के बैंक खातों के जरिए रकम मंगाना शुरू किया।
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टिप्पणियाँ 1

Rohan Verma@rohan-verma·6 मिनट पहले

सीमावर्ती इलाके में बेल्जियम से बिना अनुमति करोड़ों आना और बच्चों की पढ़ाई के नाम पर खर्च दिखाना साफ झोल है। ईडी की यह रेड सही समय पर हुई है, अब कैश निकालने वालों पर शिकंजा कसना चाहिए।

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