राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलिस कमिश्नरेट मुख्यालय के बाहर कांग्रेस पार्टी का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। रितु बराला मामले में आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता पूरी रात धरने पर डटे रहे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में शुरू हुए इस धरने में पार्टी के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए हैं। नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक पुलिस इस प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज करने का ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका यह आंदोलन किसी भी सूरत में समाप्त नहीं होगा। इस राजनीतिक गतिरोध के कारण कमिश्नरेट परिसर और आसपास के इलाके में गहमागहमी का माहौल बना हुआ है।
रातभर चला धरना और रामधुनी से विरोध
कमिश्नरेट के बाहर जुटे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी मांग को लेकर पूरी रात खुले आसमान के नीचे बिताई। देर रात तक धरना स्थल पर बैठे नेता रामधुनी गाकर अपना विरोध जताते रहे। सुबह के समय भी प्रदर्शनकारी वहीं डटे रहे और नेताओं ने मॉर्निंग वॉक के साथ रामधुनी जारी रखकर अपना समय बिताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई सकारात्मक पहल देखने को नहीं मिली है। रातभर चले इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों की तरफ से कोई लिखित आश्वासन या प्राथमिकी की प्रति न मिलने से नेताओं का रोष और बढ़ गया।
बड़े नेताओं की मौजूदगी और एकजुटता का संदेश
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस का शीर्ष प्रांतीय नेतृत्व सीधे तौर पर मैदान में उतर आया है। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ विधायक रफीक खान, अमीन कागजी और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास लगातार धरना स्थल पर बैठे रहे। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरिता सिंह और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी अपने समर्थकों के साथ इस प्रदर्शन का हिस्सा बने। पीड़िता रितु बराला स्वयं इस धरने में मौजूद हैं और उनके साथ विधायक इंदिरा मीणा भी रातभर डटी रहीं। इस भारी जमावड़े से साफ है कि पार्टी इस कानूनी और प्रशासनिक मसले को लेकर किसी तरह के समझौते के मूड में नहीं है।
अशोक गहलोत ने दौरा रद्द किया, टीकाराम जूली भी पहुंचे
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपना पूर्व निर्धारित जोधपुर दौरा निरस्त कर दिया। वे तुरंत जयपुर पहुंचे और पुलिस कमिश्नरेट के बाहर जारी धरने में शामिल होकर पीड़ित पक्ष और आंदोलनकारी नेताओं को अपना समर्थन दिया। उनके पहुंचने से धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं का मनोबल और बढ़ा। इसी बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी अलवर से जयपुर के लिए रवाना हो गए ताकि वे कमिश्नरेट के बाहर चल रहे इस प्रदर्शन में शामिल हो सकें। विभिन्न जिलों से अन्य जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के जयपुर पहुंचने का सिलसिला लगातार बना हुआ है, जिससे यह धरना अब व्यापक रूप लेता जा रहा है।
प्रशासन पर टालमटोल का आरोप
गोविंद सिंह डोटासरा ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शाम के समय अधिकारियों ने बातचीत के बहाने उन्हें एक कमरे में बिठाया और थोड़ी देर में जवाब देने की बात कही। इसके बावजूद घंटों बीत जाने के बाद भी अधिकारियों की ओर से कोई ठोस या स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। पूरी रात इंतजार करने के बाद भी जब पुलिस कमिश्नरेट की तरफ से प्राथमिकी दर्ज करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो नेताओं ने अपने तेवर और कड़े कर लिए। डोटासरा ने स्पष्ट किया कि जब तक रितु बराला के मामले में मुकदमा दर्ज नहीं होता, तब तक धरना स्थल से हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता।















