सर्दियों की दस्तक के साथ ही राजस्थान की रसोई में खानपान का मिजाज बदलने लगता है। जालोर जिले के पारंपरिक घरों में ठंड के मौसम में नाश्ते के लिए कई तरह के खास व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय पकवान है मैदे का देसी ढोकला। आमतौर पर ढोकला सुनते ही बेसन का ख्याल मन में आता है, मगर जालोर में बनने वाला यह ढोकला बिना बेसन के, बहुत ही कम मसालों और साधारण सामग्री के साथ बनाया जाता है। कम खर्च और न्यूनतम समय में तैयार होने वाला यह हल्का-फुल्का नाश्ता बच्चों और बड़ों सभी को खूब भाता है।
साधारण सामग्री से तैयार होता है स्वादिष्ट नाश्ता
जालोर की स्थानीय गृहिणी अनीता जैन के अनुसार, उनके परिवार में यह पारंपरिक व्यंजन लंबे अरसे से सर्दियों की शुरुआत में बनता आ रहा है। इसे पकाने के लिए किसी भारी तामझाम या दुर्लभ मसालों की जरूरत नहीं पड़ती। इस नाश्ते की मुख्य खूबी इसका सादापन और सर्दियों के अनुकूल स्वाद है, जिसे गरमा-गरम घी या तेल के साथ परोसा जाता है।
इसे बनाने के लिए बुनियादी रसोई सामग्री की आवश्यकता होती है
- मैदा: लगभग 500 ग्राम साफ छना हुआ मैदा।
- नमक: स्वाद के अनुसार एक चम्मच साधारण नमक।
- जीरा: खुशबू और पाचन के लिए आधा चम्मच साबुत जीरा।
- पानी: मिश्रण तैयार करने के लिए अच्छी तरह उबलता हुआ गर्म पानी।
- परोसने के लिए: शुद्ध देसी घी या तेल, साथ ही ऊपर से छिड़कने के लिए लाल मिर्च पाउडर।
मिश्रण बनाने और ढोकले को आकार देने की विधि
इस व्यंजन को बनाते समय सबसे महत्वपूर्ण चरण आटे का सही तरीके से घुलना है ताकि उसमें कोई गांठ न पड़े। सबसे पहले 500 ग्राम मैदे को एक बड़े बर्तन में निकालें और उसमें एक चम्मच नमक तथा आधा चम्मच जीरा डालकर सूखी अवस्था में ही अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद उबलता हुआ पानी धीरे-धीरे मैदे के अंदर डाला जाता है।
अनीता जैन बताती हैं कि पानी डालते समय लकड़ी के चम्मच से मिश्रण को लगातार एक ही दिशा में फेंटना चाहिए। इससे घोल एकदम चिकना बनता है और उसमें किसी भी प्रकार की गुठलियां नहीं बनती हैं। जब मिश्रण गाढ़ा होकर अच्छी तरह एकसार हो जाए, तो उसे थोड़ी देर के लिए छोड़ दिया जाता है ताकि वह हाथों से छूने लायक ठंडा हो सके। इसके बाद हाथों को ठंडे पानी से हल्का गीला करके मिश्रण से छोटे-छोटे गोल या चपटे ढोकले गढ़े जाते हैं।
भाप में पकाने और परोसने का पारंपरिक तरीका
आकार देने के बाद इन ढोकलों को भाप में पकाया जाता है। इसके लिए आप रसोई में मौजूद स्टीमर या फिर सामान्य प्रेशर कुकर की जाली का इस्तेमाल कर सकते हैं। मध्यम आंच पर ढोकलों को करीब 15 से 20 मिनट तक अच्छी तरह भाप में पकने दिया जाता है। निर्धारित समय के बाद जब ढोकले पूरी तरह पककर ठोस हो जाएं, तो उन्हें बर्तन से बाहर निकाल लिया जाता है।
परोसने के लिए तैयार ढोकलों को चाकू की मदद से छोटे और चौकोर टुकड़ों में काट लिया जाता है। जालोर की रवायत के मुताबिक, इन गरमा-गरम टुकड़ों के ऊपर भरपूर मात्रा में शुद्ध देसी घी या पसंदीदा कुकिंग ऑयल डाला जाता है। स्वाद को थोड़ा चटपटा बनाने के लिए लोग इसके ऊपर हल्का लाल मिर्च पाउडर, थोड़ा भुना जीरा और चुटकी भर नमक छिड़कना पसंद करते हैं। ठंड के मौसम में यह गरमा-गरम देसी नाश्ता पेट के लिए हल्का और स्वाद में बेहद लाजवाब साबित होता है।



















