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साबरमती जेल से सात समंदर पार तक फैला नेटवर्क, दाऊद के पुराने सिंडिकेट की राह पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोहअपराध
20 अक्तू॰ 2026, 8:39 am (2 मिनट पहले)· 0

साबरमती जेल से सात समंदर पार तक फैला नेटवर्क, दाऊद के पुराने सिंडिकेट की राह पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह

जेल की सलाखों के पीछे से अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट चलाने वाला लॉरेंस बिश्नोई गिरोह आज 90 के दशक की डी-कंपनी की तर्ज पर काम कर रहा है। विदेशी हैंडलर्स और स्थानीय बेरोजगार युवकों के जरिए यह नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बन चुका है।

गुजरात के अहमदाबाद शहर में स्थित साबरमती सेंट्रल जेल की अति सुरक्षित बैरक में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का आपराधिक तंत्र आज देश की सीमाओं को लांघकर वैश्विक स्तर पर फैल चुका है। हाल ही में महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ के वाहन पर तीन अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा की गई गोलीबारी ने एक बार फिर इस गिरोह के विदेशी संपर्कों और कार्यशैली को सुरक्षा एजेंसियों के केंद्र में ला खड़ा किया है। इस दुस्साहसिक हमले के तुरंत बाद इंटरनेट मीडिया के अलग-अलग डिजिटल मंचों पर संदेश जारी करके दो कथित गुर्गों ने जिम्मेदारी ली। इनमें से संयुक्त राज्य अमेरिका में शरण लिए हुए अनिल पंडित नामक हैंडलर ने खुद आगे आकर इस वारदात का श्रेय लिया। जांच में जुटे खुफिया अधिकारियों का प्रारंभिक विश्लेषण बताता है कि यह दावा निराधार नहीं है, बल्कि गिरोह की एक सोची-समझी अंतरराष्ट्रीय चाल का हिस्सा है।

अनिल पंडित का उभार और अमेरिका में गोल्डी बराड़ से ध्यान भटकाने की रणनीति

जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि अनिल पंडित का अचानक इस गोलीबारी की जिम्मेदारी लेना एक रणनीतिक कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) की नजरों में चढ़े बिश्नोई के प्रमुख सहयोगी सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र का ध्यान हटाना है। गोल्डी बराड़ पर लगातार वैश्विक दबाव बढ़ रहा है और उस पर शिकंजा कसता जा रहा है, ऐसे में नए चेहरों को सामने लाकर गिरोह अपनी कमान को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहा है। सुरक्षा दल अब इस पूरे सिंडिकेट के जटिल ढांचे की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं, जिसमें इंटरनेट पर अत्यधिक सुरक्षित मानी जाने वाली सिग्नल जैसी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा का उपयोग और स्थानीय हमलावरों तक परिष्कृत विदेशी आग्नेयास्त्रों को पहुंचाने का पूरा तंत्र शामिल है।

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अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने इस नेटवर्क को आधिकारिक तौर पर 'लॉरेंस बिश्नोई ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप' (ओसीजी - OCG) का नाम दिया है। यह सिंडिकेट अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की परवाह किए बिना काम करता है, विदेशी ठिकानों से बैठकर भारत के विभिन्न कस्बों में मौजूद स्थानीय नौजवानों को शूटर के तौर पर तैयार करता है और समाज के प्रतिष्ठित एवं संपन्न व्यक्तियों पर जानलेवा हमले करवाता है। इन हमलों का सीधा मकसद बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों के भीतर गहरा खौफ पैदा करना होता है, ताकि उनसे अपने नेटवर्क को जिंदा रखने के लिए मोटी रंगदारी और भारी-भरकम रकम वसूली जा सके।

बॉलीवुड हस्तियों से लेकर राजनेताओं तक गिरोह के निशाने पर

अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुआ ताजा हमला कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह एक लंबी आपराधिक श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने हिंदी फिल्म उद्योग के कई बड़े नामों को सीधी धमकियां दी हैं और उन पर हमले की साजिशें रची हैं। इन हस्तियों में अभिनेता सलमान खान, अभिनेता रणवीर सिंह, अभिनेता आमिर खान और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी शामिल हैं। गिरोह का हिंसक इतिहास केवल धमकियों तक सीमित नहीं रहा है। मई 2022 में पंजाब के लोकप्रिय गायक सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद अक्टूबर 2024 में महाराष्ट्र के वरिष्ठ राजनेता बाबा सिद्दीकी की मुंबई में हत्या कर दी गई। इन दोनों ही सनसनीखेज मामलों के तार सीधे तौर पर लॉरेंस बिश्नोई और उसके विदेशी सहयोगियों से जुड़े पाए गए हैं।

हरियाणा के पानीपत से अमेरिका तक कैसे पहुंचा अनिल पंडित

जांच में प्रमुख संदिग्ध के रूप में उभरे 32 वर्षीय अनिल पंडित की पृष्ठभूमि भी बेहद चौंकाने वाली है। वह मूल रूप से हरियाणा के पानीपत जिले के गांव रैर कलां का रहने वाला है। वह वर्ष 2023 के दौरान अवैध रास्तों का इस्तेमाल करते हुए भारत से फरार हो गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह पहले थाईलैंड पहुंचा, वहां से फर्जी दस्तावेजों के सहारे कनाडा दाखिल हुआ और अंततः संयुक्त राज्य अमेरिका में जा छिपा। इसी वर्ष जुलाई के महीने में अमेरिकी अदालत में दायर किए गए एक विस्तृत आरोप-पत्र के मुताबिक, पंडित के सीधे संपर्क गैंगस्टर रणदीप मलिक और कनाडा में ठिकाना बनाए रविंदर सिंह ढांडा से हैं, जो बिश्नोई के संगठित अपराध गिरोह के प्रमुख विदेशी स्तंभ माने जाते हैं।

भारतीय खुफिया एजेंसियों की पड़ताल से यह भी साफ हुआ है कि अनिल पंडित फिलहाल अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य से अपना संचालन कर रहा है और वह लगातार गोल्डी बराड़ के संपर्क में बना हुआ है। टाइगर श्रॉफ पर हमले से पहले भी देश के कई हिस्सों में हुई गोलीबारी और फिरौती के मामलों में उसका नाम दर्ज हो चुका है। इनमें पश्चिमी दिल्ली इलाके में गायक गुरु रंधावा से जुड़े एक व्यायामशाला (जिम) के संचालक पर चलाई गई गोलियां, महाराष्ट्र के पुणे स्थित एक आभूषण शोरूम में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग, साथ ही राजस्थान के भिवाड़ी और हरियाणा के सोनीपत में हुए दो अलग-अलग हिंसक हमले शामिल हैं। दिल्ली और हरियाणा पुलिस इन सभी मामलों की जांच कर रही है, जहां यह तथ्य उजागर हुआ कि साजिशकर्ताओं और हमलावरों के बीच बातचीत के लिए केवल सिग्नल ऐप का सहारा लिया गया था और हथियारों की आपूर्ति विदेशी संपर्कों के जरिए की गई थी।

एफबीआई के शिकंजे में आया हरमन संधू और नशीले पदार्थों का जाल

टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी की साजिश में दूसरा प्रमुख नाम हरमनवीर सिंह उर्फ हरमन संधू का सामने आया है। हरमन संधू को इसी वर्ष जून महीने में एफबीआई ने अपनी वांछित अपराधियों की सूची में दर्ज किया था। वह रविंदर ढांडा के गिरोह का सक्रिय सदस्य है और बिश्नोई नेटवर्क के साथ मिलकर काम करता है। जुलाई के महीने में अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने संधू को कैलिफोर्निया में हिरासत में ले लिया था। अब जांच दल इस बात की गहराई से छानबीन कर रहे हैं कि मुंबई में हुए हालिया हमले में उसकी भूमिका किस तरह जुड़ी हुई थी।

कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स स्थित जिला अदालत ने 23 जून को संधू के खिलाफ एक संघीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। उस पर नशीले एवं प्रतिबंधित पदार्थों को अपने पास रखने, उनकी अवैध तस्करी की साजिश रचने और उन्हें दूसरे देशों में निर्यात करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं का मानना है कि संधू सिंडिकेट के भीतर संभावित लक्ष्यों की शिनाख्त करने, स्थानीय हमलावरों के बीच तालमेल बिठाने, अत्याधुनिक असलहों की व्यवस्था करने और संदेशों के सुरक्षित आदान-प्रदान में अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।

ऑपरेशन हार्ड बॉल: तीन महाद्वीपों में गैंगस्टरों पर सामूहिक कार्रवाई

भारतीय गैंगस्टरों के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को देखते हुए जुलाई के महीने में पश्चिमी देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' नामक एक विशाल संयुक्त अभियान की घोषणा की। इस अभियान में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों की पुलिस एजेंसियों ने आपसी समन्वय से काम किया। इस व्यापक कार्रवाई के तहत भारतीय मूल के 37 खूंखार गैंगस्टरों के खिलाफ तीन संघीय आरोप-पत्र दाखिल किए गए और त्वरित कार्रवाई करते हुए इनमें से 24 अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए और नामजद किए गए सभी अपराधी लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांडा के वैश्विक नेटवर्क के सक्रिय सदस्य हैं।

अमेरिकी अभियोजकों ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भारत की साबरमती जेल की सलाखों के पीछे कैद होने के बावजूद लॉरेंस बिश्नोई अपने विशाल नेटवर्क का संचालन बेरोकटोक कर रहा है। वह जेल के अंदर चोरी-छिपे लाए गए अवैध मोबाइल फोन और इंटरनेट पर आधारित वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) तकनीकों का इस्तेमाल करता है। इन आधुनिक संचार साधनों के जरिए वह सुपारी लेकर हत्याएं करवाने, भीड़भाड़ वाले इलाकों में गोलीबारी करने, उद्योगपतियों से रंगदारी वसूलने, लोगों के अपहरण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशीले पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों के निर्देश देता है।

दहशत का व्यापार और वसूली का वैश्विक मॉडल

एफबीआई की जांच रिपोर्ट में लॉरेंस बिश्नोई के अतिरिक्त उसके दो सबसे भरोसेमंद साथियों गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा को उसके वरिष्ठ सिपहसालार के रूप में चिन्हित किया गया है। ये दोनों दुनिया के अलग-अलग देशों में बैठकर गिरोह के अन्य सदस्यों को निर्देश देते हैं और हत्याओं तथा जबरन वसूली की योजनाओं को अंजाम तक पहुंचाते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह जानबूझकर अत्यधिक हिंसक वारदातों को अंजाम देता है और फिर तुरंत सोशल मीडिया पर उनकी जिम्मेदारी लेता है। इस हथकंडे का मुख्य मकसद भारत में और विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के दिलों में गहरा खौफ पैदा करना है, ताकि लोग बिना किसी विरोध के उनकी मांगी गई रंगदारी चुका दें।

अमेरिकी अभियोजकों ने जून 2023 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित सरे शहर में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हुई हत्या का भी उल्लेख किया है, जिसे कथित तौर पर बिश्नोई गिरोह से जुड़े तत्वों ने अंजाम दिया था। इसके अलावा अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इस पूरे आपराधिक तंत्र को लैटिन अमेरिका और यूरोप के बीच चलने वाली अंतरराष्ट्रीय कोकीन तस्करी और प्रतिद्वंद्वी आपराधिक गिरोहों के नशीले पदार्थों की खेप को लूटने के मामलों से भी सीधे तौर पर जोड़ा है।

दाऊद इब्राहिम की 'डी-कंपनी' और बिश्नोई सिंडिकेट में समानताएं

भारतीय जांच एजेंसियों के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई का वर्तमान ढांचा ठीक उसी तरह काम कर रहा है जैसा 1990 के दशक में कुख्यात भगोड़े दाऊद इब्राहिम की 'डी-कंपनी' ने खड़ा किया था। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए - NIA) ने मार्च 2023 में दाखिल अपने एक विस्तृत आरोप-पत्र में स्पष्ट किया था कि किस तरह उत्तर भारत के ये गैंगस्टर विदेशों में बैठे खालिस्तान समर्थक तत्वों के साथ हाथ मिला चुके हैं। इस नेटवर्क में जेल में बंद गैंगस्टर, सात समंदर पार बैठे मास्टरमाइंड, स्थानीय स्तर पर मौजूद हथियारबंद शूटर और धन का लेन-देन संभालने वाले फाइनेंसर एक व्यवस्थित कॉरपोरेट ढांचे की तरह जुड़े हुए हैं।

एनआईए की जांच के मुताबिक, वर्ष 2015 का बरगारी आंदोलन और वर्ष 2016 में पंजाब की नाभा जेल को तोड़कर कैदियों को छुड़ाने की घटना इस सिंडिकेट के विस्तार में मील का पत्थर साबित हुई। विदेशों में बैठे अलगाववादी तत्वों को भारत के भीतर तबाही मचाने के लिए प्रशिक्षित निशानेबाजों, हथियारों और स्थानीय सहयोग की जरूरत थी, जबकि घरेलू गैंगस्टरों को अत्याधुनिक हथियारों और पैसों के नए स्रोतों की तलाश थी। इस आपसी जरूरत ने दोनों पक्षों को एक साथ ला खड़ा किया और बिश्नोई गिरोह ने यह पूरी व्यवस्था उपलब्ध करा दी।

वर्तमान में बिश्नोई सिंडिकेट का प्रभाव भारत के 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल चुका है, जिनमें पंजाब, हरियाणा, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड शामिल हैं। देश के भीतर अपराध, वसूली और नशीले पदार्थों के कारोबार से जो अकूत संपत्ति जुटाई जाती है, उसे हवाला और अन्य अवैध माध्यमों से कनाडा, अमेरिका, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भेजा जाता है ताकि वहां रह रहे गिरोह के सिपहसालारों और उनके ऐशो-आराम की फंडिंग की जा सके। ठीक इसी तरह दाऊद इब्राहिम ने भी 90 के दशक में मुंबई को निशाना बनाकर अपना विदेशी साम्राज्य खड़ा किया था।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है

टाइगर श्रॉफ पर हमले जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से निपटना कितना जटिल कार्य बन चुका है। इस सिंडिकेट की सबसे बड़ी ढाल इसका विकेंद्रीकृत ढांचा है। पूरी योजना बनाने वाले और आदेश देने वाले मुख्य कर्ताधर्ता देश की सीमाओं से हजारों किलोमीटर दूर विदेशों में सुरक्षित बैठे होते हैं। वहीं जमीनी स्तर पर गोलियां चलाने वाले शूटर आमतौर पर आर्थिक तंगी से जूझ रहे बेरोजगार युवा होते हैं, जिन्हें टेलीग्राम या सिग्नल जैसे सोशल मीडिया मंचों पर थोड़े से पैसों और अपराध की दुनिया में फर्जी नाम कमाने के लालच में भर्ती किया जाता है।

इन नए शूटरों को अपने हैंडलर के असली नाम, उसके ठिकाने या पूरी साजिश के बड़े मकसद के बारे में रत्ती भर भी जानकारी नहीं होती। उन्हें बस अज्ञात स्रोतों से हथियार और टारगेट का पता दिया जाता है। हमला पूरा होते ही उन्हें ठिकाना बदलने का आदेश मिलता है। ऐसे में जब स्थानीय पुलिस किसी शूटर को गिरफ्तार भी कर लेती है, तो वह केवल एक मोहरे तक ही सीमित रह जाती है। विदेशी हैंडलर और शूटर के बीच बातचीत की डिजिटल कड़ियों को जोड़ना, हवाला और क्रिप्टो के जरिए होने वाले लेन-देन को डिकोड करना और अलग-अलग राज्यों में बिखरी वारदातों को एक ही संगठित अपराध श्रृंखला का हिस्सा साबित करना आज भारतीय जांच एजेंसियों के सामने सबसे कठिन चुनौती बना हुआ है।

सवाल-जवाब

लॉरेंस बिश्नोई जेल में रहकर भी गिरोह का संचालन कैसे करता है?
अमेरिकी अभियोजकों और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह साबरमती जेल की बैरक से अवैध मोबाइल फोन और इंटरनेट आधारित VoIP कॉलिंग तकनीकों के जरिए विदेशी हैंडलर्स और गुर्गों को निर्देश देता है।
अनिल पंडित कौन है और उसने किस घटना की जिम्मेदारी ली है?
अनिल पंडित हरियाणा के पानीपत का रहने वाला 32 वर्षीय गैंगस्टर है, जो अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहता है। उसने मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी की जिम्मेदारी ली है।
बिश्नोई गिरोह की तुलना दाऊद की डी-कंपनी से क्यों की जा रही है?
एनआईए के अनुसार, डी-कंपनी की तरह ही बिश्नोई गिरोह के मुख्य हैंडलर विदेशों में बैठे हैं, स्थानीय शूटरों से हमले कराते हैं और भारत से वसूले गए पैसों को हवाला के जरिए अमेरिका, कनाडा और थाईलैंड भेजते हैं।
ऑपरेशन हार्ड बॉल क्या है?
यह अमेरिका, कनाडा और यूरोप की पुलिस एजेंसियों का एक संयुक्त अभियान है, जिसके तहत भारतीय मूल के 37 विदेशी गैंगस्टरों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किए गए और 24 को गिरफ्तार किया गया।
हरमन संधू पर अमेरिकी अदालत में क्या आरोप लगाए गए हैं?
हरमन संधू पर लॉस एंजिल्स की अदालत में प्रतिबंधित नशीले पदार्थों को रखने, उनकी तस्करी की साजिश रचने और उन्हें दूसरे देशों में निर्यात करने के आरोप में वारंट जारी किया गया था।
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