सर्दियों का मौसम आते ही सेहत के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाने वाले आंवले की पूछपरख बाजारों में काफी बढ़ जाती है। जालोर की सब्जी मंडी में इन दिनों ताजा आंवले की बंपर आवक हो रही है और लोग इसे बड़े चाव से खरीद रहे हैं। विटामिन-सी और तमाम तरह के एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर इस फल को कच्चा खाने के अलावा इसके कई तरह के व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक खानपान और आयुर्वेद में आंवले को हमेशा से ही एक बेहद गुणकारी फल माना गया है, जो स्वाद के साथ सेहत को भी दुरुस्त रखता है।
स्थानीय बाजारों में इस समय ताजे आंवले आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं, जिसके कारण लोग अपने घरों में इसका विभिन्न रूपों में उपयोग कर रहे हैं। विशेषकर जालोर के परिवारों में सर्दियों के दौरान आंवले का मुरब्बा खाने का चलन काफी पुराना और लोकप्रिय है। इस ठंडे मौसम में गर्माहट और ऊर्जा बनाए रखने के लिए लोग इस पारंपरिक नुस्खे को आजमाना पसंद करते हैं।
घर पर कैसे तैयार करें आंवले का मुरब्बा
घर पर आंवले का मुरब्बा बनाने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए स्थानीय निवासी संतोष देवी ने इसकी आसान विधि साझा की है। उनका कहना है कि वे हर साल सर्दियों के सीजन में अपने घर पर खुद ही आंवले का मुरब्बा तैयार करती हैं। इस पारंपरिक विधि की शुरुआत आंवलों को उबालकर नरम करने से होती है। इसके बाद चीनी की चाशनी तैयार की जाती है और उबले हुए आंवलों को उस चाशनी में डालकर धीमी आंच पर अच्छी तरह पकाया जाता है।
इस प्रक्रिया के दौरान स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए इसमें इलायची और थोड़ी मात्रा में केसर भी मिलाया जाता है। जब यह मिश्रण पककर पूरी तरह ठंडा हो जाता है, तब इसे किसी साफ कांच के जार में भरकर सुरक्षित रख लिया जाता है। संतोष देवी के अनुसार, नियमित रूप से इसका सेवन करने से आंखों की रोशनी मजबूत होती है और सर्दियों में अक्सर होने वाली पैरों की ऐंठन या दर्द से भी काफी राहत मिलती है।
आंवले के अन्य उपयोग और आयुर्वेदिक महत्व
आंवले का उपयोग केवल मुरब्बा बनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि लोग इसे अपनी पसंद के अनुसार अचार, जूस और कई अन्य खाद्य पदार्थों के रूप में भी डाइट में शामिल करते हैं। आयुर्वेद में भी इसके अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुणों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसमें मौजूद पोषक तत्व और प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट्स इसे शरीर के लिए बेहद खास बनाते हैं।
आयुर्वेदिक डॉक्टर अश्विन रोहिल्ला के मुताबिक, आंवला अपने अनूठे एंटी-कैंसर और एंटी-एजिंग गुणों के लिए भी जाना-पहचाना जाता है। इसे मुरब्बे, अचार या ताजे जूस के रूप में किसी भी रूप में खाया जा सकता है। आयुर्वेद में इसके चिकित्सीय उपयोगों की लंबी परंपरा रही है। डॉक्टर का कहना है कि आंवले की खूबियों को लेकर कई वैज्ञानिक शोध भी सामने आ चुके हैं, जो इसकी उपयोगिता की पुष्टि करते हैं। जालोर में सर्दियों के दिनों में यह आसानी से मिल जाता है, इसलिए लोग अपनी सुविधा के अनुसार इसे अपने दैनिक खानपान का हिस्सा बना रहे हैं।


















