उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित प्रीत विहार कॉलोनी के भीतर घनी रिहायशी बस्ती में संचालित हो रही एक अनधिकृत कांच निर्माण इकाई स्थानीय निवासियों के लिए गहरा संकट बन चुकी है। इस बस्ती की एक संकरी अंदरूनी गली में यह शीशा पिघलाने वाली फैक्ट्री पिछले करीब एक वर्ष से लगातार चल रही है। यहां दिन-रात भारी मशीनें धड़धड़ाती हैं, जिससे पैदा होने वाला असहनीय शोर पूरे इलाके की शांति को छीन चुका है। लगातार मशीनों की गूंज और भट्ठी से निकलते धुएं के कारण आसपास रहने वाले सैकड़ों लोगों का चैन से सोना दूभर हो गया है। बच्चों की स्कूली पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है, वहीं बुजुर्गों और हृदय रोग से ग्रस्त महिलाओं का स्वास्थ्य दिन-ब-दिन तेजी से बिगड़ता जा रहा है। इलाके के पीड़ित बाशिंदों ने मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर मंडल आयुक्त और स्थानीय थाने तक कई बार आधिकारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकल सका है।
रिहायशी माहौल में कांच पिघलाने की भट्टी और बढ़ता वायु-ध्वनि प्रदूषण
कांच निर्माण की इस अनधिकृत इकाई से केवल असहनीय आवाजें ही नहीं निकल रही हैं, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं। कॉलोनी के स्थानीय निवासी विमल कौशिक ने इलाके की स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि रिहायशी बस्ती के बीचों-बीच स्थित इस फैक्ट्री में कांच को उच्च तापमान पर गलाया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान बहुत ज्यादा गंदगी चारों तरफ फैलती है और चिमनियों से दमघोंटू गंदा धुआं बाहर आता रहता है। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार की भारी औद्योगिक मशीनों से लगातार तेज आवाजें गूंजती रहती हैं। प्रीत विहार में अनेक बुजुर्ग, माताएं और परिवार रहते हैं, जिनमें से कई लोग पहले से ही गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे हैं। लगातार हो रहे इस शोर और वायु प्रदूषण के कारण मरीजों का मन हमेशा अशांत रहता है, उन्हें रोज भारी दवाइयां खानी पड़ती हैं और रात में नींद पूरी न होने की वजह से उनका मानसिक तनाव इतना बढ़ जाता है कि सामान्य जीवन जीना असंभव सा लगने लगता है।
गंभीर बीमारियों से जूझती महिलाओं और अस्पताल के चक्कर काटते परिवारों का दर्द
मोहल्ले में रहने वाली महिलाओं की सेहत पर इस फैक्ट्री की गतिविधियों का सीधा और बेहद घातक असर पड़ रहा है। इलाके की एक महिला ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वह हृदय रोग और उच्च रक्तचाप दोनों से गंभीर रूप से पीड़ित हैं। मशीनों के भीषण शोरगुल के कारण उनके सिर में लगातार असहनीय दर्द बना रहता है, जिसके चलते उन्हें ड्रिप तक लगवानी पड़ जाती है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि उन्हें हर दो-तीन दिन के अंतराल पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। लगातार कानफोड़ू आवाजों के कारण उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उनका कहना है कि इस इलाके में सैकड़ों लोग निवास करते हैं और हर परिवार इस प्रदूषण और शोर से कराह रहा है। घरों में पढ़ने-लिखने वाले छात्र-छात्राओं की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है क्योंकि वे शोर के बीच किताबों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं।
हृदय रोगियों के लिए जानलेवा खतरा और प्रशासनिक उदासीनता
कॉलोनी की निवासी मिथिलेश शर्मा ने भी अपनी गंभीर आपबीती बताते हुए कहा कि वह स्वयं हृदय रोगी हैं और इस फैक्ट्री की कर्कश आवाज को सहन करना उनके लिए असंभव हो गया है। दिन-रात यह तेज आवाज उनके दिमाग में घूमती रहती है, जिससे उनकी नींद कभी पूरी नहीं हो पाती। उन्होंने याद दिलाया कि यह अवैध कारखाना पिछले लगभग एक साल से बेरोकटोक चल रहा है। स्थानीय नागरिकों ने अपनी निर्वाचित पार्षद गीता शर्मा से इस बारे में औपचारिक शिकायत की थी। इसके अलावा पुलिस थाने में जाकर पत्र दिया गया और आपातकालीन पुलिस सेवा 112 पर फोन करके भी स्थिति की जानकारी दी गई। दुर्भाग्यवश, इतना सब करने के बाद भी प्रशासन या पुलिस की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और न ही कोई स्पष्ट आश्वासन मिला। स्थानीय लोग केवल इतना चाहते हैं कि आबादी के बीच चल रहे इस अवैध कारखाने से होने वाले शोर और प्रदूषण से उन्हें हमेशा के लिए निजात मिल जाए, ताकि वे पिछले एक साल से झेली जा रही इस प्रताड़ना से मुक्त हो सकें।
साठ घरों की आबादी और जवाबदेही से बचते जिम्मेदार अधिकारी
इलाके की एक अन्य बाशिंदा राधा रानी ने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग पचास से साठ मकान मौजूद हैं और हर घर इस विकट समस्या से जूझ रहा है। भीषण शोर-शराबे की वजह से घर के भीतर सामान्य दिनचर्या चलाना दूभर हो गया है और बच्चे बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। सबसे गंभीर स्थिति हृदय के मरीजों की है, जिनकी सेहत हर बीतते दिन के साथ गिरती जा रही है। राधा रानी के अनुसार, मोहल्ले के लोग अपनी फरियाद लेकर हर मुमकिन चौखट और थाने तक पहुंचे, किंतु कहीं से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। लोगों की सिर्फ यही मांग है कि इस शोर-शराबे और जहरीले धुएं को तुरंत बंद कराया जाए ताकि उन्हें यह आवाजें दोबारा न सुननी पड़ें। वहीं दूसरी ओर, जब इस संवेदनशील विषय पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी डीके गुप्ता से संपर्क साधा गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास समय नहीं है क्योंकि वे शहर से बाहर हैं। क्षेत्रीय अधिकारी ने केवल इतना जोड़ा कि जब वे शहर लौटेंगे, तब पूरे मामले की पड़ताल की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनसे अवगत करा दिया जाएगा। इस बीच कॉलोनी के साठ परिवारों का दम घुटने और कानों के पर्दे फटने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।





















