राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है और उन पर निराधार आरोपों के जरिए संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया है। जयपुर में आयोजित एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने 'SIR' (सिंगल इन्फॉर्मेशन रजिस्टर) दिशानिर्देशों को लेकर हाल ही में खड़े हुए राजनीतिक विवाद पर अपनी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने इस पूरे मामले में निर्वाचन आयोग के कामकाज और उसकी निष्पक्षता का पुरजोर समर्थन किया। उनका कहना था कि विपक्ष लगातार एक सोची-समझी रणनीति के तहत लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के भरोसे को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।
चुनाव आयोग के भीतर सर्वसम्मत निर्णय
मुख्यमंत्री ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें यह दावा किया गया था कि SIR के मुद्दे पर चुनाव आयुक्तों के बीच गंभीर मतभेद थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग के तीनों चुनाव आयुक्तों ने इस संवेदनशील मामले पर पूरी तरह से विचार-विमर्श करने के बाद सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया है। निर्वाचन आयोग से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि 25 सितंबर को जारी किए गए SIR से संबंधित सभी आदेशों को तीनों आयुक्तों द्वारा सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की गई थी। ऐसे में विरोधियों द्वारा फैलाए जा रहे मतभेद वाले दावे पूरी तरह मनगढ़ंत और सत्यता से कोसों दूर हैं।
अखबार की रिपोर्ट और दस्तावेजों की मांग
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने बिना किसी ठोस सबूत के केवल एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट को अपना आधार बनाकर इतने बड़े आरोप लगा दिए। हालांकि, चुनाव आयोग ने बहुत पहले ही इन सभी दावों को पूरी तरह से निराधार और असत्य घोषित कर दिया था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को सीधे चुनौती देते हुए सवाल किया कि अगर नियमों में किसी भी तरह के बदलाव के दावे किए जा रहे हैं, तो कांग्रेस को इसके समर्थन में आधिकारिक सरकारी दस्तावेज जनता के सामने रखने चाहिए। बिना किसी तथ्य या आधिकारिक दस्तावेज के इस तरह की राजनीति करना केवल जनता को गुमराह करने जैसा है।
फॉर्म 6 और नए मतदाताओं के लिए स्व-घोषणा पत्र
पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की। उन्होंने चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बताया कि मतदाता पंजीकरण के मुख्य दस्तावेज फॉर्म 6 में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया गया है। असलियत यह है कि SIR प्रणाली के अंतर्गत नए मतदाताओं की सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए केवल एक अतिरिक्त स्व-घोषणा पत्र की व्यवस्था लागू की गई है। इस प्रक्रियात्मक सुधार को नियमों का उल्लंघन बताना पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर राजनीति
मुख्यमंत्री ने दुख जताते हुए कहा कि यह राजनीतिक विवाद केवल SIR के तकनीकी पहलुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को बट्टा लगाने की एक कोशिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय स्तर के विपक्षी दल को इतने गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की गहनता से जांच नहीं करनी चाहिए थी? सीएम ने तंज कसा कि विपक्ष के नेताओं ने विदेशी दौरों पर जाकर भारत की चुनावी व्यवस्था पर संदेह व्यक्त किया है और देश की सेना के शौर्य पर भी उंगली उठाई है। उन्होंने मांग की कि यदि लगाए गए आरोप झूठे साबित होते हैं, तो विपक्ष को सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए।
कांग्रेस को जमीनी हकीकत से जुड़ने की सलाह
राजनीतिक प्रहार तेज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की जनता कांग्रेस की नीतियों को पहले ही पूरी तरह से खारिज कर चुकी है। उन्होंने टिप्पणी की कि कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वह न तो अपनी चुनावी हार को गरिमा के साथ पचा पाती है और न ही दूसरों की लोकतांत्रिक जीत को स्वीकार कर पाती है। राजनीति में केवल बंद कमरों से आरोप लगाने से साख नहीं बनती। इसके लिए नेताओं को जनता के बीच जाना होगा और उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को समझना होगा। कांग्रेस का जनता से संपर्क टूट चुका है और उन्हें दोबारा जमीन पर उतरकर काम करने की जरूरत है।


















