राजस्थान में होने वाले पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। वोटिंग के दिन मतदाताओं को अपना पोलिंग बूथ तलाशने में किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जिले के सभी मतदान भवनों पर मतदाता सहायता केंद्र बनाने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं, ताकि मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह सुगम बनाया जा सके।
मतदाता सहायता केंद्रों पर तैनात रहेंगे अधिकारी
इन विशेष सहायता केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ की तैनाती की जाएगी। इन अधिकारियों के पास संबंधित मतदान भवन से जुड़ी पूरी मतदाता सूची उपलब्ध होगी। मतदाता इन केंद्रों पर पहुंचकर अपना नाम बता सकेंगे और बिना किसी मशक्कत के अपने सही मतदान बूथ तथा मतदाता क्रमांक की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे कतारों में लगने से पहले ही सही जानकारी मिल जाएगी।
परिसीमन और घनी आबादी के कारण लिया गया फैसला
जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. अरुण गर्ग ने इस व्यवस्था के पीछे की वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि हालिया परिसीमन के कारण कई क्षेत्रों में वार्डों और मतदान केंद्रों की सीमाओं में फेरबदल हुआ है। इसके अलावा, घनी आबादी वाले इलाकों में एक ही मतदान भवन के अंतर्गत कई बूथ संचालित होते हैं। इन तमाम वजहों से मतदाताओं को भ्रम की स्थिति से बचाने और सही बूथ तक पहुँचाने के लिए ये सहायता केंद्र बेहद अहम साबित होंगे।
अधिक बूथ वाले भवनों में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती
जिन मतदान भवनों में पांच बूथ तक की स्थिति होगी, वहाँ मुख्य बीएलओ के साथ दो अतिरिक्त सहायकों को भी नियुक्त किया जाएगा। वहीं, जिन भवनों में पांच से अधिक बूथ बनाए गए हैं, वहाँ आवश्यकता के अनुसार ज्यादा सहायकों का बंदोबस्त किया जाएगा। इसके अलावा, इन सभी मतदाता सहायता केंद्रों पर बैठने के लिए टेबल-कुर्सियों के साथ-साथ गर्मी और धूप से बचाव के लिए पर्याप्त छाया की व्यवस्था को भी अनिवार्य किया गया है ताकि वोटर्स को किसी प्रकार की दिक्कत न हो।




















