कोहिमा जिले के समस्त धार्मिक संस्थानों और पूजा स्थलों में दिव्यांग जनों के लिए पूर्ण और समान पहुंच सुनिश्चित करना अनिवार्य कर दिया गया है। कोहिमा के उपायुक्त बी हेनोक बुचम ने हाल ही में एक प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए सभी धार्मिक स्थलों को निर्देश दिए हैं कि वे बिना किसी देरी के दिव्यांग श्रद्धालुओं के प्रति हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त करें। यह नया निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है ताकि सभी नागरिक बिना किसी बाधा के धार्मिक गतिविधियों में भाग ले सकें।
कानूनी प्रावधान और अधिकार अधिनियम
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने धार्मिक स्थलों पर लोकोमोटर दिव्यांगता से ग्रसित लोगों के साथ होने वाले असमान व्यवहार पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। इसी पृष्ठभूमि में कोहिमा प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है। उपायुक्त के अनुसार, दिव्यांगजनों के प्रवेश में बाधा डालना या उनके साथ अलग व्यवहार करना दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (RPwD Act) का स्पष्ट उल्लंघन है। यह अधिनियम हर दिव्यांग व्यक्ति को समानता, सम्मानपूर्ण व्यवहार और बाधा-मुक्त वातावरण पाने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
आवश्यक बुनियादी ढांचा और सुगम सुविधाएं
प्रशासनिक आदेश में कहा गया है कि धार्मिक परिसरों के प्रबंधन को बिना समय गंवाए बुनियादी ढांचे में आवश्यक सुधार करने होंगे। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित सुविधाएं शामिल हैं
- रैंप और सुरक्षा रेलिंग: प्रवेश और निकास मार्गों पर उपयुक्त ढलान वाले रैंप और सहारे के लिए मजबूत हैंडरेल का निर्माण।
- बाधा रहित आवाजाही: परिसर के भीतर मौजूद सभी भौतिक रुकावटों को हटाना तथा जहां भी संभव हो सीढ़ी-रहित समतल रास्ते उपलब्ध कराना।
- दृश्य और श्रव्य सहायता: दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल लिपि वाले संकेत, टैक्टाइल मैप्स और सुनने में समस्या वाले लोगों के लिए ऑडियो सहायता प्रणालियों की स्थापना।
- त्योहारों में विशेष व्यवस्था: धार्मिक मेलों, उत्सवों और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले दिनों में दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुगम प्रवेश और ठहरने का प्रबंध करना।
जागरूकता प्रशिक्षण और दंडात्मक प्रावधान
प्रशासन ने सभी प्रबंधन समितियों, धार्मिक ट्रस्टों, चर्च एसोसिएशनों और पुजारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने कर्मचारियों तथा कार्यकर्ताओं को आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत संवेदित करें। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि आदेश का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं पर आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 2016 की धारा 89 के तहत जुर्माना लगाया जाएगा और अन्य कानूनी धाराओं के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।





















