पश्चिमी राजस्थान में प्रचुर मात्रा में मिलने वाली धूप को उत्तर पश्चिम रेलवे का जोधपुर मंडल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए प्रभावी साधन बना रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अगस्त तक महज पांच महीनों में मंडल ने करीब 19.94 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन दर्ज किया है। सौर ऊर्जा का यह आंकड़ा दिखाता है कि रेलवे परिसरों में हरित ऊर्जा का विस्तार बहुत तेजी से हो रहा है और स्वच्छ ऊर्जा से अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
पिछले पूरे साल के आंकड़े के बेहद करीब पहुंचा उत्पादन
विगत वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे बारह महीनों में जोधपुर मंडल ने कुल 22.79 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया था। इसके विपरीत, मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 में केवल पांच महीनों (अगस्त तक) की अवधि में ही 19.94 लाख यूनिट बिजली बनाई जा चुकी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि पिछले पूरे साल में तैयार की गई कुल सौर ऊर्जा का लगभग 87.5 प्रतिशत हिस्सा रेलवे ने चालू वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही अर्जित कर लिया है, जो उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय उछाल को दर्शाता है।
स्वच्छ ऊर्जा से पूरी हो रहीं प्रमुख रेलवे परिसरों की जरूरतें
मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने जानकारी दी कि सौर ऊर्जा उत्पादन में दर्ज की जा रही यह तेज बढ़ोतरी अक्षय ऊर्जा के उपयोग की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी राजस्थान के इस पूरे इलाके में साल भर प्रचुर धूप उपलब्ध रहती है, जिसका रेलवे योजनाबद्ध तरीके से भरपूर दोहन कर रहा है। इससे रेलवे के कुल ऊर्जा उपभोग में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी निरंतर बढ़ रही है।
जोधपुर मंडल के विशाल रेलवे परिसरों, कार्यालयों, वर्कशॉप और स्टेशनों पर दिन-रात भारी मात्रा में विद्युत आपूर्ति की निरंतर आवश्यकता रहती है। इस स्थिति में इन परिसरों में लगे रूफटॉप और अन्य सोलर संयंत्रों से उत्पन्न होने वाली बिजली रेलवे की अपनी आंतरिक आवश्यकताओं की पूर्ति में बड़ा योगदान दे रही है। सौर ऊर्जा से आपूर्ति सुनिश्चित होने के कारण पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता में तेजी से गिरावट आ रही है, जिससे उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का अधिक टिकाऊ उपयोग संभव हुआ है।
लागत में कमी और यात्री सुविधाओं में निवेश की उम्मीद
हरित ऊर्जा के इस व्यापक इस्तेमाल से रेलवे के नियमित बिजली बिल खर्च में भी भारी कमी आने की संभावना जताई जा रही है। बिजली पर होने वाली इस वित्तीय बचत का सीधा लाभ रेलवे तंत्र को सुदृढ़ बनाने में मिलेगा। बचाए गए राजस्व और संसाधनों को रेल संचालन के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ यात्री सुविधाओं के विकास और विस्तार से जुड़े विभिन्न निर्माण कार्यों में अधिक प्रभावी ढंग से लगाया जा सकेगा।
102 स्थानों पर सोलर पैनल सक्रिय, तीन नई साइटों पर काम तेज
जोधपुर मंडल के भीतर स्वच्छ ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अब तक कुल 102 विभिन्न स्थानों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से जोधपुर स्टेशन, भगत की कोठी स्टेशन, भगत की कोठी डीजल शेड, मेड़ता रोड स्टेशन तथा मेड़ता रोड डेमू शेड जैसे व्यस्त और बड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं। इन 102 स्थानों पर सौर ऊर्जा का नियमित उत्पादन चल रहा है। इसके अतिरिक्त मंडल के तीन अन्य नए स्थानों पर सोलर पैनल की कमीशनिंग की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है, जिसके चालू होते ही उत्पादन क्षमता में और अधिक इजाफा होगा।























