कोटपूतली के भेरू बाबा मंदिर में 17वें लक्की मेले की तैयारी, मशीनों से तैयार होगा 800 क्विंटल चूरमाराजस्थान के अजमेर में बांदनवाड़ा टोल प्लाजा पर अंधाधुंध गोलियां बरसाकर भागे हमलावर, पुलिस ने लावारिस गाड़ी जब्त कीदेवेंद्र फडणवीस का राहुल गांधी पर हमला, पेट्रोल पंपों द्वारा यूपीआई बहिष्कार की चेतावनी पर भी रुख किया साफबीकानेर में 1880 में बने लालेश्वर महादेव मंदिर की अनूठी विरासत, स्वर्ण आभूषणों से सजता है पंचमुखी स्वरूपफरीदाबाद के पास बसेगी 10 लाख की आबादी वाली नई टाउनशिप, 40 सेक्टर्स का मास्टर प्लान तैयारवडनगर से वाराणसी के बीच शुरू हुई 35,500 किलोमीटर की अनोखी सेवा यात्रा, 20 टीमें कर रहीं समाज सेवाअरुणाचल प्रदेश की जलविद्युत क्षमता भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य को देगी नई रफ्तार, बोले चाउना मेनबिना गैस जलाए सिर्फ 10 मिनट में तैयार करें भुने चने की स्वादिष्ट बर्फी, जानें आसान विधिगणपति स्थापना के दौरान कलश का महत्व और 10 दिवसीय गणेश उत्सव का पूरा कार्यक्रमभाद्रपद शुक्ल अष्टमी पर बरसाना में जन्मोत्सव की गूंज, मध्याह्न काल में 2 घंटे 27 मिनट की खास पूजा अवधि
बीकानेर में 1880 में बने लालेश्वर महादेव मंदिर की अनूठी विरासत, स्वर्ण आभूषणों से सजता है पंचमुखी स्वरूपराजस्थान
20 सित॰ 2026, 6:20 pm (15 मिनट पहले)· 1

बीकानेर में 1880 में बने लालेश्वर महादेव मंदिर की अनूठी विरासत, स्वर्ण आभूषणों से सजता है पंचमुखी स्वरूप

बीकानेर के शिवबाड़ी में स्थित लालेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण तत्कालीन महाराजा डूंगर सिंह ने अपने पिता की स्मृति में करवाया था। यहां स्थापित पंचमुखी शिव प्रतिमा का सोने के आभूषणों से किया जाने वाला शृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

राजस्थान के बीकानेर शहर में शिवबाड़ी क्षेत्र के भीतर स्थित लालेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक आस्था, गौरवशाली इतिहास और स्थापत्य कला की अनूठी विरासत संजोए हुए है। इस ऐतिहासिक देवस्थान की सबसे प्रमुख पहचान गर्भगृह में स्थापित पंचमुखी महादेव की प्रतिमा है, जिसका विशेष अवसरों पर स्वर्ण आभूषणों से अत्यंत दिव्य शृंगार किया जाता है। इस पवित्र धाम की नींव तत्कालीन बीकानेर महाराजा डूंगर सिंह ने वर्ष 1880 में रखी थी। उन्होंने अपने पिता महाराजा लाल सिंह की स्मृति को हमेशा के लिए संजोकर रखने के संकल्प के साथ इस मंदिर की स्थापना करवाई थी, जिसके बाद से ही यह स्थान अनगिनत शिवभक्तों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

पिता की याद को चिरस्थायी बनाने के लिए हुआ निर्माण

शिवबाड़ी स्थित लालेश्वर मंदिर के अधिष्ठाता विमर्शानंद महाराज के अनुसार, महाराजा डूंगर सिंह अपने पिता के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे। महाराजा लाल सिंह के नाम और उनकी पावन स्मृति को हमेशा जीवित रखने के उद्देश्य से ही इस देवालय का नामकरण लालेश्वर महादेव मंदिर किया गया। संपूर्ण मंदिर परिसर का निर्माण पारंपरिक लाल पत्थरों की नक्काशी के साथ किया गया है। यह भव्य संरचना बीकानेर की सदियों पुरानी स्थापत्य शैली और तत्कालीन राजपरिवार की सनातन धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का बेजोड़ प्रमाण पेश करती है।

ये भी पढ़ें

राजपरिवार की महारानियों के सुझाव पर शुरू हुई स्वर्ण शृंगार की परंपरा

मंदिर की भव्यता और भगवान शिव के आभूषणों से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग की जानकारी देते हुए विमर्शानंद महाराज ने बताया कि मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात राजपरिवार की महारानियां भगवान महादेव के दर्शन और शृंगार का अवलोकन करने पहुंची थीं। उस समय महारानियों ने विचार व्यक्त किया कि यद्यपि महादेव का विग्रह स्वरूप पहले से ही अत्यंत नयनाभिराम और अलौकिक है, परंतु यदि इसे और अधिक भव्यता प्रदान की जाए तो इसकी शोभा कई गुना बढ़ जाएगी। इसी भावना का सम्मान करते हुए विशेष तौर पर भगवान महादेव के विग्रह हेतु सोने के आभूषण तैयार करवाए गए। उसी दौर से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है कि प्रमुख धार्मिक उत्सवों और विशिष्ट अनुष्ठानों पर भगवान शिव को इन्हीं स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है।

पंचमुखी स्वरूप का आध्यात्मिक महत्व और सृष्टि के पांच कार्य

इस पवित्र धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रतिष्ठित भगवान शिव का पंचमुखी स्वरूप है, जिसका सनातन धर्म में गहरा दार्शनिक महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचमुखी महादेव भगवान शिव के पांच महाकार्यों के साक्षात प्रतीक हैं। इन पांच कार्यों के अंतर्गत सृष्टि की रचना, उसका पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह समाहित हैं। यह पंचमुखी विग्रह संपूर्ण ब्रह्मांड में शिव तत्व की सर्वव्यापकता और चराचर जगत के संचालन में उनकी सर्वोच्च भूमिका को रेखांकित करता है।

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़

इस पावन स्थल पर सामान्य दिनों में भी नियमित पूजन और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। विशेषकर सोमवार, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, सावन मास और महाशिवरात्रि के महापर्व पर यहां भक्तों का भारी जमावड़ा देखने को मिलता है। इन महत्वपूर्ण तिथियों पर भगवान महादेव का संपूर्ण विधि-विधान से अभिषेक, विशेष पूजन और अत्यंत मनोहारी शृंगार किया जाता है। पर्वों के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है और हर-हर महादेव के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठता है।

करीब डेढ़ शताब्दी का समय बीत जाने के बाद भी लालेश्वर महादेव मंदिर बीकानेर राजपरिवार की धार्मिक परंपराओं, प्राचीन पाषाण स्थापत्य और शिवभक्ति के निरंतर प्रवाह को सजीव बनाए हुए है। पंचमुखी महादेव के अलौकिक दर्शन और स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित रूप श्रद्धालुओं को आंतरिक शांति और आध्यात्मिक अनुभूति से भर देता है।

सवाल-जवाब

लालेश्वर महादेव मंदिर कहां स्थित है?
यह ऐतिहासिक मंदिर राजस्थान के बीकानेर शहर के शिवबाड़ी क्षेत्र में स्थित है।
लालेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण किसने और कब करवाया था?
इस मंदिर का निर्माण बीकानेर के तत्कालीन महाराजा डूंगर सिंह ने वर्ष 1880 में करवाया था।
इस मंदिर का नाम लालेश्वर महादेव क्यों पड़ा?
महाराजा डूंगर सिंह ने अपने पिता महाराजा लाल सिंह की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए इसका निर्माण करवाया था, इसलिए इसका नाम लालेश्वर महादेव रखा गया।
भगवान शिव को सोने के आभूषण पहनाने की परंपरा कैसे शुरू हुई?
मंदिर निर्माण के बाद राजपरिवार की महारानियों के सुझाव पर भगवान शिव के लिए सोने के आभूषण तैयार करवाए गए, जिसके बाद से विशेष पर्वों पर यह परंपरा चली आ रही है।
पंचमुखी महादेव के पांच मुख किन कार्यों के प्रतीक हैं?
सनातन धर्म के अनुसार पंचमुखी महादेव भगवान शिव के पांच प्रमुख कार्यों सृष्टि रचना, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह के प्रतीक हैं।
मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ किन अवसरों पर होती है?
मंदिर में सोमवार, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, सावन मास और महाशिवरात्रि के पर्व पर श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ जुटती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp