कार्यस्थल पर पद और पारिवारिक रसूख का रौब झाड़ना किसी भी पेशेवर माहौल को खराब कर सकता है, लेकिन जब कोई स्वाभिमानी इंसान गलत बात के खिलाफ मजबूती से खड़ा हो जाता है, तो बड़े से बड़े अहंकारी को भी झुकना पड़ता है। आरव मल्होत्रा एक बड़े उद्योगपति राजीव मल्होत्रा का बेटा था। राजीव मल्होत्रा ने वर्षों के कड़े परिश्रम और समर्पण से अपने व्यावसायिक साम्राज्य की नींव रखी थी। इसके उलट, आरव को पारिवारिक कारोबार की बारीकियां सीखने या जिम्मेदारियां संभालने से ज्यादा अपनी संपन्नता का दिखावा करने में रुचि थी। कार्यालय में देरी से पहुंचना, सहकर्मियों और कर्मचारियों पर बिना बात चिल्लाना तथा लोगों की बात बीच में ही काट देना उसकी दैनिक आदतों में शुमार हो चुका था। उसे लगता था कि पिता की कंपनी होने के कारण उसके पास किसी के साथ भी मनमाना बर्ताव करने का अधिकार है।
सहकर्मी के स्वाभिमान ने दिखाया आईना
उसी दफ्तर में मीरा शर्मा नाम की एक युवती जूनियर कंटेंट एग्जीक्यूटिव के रूप में काम करती थी। मीरा का स्वभाव बेहद शांत, शालीन और संजीदा था, लेकिन किसी के साथ अन्याय या अनुचित व्यवहार होते देख चुप बैठना उसके सिद्धांतों के खिलाफ था। एक दिन जब आरव कार्यालय पहुंचा, तो उसकी टेबल पर कॉफी तैयार नहीं रखी थी। इस बात पर आपा खोते हुए उसने रिसेप्शन पर तैनात एक बुजुर्ग महिला कर्मचारी से सभी के सामने बेहद अपमानजनक लहजे में बात करना शुरू कर दिया। उसने चिल्लाते हुए कहा कि लोगों को इतनी छोटी सी बात भी समझ नहीं आती और सवाल उठाया कि वे कंपनी में आखिर करते क्या हैं।
बुजुर्ग कर्मचारी के कुछ बोलने से पहले ही मीरा आगे आई और उसने दृढ़ता से आरव को टोक दिया। मीरा ने दो टूक शब्दों में कहा कि कॉफी बनाना रिसेप्शनिस्ट का काम नहीं है, और अगर यह उनका काम होता भी, तो भी किसी को उनके साथ इस तरह बदतमीजी से बात करने का कोई अधिकार नहीं मिल जाता। पूरा दफ्तर अवाक रह गया क्योंकि किसी ने भी आज तक मालिक के बेटे को इस तरह आईना दिखाने की हिम्मत नहीं की थी। गुस्से से तमतमाए आरव ने पूछा कि क्या उसे पता है कि वह कौन है। इस पर मीरा ने अपनी आवाज ऊंची किए बिना संयम से जवाब दिया कि वह जानती है कि वह कंपनी के मालिक का बेटा है, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि वह दूसरों का सम्मान करना भूल जाए। उसने यह भी याद दिलाया कि उसके पिता ने इस कंपनी को अपनी मेहनत से बनाया है, लोगों को नीचा दिखाकर नहीं। आरव ने गुस्से में उसे नौकरी से निकलवाने की धमकी तक दे डाली, लेकिन मीरा अपने आत्मसम्मान और सच पर अटल रही।
पिता की दो टूक नसीहत और दृष्टिकोण में बदलाव
अगले दिन जब पूरे घटनाक्रम की जानकारी राजीव मल्होत्रा तक पहुंची, तो उन्होंने अपने बेटे को केबिन में तलब किया। पिता ने आरव को कड़े शब्दों में समझाते हुए कहा कि जिस कंपनी पर उसे इतना घमंड है, उसके निर्माण में उन कर्मचारियों का भी बराबर का योगदान है जिन्हें वह मामूली समझता है। पिता ने साफ चेतावनी दी कि यदि वह अपने कर्मचारियों का आदर नहीं कर सकता, तो वह इस कंपनी की कोई भी बागडोर संभालने के योग्य नहीं है। पिता की यह सीख आरव के दिल में गहराई तक उतर गई और उसे पहली बार अहसास हुआ कि उसने खुद कुछ हासिल नहीं किया है, बल्कि वह सिर्फ अपने पिता के रसूख की आड़ ले रहा था।
इस घटना के कुछ दिनों बाद दफ्तर में एक बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की अंतिम समयसीमा नजदीक आ गई थी। पूरी टीम पर काम का भारी दबाव था। आरव पहली बार देर शाम तक ऑफिस में रुका और काम के माहौल को समझने की कोशिश की। उसी दौरान उसने देखा कि मीरा अपना काम पूरा करने के बाद एक ऐसे सहकर्मी की मदद कर रही थी, जिसने पूर्व में उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और अच्छा व्यवहार नहीं किया था। हैरान होकर आरव ने मीरा से पूछा कि वह उस व्यक्ति की मदद क्यों कर रही है जिसने उसके खिलाफ शिकायत की थी। इस पर मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा कि किसी की गलती का जवाब अपनी अच्छाई छोड़कर देना जरूरी नहीं होता, और दफ्तर में सभी साथ मिलकर काम करने आते हैं, दुश्मनी निभाने नहीं। उस पल आरव ने मीरा को केवल एक कर्मचारी नहीं, बल्कि एक प्रेरक व्यक्तित्व के तौर पर देखा।
सुधार की राह और पारस्परिक सम्मान से उपजा प्रेम
उस दिन के बाद से आरव के आचरण में जमीन-आसमान का फर्क आ गया। उसने समय पर कार्यालय आना शुरू किया, सहकर्मियों के सुझावों और परेशानियों को गंभीरता से सुना, किसी भी भूल पर तुरंत माफी मांगी और दूसरों के काम का श्रेय खुद लेने की आदत पूरी तरह छोड़ दी। मीरा ने उसके इस बदलाव को देखा, लेकिन उसने जल्दबाजी में उस पर भरोसा करने से परहेज किया। एक दिन आरव ने मीरा से बातचीत करते हुए स्वीकार किया कि पहले वह सोचता था कि लोग उसके पद की वजह से उसकी बात मानें, लेकिन अब उसे समझ आ चुका है कि सम्मान पद से नहीं बल्कि व्यक्तिगत आचरण से हासिल होता है।
मीरा ने उसे समझाया कि यह बदलाव केवल किसी को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि खुद एक बेहतर इंसान बनने के लिए जारी रहना चाहिए। आरव ने तब मीरा के समक्ष अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि शायद इसी सादगी और सच्चाई के कारण वह उसे पसंद करने लगा है, क्योंकि उसके सामने उसे किसी भी प्रकार के दिखावे की आवश्यकता महसूस नहीं होती। आरव ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने बदले हुए व्यवहार को प्यार के प्रमाण के रूप में पेश नहीं करना चाहता, बल्कि चाहता है कि मीरा उसे उसके कर्मों से परखे। कुछ हफ्तों बाद जब आरव ने अपने प्रेम का प्रस्ताव रखा, तो उसने यह भी कहा कि यदि मीरा की भावनाएं ऐसी नहीं हैं, तो वह उसके निर्णय का पूरा सम्मान करेगा।
मीरा ने तुरंत हामी भरने के बजाय परिपक्वता दिखाई। उसने कहा कि उसे ऐसा व्यक्ति पसंद है जो अपनी गलतियों को स्वीकार करे, सभी का आदर करे और कठिन परिस्थितियों में भी अपना संयम न खोए। उसने कहा कि यदि आरव सचमुच ऐसा इंसान बन चुका है, तो वे एक नए रिश्ते की शुरुआत कर सकते हैं। आरव ने भी रिश्ते में कोई जल्दबाजी न दिखाते हुए एक-दूसरे को समझने और समय देने का फैसला किया।



















