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महाराष्ट्र विधान परिषद नतीजों में महायुति पिछड़ी, 5 में से 3 सीटें जीतकर एमवीए का दबदबामहाराष्ट्र
30 अक्तू॰ 2026, 1:04 am (2 घंटे पहले)· 3

महाराष्ट्र विधान परिषद नतीजों में महायुति पिछड़ी, 5 में से 3 सीटें जीतकर एमवीए का दबदबा

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के नतीजों में महा विकास आघाडी ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि सत्तारूढ़ महायुति केवल दो सीटों पर सिमट गई।

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच द्विवार्षिक सीटों के आए चुनावी नतीजों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को कड़ा झटका लगा है, जबकि विपक्षी महा विकास आघाडी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन सीटों पर विजय दर्ज की है। पांच में से केवल दो सीटें ही सत्ता पक्ष के खाते में जा सकीं। नागपुर संभाग की स्नातक सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत वंजारी ने भाजपा के उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 3,271 मतों के अंतर से पराजित कर अपनी सीट को बरकरार रखा। इस हार के बाद अब भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश संगठन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

केंद्रीय आलाकमान करेगा समीक्षा

चुनावी नतीजों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न रहने पर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व सक्रिय हो गया है। पार्टी के शीर्ष स्तर से महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और चुनाव संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रमुख रणनीतिकारों से पराजय को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। केंद्रीय नेतृत्व इस बात की गहराई से पड़ताल करेगा कि चुनाव में मिली असफलता के पीछे संगठन के भीतर आंतरिक गुटबाजी जिम्मेदार रही या फिर सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच तालमेल की कमी ने असर डाला।

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गठबंधन की एकजुटता के लिए शीर्ष नेताओं का मंथन

परिणाम सामने आने के बाद महायुति के घटक दलों के बीच बयानबाजी और आपसी आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनने लगी है। हालात को नियंत्रण में रखने के लिए गठबंधन के शीर्ष नेता जल्द ही एक आपात समीक्षा बैठक करने की तैयारी में हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार शामिल होंगे। बैठक का प्राथमिक उद्देश्य मतभेदों को सुलझाना, घटकों के मध्य विश्वास को बहाल करना और आने वाले समय के लिए ठोस रणनीति बनाना है ताकि नुकसान को सीमित किया जा सके।

सीटवार चुनावी नतीजे और दलों की स्थिति

इन पांच सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को कराया गया था। नतीजों के अनुसार, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दो सीटों पर विजय पाई। पार्टी ने पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज की। कांग्रेस पार्टी के अभिजीत वंजारी ने नागपुर संभाग स्नातक सीट जीतकर विपक्ष के खाते में तीसरी सीट जोड़ी। वहीं सत्ताधारी खेमे से शिवसेना के किरण सरनाइक ने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सफलता पाई, जबकि पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के कौस्तुभ गावडे विजयी रहे।

सवाल-जवाब

महाराष्ट्र विधान परिषद की कुल कितनी सीटों पर चुनाव हुआ था?
राज्य की कुल 5 विधान परिषद सीटों पर चुनाव संपन्न हुआ था।
विपक्षी महा विकास आघाडी और सत्तारूढ़ महायुति को कितनी-कितनी सीटें मिलीं?
विपक्षी महा विकास आघाडी को 3 सीटों पर जीत मिली, जबकि सत्तारूढ़ महायुति को 2 सीटें हासिल हुईं।
नागपुर स्नातक सीट पर किसने जीत दर्ज की और जीत का अंतर क्या था?
कांग्रेस के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराकर जीत हासिल की।
एनसीपी (एसपी) ने किन सीटों पर जीत हासिल की?
शरद पवार की पार्टी ने पुणे स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की।
चुनाव परिणाम के बाद महायुति के नेता क्या कदम उठा रहे हैं?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मतभेद दूर करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए एक बैठक करेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·1 घंटे पहले

मुझे सच में समझ नहीं आ रहा कि नागपुर जैसी सीट हारने के बाद महतयूरी सचमुच सुधर पाएगी या बस कागजी बैठकें होती रहेंगी। चुनाव के नतीजों से उलटफेर तो दिखता है, पर गठबंधन के भीतर के तनाव इतनी आसानी से कम होने वाले नहीं लगते।

Tanvi Desai@tanvi-desai·1 घंटे पहले

आयशा, बिल्कुल सही कहा। कागजी बैठकों से कुछ नहीं बदलेगा जब तक भीतर की खींचतान खत्म नहीं होती।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

नागपुर में 2019 में वंजारी की रैली कवर की थी — तब भी उन्होंने कम संसाधनों में भाजपा को टक्कर दी थी। आज की जीत अचानक नहीं आई।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

रोहन, बिल्कुल सही — जो ज़मीन पर काम करता है, उसकी जीत यूँ ही नहीं आती। वंजारी ने वो नेटवर्क सालों में बनाया है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

महायुति के पास सरकार है, पैसा है, मशीनरी है — फिर भी स्नातक और शिक्षक सीटों पर पिछड़ गए। यह वोट पढ़े-लिखे तबके का है, और उसने साफ़ संदेश दिया है।

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