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29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा पर बन रहा है सोमवार का शुभ संयोग, जानें पूजा विधान और दान-पुण्य से मिलने वाले लाभधर्म
28 जून 2026, 12:21 am (45 दिन पहले)· 2

29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा पर बन रहा है सोमवार का शुभ संयोग, जानें पूजा विधान और दान-पुण्य से मिलने वाले लाभ

इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सोमवार और अधिक मास के समापन का एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें पूजा-अर्चना और दान करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।

इस साल ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा तिथि 29 जून, सोमवार को पड़ने जा रही है, जो अपने आप में एक बेहद दुर्लभ और पवित्र संयोग लेकर आ रही है। इस बार पूर्णिमा का महत्व कई गुना बढ़ गया है क्योंकि यह सोमवार के दिन पड़ रही है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशिष्ट दिन पर पवित्र नदियों में स्नान करने, उपवास रखने, दान-पुण्य करने और भगवान लक्ष्मी-नारायण व भगवान सत्यनारायण की विशेष उपासना करने से जीवन में सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और मानसिक शांति का आगमन होता है। पंचांग के विश्लेषण के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का आरंभ 29 जून को तड़के सुबह 3:06 बजे से होगा, जो अगले दिन यानी 30 जून को सुबह 5:26 बजे तक रहेगा। इस पावन अवसर पर चंद्रदेव को अर्घ्य समर्पित करने और निर्धन एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

अधिक मास का समापन और भगवान विष्णु की असीम कृपा

आध्यात्मिक विद्वान महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य का कहना है कि इस वर्ष की ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी अद्वितीय है क्योंकि यह अधिक मास के समापन के साथ आ रही है। चूंकि अधिक मास पूरी तरह से भगवान लक्ष्मीपति विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इस पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी-नारायण की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों के घरों में सुख, शांति और समृद्धि का स्थायी वास होता है। इस दिन को मोक्ष प्राप्ति और संचित पुण्यों को बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

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पवित्र स्नान, तर्पण और पितरों का आशीर्वाद

पूजा-पाठ के नियमों को साझा करते हुए महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा या किसी भी अन्य पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी होता है। यदि किसी कारणवश नदी तट पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान की प्रक्रिया पूरी करने के बाद अपने पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण करना, देवी-देवताओं का पूजन करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से पितरों को सद्गति प्राप्त होती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

सोमवार का विशेष संयोग: शिव आराधना से दूर होगा चंद्र दोष

चूंकि इस बार पूर्णिमा सोमवार को पड़ रही है, इसलिए भगवान शिव की आराधना का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। इस दिन शिवलिंग पर शुद्ध जल या पंचामृत अर्पित करने और महादेव का ध्यान करने से कुंडली का चंद्र दोष शांत होता है और व्यक्ति को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। संध्याकाल में भगवान सत्यनारायण की कथा का श्रवण या आयोजन करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। इसके पश्चात, रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर चंद्रदेव को अर्घ्य देकर ही व्रत का पारण करना चाहिए।

वट सावित्री व्रत का समापन और वट वृक्ष का पूजन

महिला श्रद्धालुओं के लिए भी यह दिन बहुत खास होने वाला है। महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, जो महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखती हैं, वे इस पूर्णिमा के दिन वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करके अपने व्रत का विधिवत समापन कर सकती हैं। इसके बाद चंद्रमा की पूजा करके अपने पति की दीर्घायु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की जाती है। यह पूरी परंपरा करवा चौथ की तरह ही चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने की रस्मों से जुड़ी हुई है।

पुरुषों के लिए भी व्रत का विधान और भीषण गर्मी में सेवा का धर्म

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य स्पष्ट करते हैं कि पूर्णिमा का व्रत केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष भी इसे पूरी श्रद्धा के साथ रख सकते हैं। इस पावन दिन पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना, दान-दक्षिणा देना और गर्मी से व्याकुल लोगों को मीठा शरबत या ठंडा पेयजल वितरित करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। ज्येष्ठ मास की इस भीषण गर्मी में प्यासे लोगों को जल पिलाना सबसे बड़ा मानवीय और धार्मिक कर्तव्य है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, प्यासों को ठंडा पानी या शरबत पिलाने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है, जबकि महादेव की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र ग्रह का शुभ प्रभाव प्राप्त होता है।

सवाल-जवाब

इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा कब मनाई जाएगी?
इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी।
ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि का शुभ समय क्या है?
पूर्णिमा तिथि 29 जून को सुबह 3:06 बजे प्रारंभ होगी और 30 जून को सुबह 5:26 बजे समाप्त होगी।
इस वर्ष की ज्येष्ठ पूर्णिमा क्यों अत्यंत विशेष मानी जा रही है?
इस वर्ष की पूर्णिमा इसलिए विशेष है क्योंकि यह सोमवार के शुभ संयोग में पड़ रही है और साथ ही इस दिन अधिक मास का समापन भी हो रहा है।
यदि पवित्र नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर स्नान कैसे करें?
यदि आप पवित्र नदी पर नहीं जा सकते, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
इस दिन ठंडे पेय पदार्थ बांटने का क्या महत्व है?
ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी में जरूरतमंदों को शरबत या ठंडा पानी पिलाना बड़ा धर्म माना गया है, जिससे कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है।
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