श्रावण मास के दूसरे सोमवार को एक अत्यंत पावन और दुर्लभ धार्मिक संयोग निर्मित हो रहा है, क्योंकि इसी दिन सावन सोमवार का व्रत और सोम प्रदोष व्रत एक साथ पड़े हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए यह अवसर अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन विधि-विधान से शिव पूजा और उपवास करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा जीवन के तमाम संकट समाप्त हो जाते हैं।
सोम प्रदोष और सावन सोमवार 2026 के शुभ मुहूर्त
सावन महीने का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। पंचांग की गणना के अनुसार, श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का शुभारंभ 10 अगस्त 2026 को प्रातः 8:00 बजे से होगा, जिसका समापन अगले दिन 11 अगस्त को प्रातः 4:54 बजे होगा।
इस पावन दिन पर महादेव की आराधना के लिए कई विशेष मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं। प्रातः काल ईश्वर ध्यान और पूजा की तैयारी के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:49 बजे से सुबह 5:34 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दोपहर के समय अभिजित मुहूर्त 12:18 बजे से शुरू होकर दोपहर 1:09 बजे तक रहेगा। सोम प्रदोष काल की मुख्य पूजा का सबसे उत्तम समय शाम को 7:09 बजे से लेकर रात्रि 9:23 बजे तक रहेगा। इस दौरान प्रदोष काल में की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
महादेव और माता पार्वती की पूजन विधि
सोम प्रदोष व्रत और सावन सोमवार के दिन पूजा संपन्न करने के लिए शास्त्रों में बताई गई विधि का पालन करना उत्तम माना गया है।
- प्रातः स्नान एवं संकल्प: व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त हों और स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें। इस दिन लाल, सफेद, हरा या केसरिया रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। वस्त्र धारण करने के पश्चात भगवान शिव के समक्ष हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग का जलाभिषेक व पंचामृत: संकल्प लेने के उपरांत शिवलिंग पर सबसे पहले जल अर्पित करें। इसके बाद गंगाजल, गाय का कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद और चीनी मिलाकर तैयार किए गए पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। पंचामृत से अभिषेक करने के बाद पुनः स्वच्छ जल से शिवलिंग को स्नान कराएं।
- पूजन सामग्रियां अर्पित करें: अभिषेक के बाद शिवलिंग पर शमी पत्र, भांग, धतूरा, बेलपत्र, सफेद चंदन, अक्षत और आंकड़े (मदार) के पुष्प अर्पित करें।
- मंत्र जाप व आरती: पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें और विभिन्न शिव मंत्रों का भक्तिभाव से जाप करें। इसके उपरांत धूप-दीप से भगवान शिव की आरती उतारें।
- प्रदोष काल की विशेष पूजा: संध्या समय यानी प्रदोष काल में पुनः स्नान या आचमन करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मंदिर में दीपक जलाएं।
- कथा पाठ एवं भोग: प्रदोष काल में शिवलिंग के समीप बैठकर सोम प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें। इस दौरान लगातार 'ॐ नमः शिवाय' अथवा महामृत्युंजय मंत्र का मन ही मन जाप करते रहें। अंत में महादेव की आरती करें और उन्हें खीर अथवा ताजे फलों का भोग लगाएं।
सावन सोमवार और सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में सोम प्रदोष व्रत का विशिष्ट स्थान है। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष के नाम से जाना जाता है। इस दिन पूर्ण श्रद्धा से व्रत एवं पूजन करने पर शिवजी की असीम कृपा प्राप्त होती है और साधक को मनचाहे परिणाम मिलते हैं। इसके अतिरिक्त वैवाहिक जीवन में प्रेम, मिठास और सामंजस्य बना रहता है तथा कुंडली में मौजूद चंद्र दोष से राहत मिलती है।
वहीं दूसरी ओर, श्रावण का संपूर्ण महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति के लिए समर्पित होता है। इसमें आने वाले सोमवार का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। सावन सोमवार के दिन उपवास रखकर आराधना करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं और महादेव का आशीर्वाद सदैव परिवार पर बना रहता है।



















