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बीमार पड़े भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा, 15 दिन के लिए बंद हुए महेश्वर के पटधर्म
5 जुल॰ 2026, 4:30 am (88 दिन पहले)· 2

बीमार पड़े भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा, 15 दिन के लिए बंद हुए महेश्वर के पट

स्नान पूर्णिमा पर महास्नान के बाद खरगोन के महेश्वर स्थित जगन्नाथ धाम में भगवान अस्वस्थ हो गए हैं, जिसके बाद पुरी की तर्ज पर उनका आयुर्वेदिक उपचार शुरू किया गया है और मंदिर के कपाट 15 दिन के लिए बंद कर दिए गए हैं।

खरगोन जिले के महेश्वर स्थित जगन्नाथ धाम में इन दिनों भक्तों को भगवान के दर्शन नहीं हो रहे हैं। स्नान पूर्णिमा के मौके पर मां नर्मदा के जल से महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अस्वस्थ हो गए, जिसके बाद मंदिर प्रशासन ने 15 दिन के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए हैं।

पुरी जैसी परंपरा, महेश्वर में भी अनासर

ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में सदियों से चली आ रही यह परंपरा अब महेश्वर के जगन्नाथ धाम में भी निभाई जा रही है। महास्नान के बाद भगवान को बुखार जैसी स्थिति में माना जाता है, इसलिए उन्हें मुख्य सिंहासन से हटाकर मंदिर के एक विशेष एकांतवास कक्ष में विराजित किया गया है। इस कक्ष में सिर्फ मंदिर के मुख्य पुजारी को ही जाने की अनुमति है, बाकी किसी भी भक्त या कर्मचारी का प्रवेश वर्जित है।

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हिमालय से मंगाई गई जड़ी-बूटी और काढ़ा

भगवान के उपचार के लिए मंदिर प्रबंधन ने हिमालय से खास तौर पर केदार कड़वी नाम की जड़ी-बूटी मंगवाई है। इसके अलावा आसपास के जंगलों से तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय, पुनर्नवा, जायफल, जावित्री और लेंडी पीपल जैसी कई औषधियां भी जुटाई गई हैं। मंदिर के महंत हृदय गिरि महाराज खुद इन जड़ी-बूटियों को तैयार करते हैं। पहले इन्हें मंत्रोच्चार के साथ अभिमंत्रित किया जाता है, इसके बाद पीसकर काढ़ा बनाया जाता है। यही काढ़ा सुबह-शाम भगवान को औषधि के तौर पर अर्पित किया जा रहा है।

छप्पन भोग की जगह अब सिर्फ लिक्विड डाइट

बीमारी के इस दौर में भगवान के भोग में भी पूरी तरह बदलाव कर दिया गया है। रोज लगने वाले छप्पन भोग और सामान्य प्रसाद की जगह अब भगवान को सिर्फ काढ़ा, केसर-बादाम वाला दूध और ताजे फलों का रस दिया जा रहा है। यानी फिलहाल भगवान पूरी तरह लिक्विड डाइट पर हैं, ठीक वैसे ही जैसे बीमार व्यक्ति को हल्का और तरल भोजन दिया जाता है।

बुखार उतारने के लिए खास शीतल लेप

महंत हृदय गिरि महाराज के मुताबिक भगवान को ज्वर से राहत दिलाने के लिए एक खास शीतल लेप भी लगाया जा रहा है। इस लेप में असली कस्तूरी, मलयागिरी चंदन, मुल्तानी मिट्टी, शहद, गुलाब जल, हल्दी और कर्पूर मिलाया जाता है। यह लेप भगवान के मस्तक और शरीर पर लगाया जाता है, ताकि तपन कम हो और शरीर को ठंडक मिले। ठीक वैसे ही, जैसे तेज बुखार में किसी इंसान के माथे पर ठंडी पट्टी रखी जाती है।

सन्नाटे में गर्भगृह, सिर्फ पुजारी के हवाले सेवा

15 दिन के इस एकांतवास में मंदिर का पूरा माहौल बदल गया है। गर्भगृह में सन्नाटा पसरा है, भक्तों के लिए पट बंद हैं और भगवान की सेवा, औषधि और आराम की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ मुख्य पुजारी और मंदिर प्रबंधन के कंधों पर है।

15 जुलाई को नवयौवन दर्शन, 16 जुलाई को निकलेगी रथ यात्रा

हृदय गिरि महाराज ने बताया कि स्वस्थ होने के बाद 15 जुलाई को भगवान नवयौवन रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद षोडशोपचार पूजन संपन्न होगा और 16 जुलाई को भगवान रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। महेश्वर के श्रद्धालु इस रथ यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अस्वस्थ क्यों हुए?
स्नान पूर्णिमा पर मां नर्मदा के जल से महास्नान के बाद भगवान को अस्वस्थ माना गया, जिसके बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
महेश्वर के जगन्नाथ धाम के कपाट कब तक बंद रहेंगे?
कपाट 15 दिनों के लिए बंद किए गए हैं, इस दौरान भगवान का आयुर्वेदिक उपचार चल रहा है।
भगवान के उपचार में किन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल हो रहा है?
हिमालय से मंगाई गई केदार कड़वी के साथ तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय, पुनर्नवा, जायफल, जावित्री और लेंडी पीपल जैसी औषधियां इस्तेमाल हो रही हैं।
भगवान को अभी भोग में क्या दिया जा रहा है?
छप्पन भोग की जगह अब सिर्फ काढ़ा, केसर-बादाम वाला दूध और ताजे फलों का रस दिया जा रहा है।
बुखार से राहत के लिए कौन सा लेप लगाया जा रहा है?
कस्तूरी, मलयागिरी चंदन, मुल्तानी मिट्टी, शहद, गुलाब जल, हल्दी और कर्पूर से बना शीतल लेप भगवान के मस्तक और शरीर पर लगाया जा रहा है।
भगवान कब और कैसे फिर से भक्तों को दर्शन देंगे?
महंत हृदय गिरि महाराज के अनुसार 15 जुलाई को भगवान नवयौवन रूप में दर्शन देंगे और षोडशोपचार पूजन के बाद 16 जुलाई को रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
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