शुक्रवार से पांच दिवसीय दिवाली के पावन उत्सव की शुरुआत हो रही है। इस महापर्व का आरंभ धनतेरस के त्योहार के साथ होता है। इसके बाद नरक चतुर्दशी, मुख्य दिवाली, गोवर्धन पूजा और अंत में भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन बाजार से कुछ न कुछ नई वस्तु घर लाने की प्राचीन परंपरा है। इस दिन मुख्य रूप से सोना या चांदी खरीदने का विशेष महत्व माना गया है। हालांकि जो लोग स्वर्ण या रजत खरीदने में असमर्थ हैं, वे स्टील, पीतल या तांबे के बर्तन भी खरीद सकते हैं। इस पावन दिन धातु की वस्तु खरीदना बेहद शुभ फलदायी माना गया है।
धनतेरस के अवसर पर घर में किसी भी नई धातु का आगमन पूरे साल भर के लिए खुशियों के प्रवेश के समान माना जाता है। इस दिन खरीदारी करने के लिए शुभ मुहूर्त बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त दीपक जलाने का भी विधान है। सूर्यास्त के पश्चात घर के मुख्य द्वार के बाहर यम देवता के नाम का सरसों के तेल का एक दीपक प्रज्वलित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन यमराज के नाम का दीप जलाने से जीवन के सभी अज्ञात भय दूर हो जाते हैं। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार धनतेरस के दिन कुछ विशेष उपाय करने से पूरे वर्ष घर में धन और समृद्धि का निरंतर वास रहता है।
धनतेरस पर भय दूर करने और तिजोरी भरने के अचूक उपाय
यदि आपके मन में किसी प्रकार का अज्ञात भय बना रहता है, तो धनतेरस की शाम को यम देवता के निमित्त घर के बाहर जलाए जाने वाले तेल के दीपक में काली गुंजा के दो दाने डालकर प्रज्वलित करें। वहीं अगर आप मां लक्ष्मी की असीम कृपा से अपनी धन की तिजोरियां हमेशा भरी रखना चाहते हैं, तो इस दिन लक्ष्मी यंत्र खरीदकर घर ले आएं और उसे घर के एक उचित स्थान पर सुरक्षित रख दें। इस यंत्र का मुख्य उपयोग दीपावली के दिन किया जाता है। दिवाली की शाम को लक्ष्मी पूजा के समय इस यंत्र को स्थापित करें और विधि-विधान के साथ इसकी पूजा-अर्चना करें। इसके बाद माता लक्ष्मी के विशेष मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का जाप करें। यदि इस बड़े मंत्र के उच्चारण में किसी प्रकार की कठिनाई महसूस हो, तो केवल एकाक्षरी बीज मंत्र 'श्रीं ह्रीं श्रीं' का भी जाप किया जा सकता है, क्योंकि देवी लक्ष्मी का मूल एकाक्षरी मंत्र 'श्रीं' ही है।
माता लक्ष्मी के मंत्र जाप के लिए स्फटिक की माला को सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा कमलगट्टे की माला को भी बहुत शुभ बताया गया है, लेकिन यदि ये दोनों मालाएं उपलब्ध न हों, तो रुद्राक्ष की माला पर भी मंत्र जाप किया जा सकता है। इसके साथ ही, धनतेरस के दिन एक बरगद का पत्ता लाकर उसे अच्छी तरह साफ कर लें। फिर उसे गोल आकार में मोड़कर उस पर मौली या कलावा बांध लें और उस पर हल्की सी चंदन की सुगंध लगाएं। इसके बाद एक लाल रंग के कपड़े में कुछ सिक्कों और पांच कौड़ियों के साथ इस पत्ते को बांधकर अपने घर या कार्यालय में धन रखने वाले स्थान पर स्थापित कर दें।
नकारात्मकता हटाने और स्वास्थ्य सुधारने के विशेष टोटके
जीवन से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए धनतेरस के दिन यम देवता के नाम पर जलाए जाने वाले दीपक में एक चुटकी काले तिल मिलाकर जलाना चाहिए। यदि आप मां लक्ष्मी और भगवान गणेश दोनों का एक साथ आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस दिन सोने-चांदी या बर्तनों के अलावा मिट्टी से बने लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्तियां खरीदकर घर लाएं और दिवाली के दिन उनकी विधिपूर्वक पूजा करें। अपने स्वास्थ्य को बेहतर और निरोगी बनाए रखने के लिए धनतेरस के दिन एक तुलसी का पत्ता अपनी जीभ पर रखकर निगल लें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि तुलसी के पत्ते को दांतों से चबाना नहीं है, बल्कि केवल साबुत निगलना है। साथ ही यह नियम भी हमेशा ध्यान रखें कि कभी भी सूर्यास्त के बाद और रविवार के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
घर-परिवार में हमेशा सुख-शांति और खुशहाली बनाए रखने के लिए धनतेरस के दिन एक सूखा नारियल खरीदकर घर लाएं और दीपावली के दिन उससे मां लक्ष्मी को भोग लगाएं। आप चाहें तो उस नारियल से कोई स्वादिष्ट मिठाई बनाकर भोग में अर्पित कर सकते हैं या फिर नारियल को घिसकर, उसमें थोड़ी सी शक्कर मिलाकर भी मां को भोग लगा सकते हैं। अपने घर की सुख-समृद्धि की कामना के लिए धनतेरस के दिन एक पीपल का पत्ता लें, उस पर पीले चंदन का टीका लगाएं और उसे किसी बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इसके अलावा एक सफेद कपड़े में पांच गोमती चक्र लपेटकर हमेशा अपने पास सुरक्षित रखें।
कुबेर यंत्र की स्थापना और अन्य महत्वपूर्ण अनुष्ठान
घर में धन की वर्षा और बरकत बनाए रखने के लिए इस धनतेरस पर कुबेर यंत्र खरीदकर घर लाएं और उसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखें। दीपावली की शाम को पूजा के समय इस यंत्र की भी पूरी विधि-विधान से पूजा करें और मंत्रमहार्णव ग्रंथ में बताए गए कुबेर जी के 16 अक्षरों वाले शक्तिशाली मंत्र 'ऊँ श्री ऊँ ह्रीं श्री ह्री क्लीं श्री क्लीं वित्तेश्वराय नमः' का जाप करें। धनतेरस के दिन खरीदे गए इस कुबेर यंत्र को दिवाली की रात कम से कम 51 हजार मंत्रों के अनुष्ठान से सिद्ध करके अपने घर में स्थापित करें। इसके अलावा धनतेरस के दिन रूई का एक नया पैकेट खरीदकर घर लाएं और उस पर 'श्री गणेशाय नमः' मंत्र का 11 बार मानसिक जाप करें। मंत्र जाप करने के बाद इस रूई से विभिन्न बत्तियां बनाकर रख लें और धनतेरस से लेकर दीपावली तक घर में जितने भी दीपक जलाएं, उनमें इन्हीं बत्तियों का उपयोग करें।
यदि आपके जीवन से खुशियां कहीं खो गई हैं और निराशा छा गई है, तो उन्हें वापस लाने के लिए धनतेरस के दिन तुलसी के पौधे को ससम्मान प्रणाम करें और उसके तने पर रोली से तिलक लगाएं। इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर अपने जीवन में खुशियों के आगमन के लिए सच्ची श्रद्धा से प्रार्थना करें। यदि आप चाहते हैं कि आपके साथ जीवन में सब कुछ अच्छा ही हो, तो धनतेरस के दिन किसी नजदीकी शिव मंदिर जाएं, भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें और 'ऊँ नमः शिवाय' मंत्र का 21 बार जाप करें। धनतेरस की कथा पढ़ने से इस त्योहार का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।


















