उदयपुर में दीपावली के पावन पर्व पर आस्था और उल्लास का अनूठा माहौल देखने को मिला। रोशनी के इस महापर्व पर समृद्धि और वैभव की देवी मां लक्ष्मी के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ था। इसी धार्मिक और उत्सवपूर्ण माहौल के बीच मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य भी मंदिर पहुंचे। डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के पहुंचते ही वहां मौजूद श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया। उन्होंने पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ मां लक्ष्मी के चरणों में शीश झुकाया तथा सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और खुशहाली की कामना की।
परिवार के साथ की विशेष पूजा
इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उनके साथ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती निवृत्ति कुमारी मेवाड़, उनके सुपुत्र महाराज कुमार हरितराज सिंह मेवाड़ तथा दोनों सुपुत्रियां बाईजीलाल मोहलक्षिका कुमारी मेवाड़ और बाईजीलाल प्राणेश्वरी कुमारी मेवाड़ भी उपस्थित रहीं। परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ मिलकर मां लक्ष्मी के दर्शन किए और विधि-विधान से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से मेवाड़ क्षेत्र और पूरे प्रदेशवासियों के जीवन में निरंतर समृद्धि व खुशहाली बनी रहने की मंगलकामना की।
मंदिर परिसर में दिखा दीपोत्सव का उल्लास
दर्शन और पूजन के उपरांत मंदिर के पुजारी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए श्रीजी हुजूर और पूरे मेवाड़ परिवार को आशीर्वाद के रूप में आशीका भेंट की। इस दौरान संपूर्ण मंदिर परिसर में दीपावली का भव्य और उत्सवी स्वरूप नजर आया। राजपरिवार के मंदिर आगमन पर दीपोत्सव समिति के पदाधिकारियों और वहां उपस्थित आम श्रद्धालुओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर लोगों ने राजपरिवार के सदस्यों से मुलाकात कर दीपावली की शुभकामनाएं भी साझा कीं।
सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन
मेवाड़ क्षेत्र में प्राचीन काल से ही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का विशेष महत्व रहा है। दीपावली जैसे बड़े और पवित्र त्योहार के अवसर पर प्रमुख मंदिरों में जाकर दर्शन करना इसी गौरवशाली परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजपरिवार की इस उपस्थिति ने एक बार फिर मेवाड़ की गहरी आस्था और उसकी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े पारंपरिक रीति-रिवाजों को जीवंत कर दिया। मंदिर में मां लक्ष्मी के पूजन के साथ परिवार ने दीपोत्सव का यह पर्व मनाया और पूरे अंचल के लिए मंगल भविष्य की कामना की।



















