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गोंडा का पचरननाथ मंदिर: द्वापर युग से जुड़ा है नाता, जब औरंगजेब की सेना पर टूट पड़े थे भौंरेधर्म
22 अक्तू॰ 2026, 3:03 am (6 मिनट पहले)· 0

गोंडा का पचरननाथ मंदिर: द्वापर युग से जुड़ा है नाता, जब औरंगजेब की सेना पर टूट पड़े थे भौंरे

उत्तर प्रदेश के गोंडा में स्थित प्राचीन पचरननाथ मंदिर का इतिहास द्वापर युग और पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस शिवधाम में औरंगजेब के सैनिकों पर मधुमक्खियों ने हमला कर दिया था, जिसके निशान आज भी शिवलिंग पर मौजूद हैं।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित पचरननाथ मंदिर अपनी प्राचीनता और अद्भुत मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर बसा यह पावन स्थल सामान्य मंदिरों की तरह हालिया निर्माण नहीं है, बल्कि इसका इतिहास पौराणिक काल तक जाता है। सावन के महीने और अन्य विशेष अवसरों पर यहाँ उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ देश-विदेश से भी बड़ी संख्या में शिवभक्त भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पहुँचते हैं।

पांडवों के अज्ञातवास और स्थापना की कथा

स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार पचरननाथ मंदिर कोई सौ या दो सौ साल पुराना नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध द्वापर युग से है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि जब पाँचों पांडव अपने अज्ञातवास के समय विभिन्न स्थानों पर प्रवास कर रहे थे, तब उन्होंने इस पवित्र स्थल पर इस शिवलिंग की स्थापना की थी। पाँच पांडवों द्वारा इसकी स्थापना किए जाने के कारण ही इस ऐतिहासिक मंदिर का नाम पचरननाथ मंदिर पड़ा, जो आज भी क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का एक मुख्य स्तंभ है।

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औरंगजेब के सिपाहियों पर मधुमक्खियों का प्रहार

इस मंदिर के इतिहास से जुड़े कई दिलचस्प और रोमांचक किस्से क्षेत्र में प्रचलित हैं। मंदिर के पुजारी बुधराम बाबा ने जानकारी दी कि एक समय ऐसा भी आया जब औरंगजेब के सिपाहियों ने इस प्राचीन शिवलिंग को खंडित करने या काटने का प्रयास किया था। जैसे ही उन्होंने पवित्र शिवलिंग पर प्रहार करना शुरू किया, वैसे ही अचानक मधुमक्खियों के एक विशाल झुंड ने उन सैनिकों पर जोरदार हमला कर दिया। उस भीषण हमले से बचने के लिए औरंगजेब और उसके सभी सिपाही जान बचाकर वहाँ से भाग खड़े हुए। आज भी उस प्राचीन घटना के प्रमाण के रूप में शिवलिंग पर काटने और प्रहार किए जाने के निशान स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।

शिवलिंग की अद्भुत संरचना और विशाल अर्घ

मंदिर की वास्तुकला और बनावट भी यहाँ आने वाले लोगों को हैरान कर देती है। पुजारी बुधराम बाबा के अनुसार, जैसा शिवलिंग ऊपर से नजर आता है, ठीक उसी तरह के छह अन्य शिवलिंग इसके ठीक नीचे मौजूद हैं। इस मंदिर के शिवलिंग का अर्घ इतना विशाल है कि पूरा शिवाला इसी अर्घ पर टिका हुआ है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु मुख्य रूप से इसी बड़े अर्घ के ऊपर से ही भगवान शिव की परिक्रमा पूरी करते हैं।

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भारी भीड़

पचरननाथ मंदिर में पूरे साल भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन विशेष दिनों में यह संख्या लाखों में पहुँच जाती है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर तथा सावन माह के दौरान प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं। इसके अलावा, स्थानीय निवासी दीनानाथ यादव बताते हैं कि हर हफ्ते सोमवार और शुक्रवार के दिन इस मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। लोगों की अटूट आस्था है कि इस पावन शिवलिंग पर सच्चे मन से जलाभिषेक करने से जीवन के सारे दुख-दर्द और कष्ट दूर हो जाते हैं।

सवाल-जवाब

पचरननाथ मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर उत्तर प्रदेश के गोंडा जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
पचरननाथ मंदिर का निर्माण किस काल का माना जाता है?
मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में अज्ञातवास के दौरान पाँचों पांडवों ने की थी।
इस मंदिर का नाम पचरननाथ क्यों पड़ा?
पाँच पांडवों द्वारा इस मंदिर की स्थापना किए जाने के कारण इसका नाम पचरननाथ मंदिर रखा गया।
औरंगजेब के सिपाहियों पर किसने हमला किया था?
जब सिपाहियों ने शिवलिंग को काटने का प्रयास किया, तब मधुमक्खियों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया था।
मंदिर के शिवलिंग पर किस तरह के निशान आज भी मौजूद हैं?
शिवलिंग पर औरंगजेब के सैनिकों द्वारा उसे काटे जाने और प्रहार करने के निशान अभी भी बने हुए हैं।
इस मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ कब होती है?
महाशिवरात्रि के पर्व पर, सावन माह के दौरान और हर हफ्ते सोमवार व शुक्रवार को यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है।
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