सावन का पवित्र महीना चल रहा है और इस दौरान हर तरफ भगवान शिव की आराधना की जा रही है। देश भर के सभी शिव मंदिरों में शिव भक्तों का तांता लगा हुआ है। इस विशेष पूजा के दौरान भक्त शिवलिंग पर जल, पुष्प, बेलपत्र, भांग और धतूरा जैसी चीजें अर्पित करते हैं। इसके साथ ही भगवान को भोग या प्रसाद भी चढ़ाया जाता है। ईश्वर को अर्पित किया गया यह प्रसाद बेहद पवित्र माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि इसे ग्रहण करने से भक्तों को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
प्रसाद खाने को लेकर क्या है असमंजस
लंबे समय से लोगों के मन में यह सवाल उठता रहा है कि क्या शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला प्रसाद हर किसी को खाना चाहिए या नहीं। इस विषय पर स्पष्ट जानकारी प्राप्त करने के लिए देवघर बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहित से संपर्क किया गया ताकि इस धार्मिक संशय को दूर किया जा सके।
बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहित के विचार
बैद्यनाथ मंदिर के प्रसिद्ध तीर्थ पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने बातचीत के दौरान बताया कि सनातन धर्म में किसी भी देवी-देवता की पूजा के समय नैवेद्य चढ़ाना अनिवार्य माना जाता है। नैवेद्य के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। इसी प्रकार भगवान भोलेनाथ की पूजा में भी अन्य सामग्री के साथ नैवेद्य यानी प्रसाद अर्पित किया जाता है, जो अत्यधिक पवित्र और पुण्य प्रदान करने वाला होता है। इसलिए इस प्रसाद को अवश्य ग्रहण करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से बड़े से बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
ब्रह्म हत्या जैसे पाप से मुक्ति
तीर्थ पुरोहित के अनुसार शिव पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों वाले शिवलिंग के ऊपर जो प्रसाद चढ़ाया जाता है, उसे तुरंत और अवश्य खाना चाहिए। इससे ब्रह्म हत्या जैसे गंभीर पाप से भी छुटकारा मिल जाता है। विशेष रूप से ज्योतिर्लिंग पर चढ़ाए गए प्रसाद को जरूर खाना चाहिए। हालांकि, इसमें एक खास बात यह भी ध्यान रखनी होती है कि शिवलिंग पर किस स्थान पर रखे प्रसाद को नहीं खाना चाहिए, जिसका विवरण आगे दिया गया है।
चांडा का स्थान और वर्जित प्रसाद
तीर्थ पुरोहित ने जानकारी दी कि शिवलिंग के ठीक ऊपर चांडा का वास होता है। चांडा धन के देवता कुबेर के आठवें पुत्र का नाम है। यही कारण है कि जो प्रसाद सीधे शिवलिंग के ऊपर रखा जाता है, उसे कभी नहीं खाना चाहिए। वह प्रसाद भूत, पिशाच, चांडाल और राक्षसों के हिस्से का माना जाता है। हालांकि, जो प्रसाद शिवलिंग के पास यानी नीचे रखा जाता है, उसे जरूर ग्रहण करना चाहिए। वह प्रसाद अमृत के समान फलदायी होता है और जीवन में भारी पुण्य की प्राप्ति कराता है। यदि सीधे ऊपर रखे प्रसाद को गलती से कोई प्राप्त कर ले, तो उसे खाने के बजाय सिर से लगा लेना चाहिए।






















