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बर्फ से शिवलिंग बनाने का वायरल ट्रेंड कितना सही, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञधर्म
22 अक्तू॰ 2026, 1:17 am (1 घंटे पहले)· 2

बर्फ से शिवलिंग बनाने का वायरल ट्रेंड कितना सही, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

सावन के महीने में सोशल मीडिया पर फ्रिज की बर्फ से शिवलिंग बनाकर पूजा करने का ट्रेंड काफी वायरल हो रहा है। उज्जैन के वास्तुविद् और ज्योतिषाचार्य दुर्गेश तारे ने इस प्रथा को गलत बताया है और शास्त्रों का हवाला देते हुए इसे तुरंत बंद करने की सलाह दी है।

सावन के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक अजीब और नया चलन तेजी से फैल रहा है। इस ट्रेंड के तहत कई लोग, विशेषकर महिलाएं, मंदिरों की बजाय अपने घरों में ही फ्रिज के अंदर बर्फ जमाकर भगवान शिव का शिवलिंग तैयार कर रही हैं। इसके बाद धूप, दीप और बेलपत्र के साथ उसकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की हजारों रील्स आसानी से देखी जा सकती हैं। इसके अलावा, यूट्यूब पर भी ऐसे कई वीडियो धड़ल्ले से चल रहे हैं जिनमें घर पर ही बर्फानी बाबा यानी बर्फ का शिवलिंग बनाने के अलग-अलग तरीके सिखाए जा रहे हैं। हालांकि, जानकारों और धर्म के जानकारों के अनुसार यह पूरा तरीका पूरी तरह से गलत है और इस पर तुरंत रोक लग जानी चाहिए।

उज्जैन के प्रसिद्ध वास्तुविद् और ज्योतिषाचार्य दुर्गेश तारे का इस मामले में स्पष्ट कहना है कि शास्त्रों में कहीं भी भगवान शिव के लिए कृत्रिम रूप से हिम या बर्फ के शिवलिंग का निर्माण करने का कोई ऐतिहासिक या धार्मिक प्रमाण नहीं मिलता है। जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ की गुफा में बनने वाला बर्फानी धाम एक पूरी तरह से प्राकृतिक संरचना है, जहां बाबा बर्फानी का शिवलिंग स्वतः यानी अपने आप बनता है। आजकल सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने और व्यूज बटोरने के लिए इस तरह के मनगढ़ंत वीडियो बनाने का एक चलन सा बन गया है। इसी अंधी दौड़ में लोग घरों के रेफ्रिजरेटर में बर्फ जमाकर शिवलिंग बनाने के तरीके सिखा रहे हैं और इसे अमरनाथ यात्रा से जोड़कर पेश कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो अलग-अलग रंगों की बर्फ जमाकर रंगीन शिवलिंग बनाने के प्रयोग भी कर रहे हैं जो शास्त्रों के बिल्कुल विपरीत है।

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दुर्गेश तारे आगे बताते हैं कि हमारे प्राचीन शास्त्रों में इस तरह के मनमाने प्रयोग करने की अनुमति नहीं दी गई है। ग्रंथों में स्पष्ट रूप से कलो पार्थिव सिद्धिद का कथन मिलता है जिसका अर्थ है कि कलयुग में केवल पार्थिवेश्वर यानी शुद्ध मिट्टी से बनाए गए शिवलिंग की पूजा का ही विधान और प्रमाण मिलता है। सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए यह बेहद जरूरी है कि लोग इस तरह के मनगढ़ंत और बिना किसी आधार वाले प्रयोगों के प्रचार-प्रसार से दूर रहें। समाज में कुछ लोग यह भी दावा करते हैं कि यदि आसपास कोई मंदिर या शिवलिंग उपलब्ध न हो, तो हाथ के अंगूठे को ही भगवान शिव मानकर उस पर जल अर्पित किया जा सकता है। हालांकि, ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बात का भी शास्त्रों में कोई पुख्ता प्रमाण दर्ज नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे सनातन शास्त्रों में मुख्य रूप से धातु या पाषाण यानी पत्थर से बने शिवलिंग की पूजा करने का ही विधान बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग का क्षरण होना या उसका आकार घटना इंसान की आयु को कम करने वाला माना गया है। ऐसे में जो लोग अपने घरों के फ्रिज में बर्फ से शिवलिंग का निर्माण कर रहे हैं और फिर उसकी पूजा कर रहे हैं, वे इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं कि वह बर्फ का टुकड़ा समय के साथ अपने आप पिघलने लगता है। इस तरह से शिवलिंग का लगातार पिघलना या घटना शास्त्रीय नियमों और वास्तु शास्त्र दोनों ही दृष्टियों से पूरी तरह से गलत है।

आम जनता को इस बात को गहराई से समझना होगा कि वे इस तरह के आधुनिक और अवैज्ञानिक तरीकों से सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर का प्रेम पाने की उम्मीद तो करते हैं, लेकिन इसके परिणाम उनके लिए नकारात्मक भी साबित हो सकते हैं। सोशल मीडिया की दुनिया में किसी भी नए वायरल ट्रेंड को आंख मूंदकर अपनी जिंदगी में उतारने से पहले उसके धार्मिक और व्यावहारिक पहलुओं पर गंभीरता से विचार अवश्य करना चाहिए। इंटरनेट पर दिखने वाली हर चमकती चीज या ट्रेंड सही हो, यह जरूरी नहीं है और सनातन परंपराओं के साथ खिलवाड़ करने से बचना चाहिए।

सवाल-जवाब

बर्फ से शिवलिंग बनाने का ट्रेंड कहाँ चल रहा है?
यह ट्रेंड फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी वायरल हो रहा है।
इस ट्रेंड के बारे में वास्तुविद् दुर्गेश तारे का क्या कहना है?
दुर्गेश तारे ने इसे शास्त्रों के विरुद्ध और गलत बताया है, तथा इसे तुरंत बंद करने की सलाह दी है।
कलयुग में किस तरह के शिवलिंग की पूजा का प्रमाण मिलता है?
शास्त्रों के अनुसार कलयुग में पार्थिवेश्वर यानी मिट्टी के शिवलिंग की पूजा का विधान है।
शिवलिंग का पिघलना या घटना क्यों अशुभ माना गया है?
शास्त्रों और वास्तु के अनुसार शिवलिंग का क्षरण होना आयु को कम करने वाला और अशुभ माना गया है।
क्या अंगूठे को शिवलिंग मानकर जल चढ़ाया जा सकता है?
ज्योतिषाचार्य दुर्गेश तारे के अनुसार इस बात का भी शास्त्रों में कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है।
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टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·21 मिनट पहले

अरे भाई, फ्रिज की बर्फ से शिवलिंग बनाने पर ज्योतिषी जी इतना क्यों भड़क रहे हैं? लोग तो बस शौक से रील्स बना रहे हैं, किसी की आस्था को ठेस थोड़ी पहुँचा रहे हैं। हर छोटी बात पर शास्त्रों को बीच में लाना ठीक नहीं लगता।

Aisha Khan@aisha-khan·44 मिनट पहले

व्यूज़ के चक्कर में लोग धर्म के नाम पर कुछ भी करने लगे हैं। फ्रिज की बर्फ से शिवलिंग बनाना बिल्कुल गलत है।

Amit Patel@amit-patel·43 मिनट पहले

आयशा जी, बिल्कुल सही कहा आपने। आजकल सोशल मीडिया पर रील्स और व्यूज के चक्कर में लोग सचमुच हद पार कर रहे हैं, जो कंटेंट क्रिएटर्स के लिए सिर्फ एक ट्रेंड है लेकिन आस्था के साथ खिलवाड़ बन चुका है।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·1 घंटे पहले

व्यूज और लाइक्स के चक्कर में लोग आजकल कुछ भी करने लगे हैं। फ्रिज की बर्फ से शिवलिंग बनाकर पूजा करना कहां की समझदारी है? क्या ऐसे वीडियो बनाने वालों पर कोई रोक नहीं लगनी चाहिए?

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·1 घंटे पहले

स्नेह, उज्जैन वाले ज्योतिषाचार्य दुर्गेश तारे ने एकदम सही कहा है कि लाइक्स के लिए लोग कुछ भी कर रहे हैं।

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