भागलपुर में सावन के लिए सजीं 50 से अधिक हरी साड़ियां, 500 रुपये से लेकर 12 हजार तक की वैरायटी उपलब्धयूरोप जाने वाले कई अमेरिकी अब क्यों लौट रहे हैं अपने देशमूलांक 8 दैनिक अंकज्योतिष 21 अक्टूबर: शनि का प्रभाव सिखाएगा कार्य संतुलन और बातचीत की अहमियतकच्चे तेल में उछाल और अमेरिकी ब्याज दर वृद्धि की आशंका से सोने में गिरावट जारी, 4,100 डॉलर का स्तर अहमहोर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से पाकिस्तान पर मंडराया ऊर्जा संकट, सर्दियों में गैस की किल्लत और महंगे आयात का खतरालखनऊ के व्यवसायी शिवा शर्मा हत्याकांड में मॉडल श्रद्धा दुबे के दो नए ऑडियो लीक, तीखी धमकियां आईं सामनेमोतिहारी में दुर्गा पूजा मेले में शराब पीकर हंगामा करने वाले 13 युवक गिरफ्तार, पुलिस ने की ब्रेथ एनालाइजर से जांचपानी के अंदर दौड़ने वाली अनोखी तकनीक से चोटिल एथलीटों की हो रही तेज़ी से रिकवरीब्रिटेन में बेरोजगारी दर घटकर 4.7 फीसदी पर आई, मजबूत पाउंड के मुकाबले लुढ़का यूरोवैश्विक बाजारों में तकनीकी शेयरों का उतार-चढ़ाव जारी, बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच प्रमुख सूचकांकों पर दबाव
त्रिशूल पर टिकी है बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी, जानें इस पावन धाम से जुड़े अनोखे रहस्यअध्यात्म
21 अक्तू॰ 2026, 11:59 am (16 मिनट पहले)· 0

त्रिशूल पर टिकी है बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी, जानें इस पावन धाम से जुड़े अनोखे रहस्य

वाराणसी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। इस पावन धाम के शिखर पर श्रीयंत्र सुशोभित है और यहां के शिवलिंग में शिव-शक्ति दोनों का वास माना जाता है।

भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी हुई काशी की नगरी पूरी दुनिया से एकदम अलग और अनूठी है। इसी प्राचीन नगरी में नाथों के नाथ बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। काशी में विराजमान बाबा विश्वनाथ देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में खास महत्व रखते हैं। यह पावन मंदिर देश भर के संतों, नागाओं और सनातन धर्मावलंबियों की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र माना जाता है। काशी के विश्वनाथ मंदिर से कई ऐसे रहस्य जुड़े हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

श्रीयंत्र और तंत्र साधना का केंद्र

वाराणसी में विराजे काशी विश्वनाथ पूरे संसार के नाथ हैं और उनका यह मंदिर कई मायनों में बेहद खास है। मुख्य मंदिर के शिखर पर श्रीयंत्र मंडित किया गया है, जिसके कारण यह स्थान तंत्र सिद्धियों का भी बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीयंत्र को शक्ति और माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस जगह को अत्यंत चमत्कारिक और ऊर्जावान समझा जाता है।

ये भी पढ़ें

शिव और शक्ति का अद्वितीय स्वरूप

काशी में विराजे बाबा का यह चमत्कारिक शिवलिंग इकलौता ऐसा शिवलिंग है जिसके एक हिस्से में भगवान शिव और दूसरे हिस्से में देवी शक्ति का वास माना जाता है। धार्मिक शास्त्रों में इस बात का वर्णन मिलता है कि शिवलिंग के दाहिने तरफ शक्ति स्वरूपा माता पार्वती और बाएं भाग में खुद भगवान शिव विराजमान हैं। ऐसी मान्यता है कि केवल इन दुर्लभ दर्शन मात्र से ही इंसान के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।

मोक्ष और तारक मंत्र का धाम

काशी में स्थित भगवान शिव का यह शिवलोक हजारों साल पुराना है और महाभारत काल के ग्रंथों में भी इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। बाबा विश्वनाथ के इस पवित्र धाम को मोक्ष और मुक्ति की नगरी भी कहा जाता है। यहां प्राण त्यागने वाले मनुष्य को स्वयं भगवान शिव तारक मंत्र देते हैं, जिससे जीव जन्म-मृत्यु के इस अंतहीन चक्र से हमेशा के लिए मुक्त होकर परम मोक्ष को प्राप्त करता है।

चारों द्वारों का रहस्य और शिवलिंग की स्थिति

काशी विश्वनाथ के मुख्य मंदिर में चार विशेष द्वार बने हैं जिन्हें चार अलग-अलग चीजों का प्रतीक माना जाता है। मंदिर के अर्चक श्रीकांत मिश्र ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इन चारों द्वारों के अलग-अलग नाम हैं जिन्हें शांति, कला, निवृत्ति और प्रतिष्ठा का द्वार कहा जाता है। पूरी दुनिया में केवल गिने-चुने ऐसे स्थान हैं जहां इस प्रकार के चारों द्वार मौजूद हैं, जिसके कारण तंत्र साधना के लिए यह भूमि बेहद सिद्ध मानी जाती है। इसके अलावा एक खास बात यह भी है कि यहां का शिवलिंग गर्भगृह के बिल्कुल बीच में न होकर ईशान कोण में स्थित है, जो विद्या और कला साधना का बड़ा प्रतीक है।

त्रिशूल की नोक पर बसी अविनाशी नगरी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी कुल तीन खंडों में बंटी हुई है जिसमें पहला केदार खंड, दूसरा विशेश्वर खंड और तीसरा ओमकलेश्वर खंड शामिल हैं। ये तीनों खंड भगवान शिव के त्रिशूल के तीन सिरों या नोकों के समान हैं। इसमें विशेश्वर खंड यानी काशी विश्वनाथ मंदिर वाला हिस्सा त्रिशूल के ठीक मध्य वाली नोक पर स्थापित माना जाता है। यही वजह है कि इस काशी और बाबा विश्वनाथ की इस पावन नगरी को अविनाशी कहा जाता है, यानी प्रलय के समय भी इस स्थान पर कोई आंच नहीं आती है।

सवाल-जवाब

काशी विश्वनाथ मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में स्थित है।
काशी विश्वनाथ मंदिर का मुख्य महत्व क्या है?
यह देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे मोक्ष प्राप्ति का प्रमुख धाम माना जाता है।
मंदिर के मुख्य शिखर पर क्या सुशोभित है?
मुख्य मंदिर के शिखर पर श्रीयंत्र मंडित है जो शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
शिवलिंग की बनावट में क्या विशेषता है?
इस शिवलिंग के दाहिने हिस्से में माता पार्वती और बाएं हिस्से में भगवान शिव का वास माना जाता है।
मंदिर में कुल कितने द्वार हैं?
मुख्य मंदिर में चार द्वार हैं जिन्हें शांति, कला, निवृत्ति और प्रतिष्ठा का द्वार कहा जाता है।
काशी को त्रिशूल पर बसी नगरी क्यों कहा जाता है?
काशी तीन खंडों में बंटी है जो त्रिशूल के तीन सिरों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और विशेश्वर खंड इसके मध्य में स्थित है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp