हस्तरेखा शास्त्र में जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा के साथ-साथ हृदय रेखा को भी विशेष स्थान प्राप्त है। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि यदि किसी जातक की हथेली में हृदय रेखा बिल्कुल शुद्ध, स्पष्ट और हल्की लालिमा लिए हुए हो, तो वह व्यक्ति अपने जीवन में बहुत नाम कमाता है। इस प्रकार की रेखा व्यक्ति को समाज में बड़ा मान-सम्मान और प्रतिष्ठा दिलाती है। सामान्य तौर पर हृदय रेखा हथेली के बुध पर्वत के ठीक नीचे से आरंभ होकर सूर्य पर्वत और शनि पर्वत को पार करते हुए गुरु पर्वत की ओर बढ़ती है। हालांकि, ऐसी उत्तम और पूर्ण रेखा बहुत कम लोगों के हाथों में पाई जाती है। जिन किस्मत वालों के हाथ में यह रेखा होती है, उनका जीवन सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण रहता है।
उत्तम और सर्वश्रेष्ठ हृदय रेखा के विशेष लक्षण
हस्तरेखा विज्ञान के मुताबिक, जिस व्यक्ति की हृदय रेखा सीधे बुध पर्वत से निकलकर गुरु पर्वत यानी तर्जनी उंगली तक पहुंच जाती है, उसे हस्तरेखा शास्त्र में सर्वश्रेष्ठ हृदय रेखा माना गया है। इस प्रकार की रेखा वाले लोग स्वभाव से बहुत दयालु, दूसरों का भला सोचने वाले, स्वतंत्र विचारों के धनी और प्रेम संबंधों में संयम रखने वाले होते हैं। ये लोग अपने जीवन में जो भी लक्ष्य निर्धारित करते हैं, उसे हर हाल में पूरा करके ही चैन लेते हैं। इसके अलावा, ऐसे जातक अपनी जीवनसंगिनी को अत्यधिक महत्व देते हैं और उनके प्रति पूरी तरह समर्पित रहते हैं।
इन लोगों के भीतर ईमानदारी कूट-कूट कर भरी होती है और समाज में इनकी विश्वसनीयता पर कभी आंच नहीं आती। ये कभी किसी को धोखा नहीं देते और जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा आगे रहते हैं। इनके रहन-सहन और आचार-विचार को एक आदर्श जीवन की श्रेणी में रखा जाता है। इन्हें अपने जीवनकाल में हर प्रकार का यश, वैभव, ऊंचा पद और मान-सम्मान सहज रूप से प्राप्त हो जाता है।
रेखा के झुकाव और अंतिम छोर का प्रभाव
हस्तरेखा में हृदय रेखा की अंतिम स्थिति और उसका झुकाव भी व्यक्ति के भविष्य के बारे में बहुत कुछ बताता है। जिन लोगों की हृदय रेखा बुध पर्वत के नीचे से शुरू होकर गुरु पर्वत के ठीक नीचे समाप्त होती है, वे अत्यधिक महत्वाकांक्षी प्रवृत्ति के होते हैं। ऐसे लोग अपने कड़े प्रयासों और निरंतर परिश्रम के बल पर अपने जीवन को सुखमय और समृद्ध बनाने की पूरी क्षमता रखते हैं। वे अपने सपनों को सच करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं।
यदि इस रेखा का अंतिम सिरा नीचे की तरफ झुक जाता है, तो जातक की कई इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं या फिर उसे अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। इसके विपरीत, यदि यह रेखा अपने अंतिम चरण में ऊपर की ओर उठती हुई दिखाई दे, तो ऐसा इंसान अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल करना चाहता है, उसे पाकर ही दम लेता है। इस प्रकार की विशेषता वाला मनुष्य बेहद भाग्यशाली माना जाता है।



















